दिल्ली की एक अदालत ने शुक्रवार को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) को 2005 में फ्रांस की कंपनी एयरबस इंडस्ट्री से पूर्ववर्ती कंपनी इंडियन एयरलाइंस द्वारा 43 विमानों की खरीद से जुड़े एक नये धनशोधन मामले में तिहाड़ जेल में लॉबिस्ट दीपक तलवार से पूछताछ करने की इजाजत दी। विशेष न्यायाधीश संतोष स्नेही मान ने ईडी को तलवार से पूछताछ करने की इजाजत दी। तलवार विदेशी एयरलाइनों को कथित रूप से फायदा पहुंचाने और राष्ट्रीय कंपनी एयर इंडिया को नुकसान पहुंचाने की सौदा-वार्ता से जुड़े एक भिन्न मामले में न्यायिक हिरासत में तिहाड़ जेल में है।

मौजूदा मामले में विशेष सरकारी वकीलों– डी पी सिंह और नीतेश राणा ने अदालत से कहा था कि खरीद से जुड़े धनशोधन के संबंध में पूरी आपराधिक साजिश का पता लगाने के लिए तलवार से पूछताछ करने की जरूरत है।

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राणा ने अदालत से कहा, ‘‘उसने (तलवार ने) एयरबस इंडस्ट्री से एक खाते में 92 करोड़ रूपये और दूसरे खाते में 142 करोड़ रूपये हासिल किये। वह इन सौदों में एयरबस से सीधा जुड़ा था और वह अपनी ही सौदा वार्ता कर रहा था। ’’ अदालत एयरबस मामले में तलवार को गिरफ्तार करने के लिए इजाजत की मांग संबंधी ईडी की एक अर्जी पर सुनवाई कर रही थी। अदालत ने ईडी को तलवार से तिहाड़ जेल के अंदर ही पूछताछ करने का निर्देश दिया।

न्यायाधीश ने कहा, ‘‘वह तो एक अन्य मामले में न्यायिक हिरासत में है ही। आपको वहां जाने और उससे पूछताछ करने से कौन सी बात रोक रही है? क्या वहां जाने और पूछताछ करने पर कोई रोक है?’’ इस पर ईडी ने अदालत से तलवार से तिहाड़ जेल में पूछताछ की अनुमति देने का अनुरोध किया और उसे इजाजत मिल गयी।

ईडी के अनुसार यह मामला इंडियन एयरलाइंस के अधिकारियों और अन्य अज्ञात व्यक्तियों ने दर्ज कराया था। इन सभी पर आरोप लगाया था कि अधिकारियों ने अपने पद का दुरूपयोग किया तथा एयरबस इंडस्ट्री के साथ साजिश रचकर उससे इंडियन एयरलाइंस द्वारा 43 विमानों की खरीद में उसे अनुचित लाभ पहुंचाया तथा सरकारी खजाने को नुकसान पहुंचाया।

ईडी ने कहा, ‘‘आर्थिक विषयों से संबंधित मंत्रिमंडलीय समिति/उच्चाधिकार मंत्रिसमूह ने 2006 में 43 एयरबस विमानों की खरीद को मंजूरी दी और प्रति विमान क्रयमूल्य इस शर्त के साथ तय किया गया एयरबस 1000 करोड़ रूपये की लागत से प्रशिक्षण एवं एमआरओ केंद्र स्थापित करेगी। ’’

ईडी ने कहा, ‘‘लेकिन उक्त शर्त को धोखे से हटाते हुए 43 विमानों की आपूर्ति का खरीद आर्डर दे दिया गया। एमआरओ और प्रशिक्षण केंद्र स्थापित करने की शर्त हटाने से एयरबस को 1000 करोड़ रूपये का अनुचित लाभ हुआ जिसे भारत सरकार द्वारा तय सहमत क्रयमूल्य से घटाया जाना चाहिए था।’’

उसने कहा कि जांच के प्रति तलवार का बर्ताव असहयोगपूर्ण रहा और जबतक उसे कानूनन बाध्य नहीं किया जाएगा वह जांच के सिलसिले में जांच अधिकारी के सामने पेश नहीं होगा।

पहले मामले में ईडी ने आरोप लगाया कि तलवार ने एयर इंडिया की कीमत पर विदेशी निजी एयरलाइन कंपनियों फायदा पहुंचाने के लिए बिचौलिये की भूमिका निभायी।

उसने अदालत से कहा वह नागर विमानन मंत्रालय, नेशनल एविएशन कंपनी ऑफ इंडिया, एयर इंडिया के उन अधिकारियों के नाम पता लगाने की कोशिश में जुटा है जिन्होंने एयर इंडिया को लाभकारी मार्गों और समय छुड़वाकर कतर एयरवेज, एमिरेट्स, एयर अरबिया समेत विदेशी एयरलाइनों की पक्षधरता की।