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किसानों की मांगें पूरी और आंदोलन वापस, सत्य की इस जीत में हम शहीद अन्नदाताओं को भी याद करते हैं : कांग्रेस

कृषि कानूनों को वापस लेने और किसानों की ओर से आंदोलन वापस लिये जाने के बाद कांग्रेस ने इसे सत्याग्रही किसान की जीत बताते हुए कहा कि सत्य की इस जीत में हम शहीद अन्नदाताओं को भी याद करते हैं। गौरतलब है कि मोदी सरकार द्वारा कृषि और किसानों से जुड़ी सभी मांगों पर सहमति देने के बाद एक सालभर से चल रहे किसान आंदोलन को किसानों ने गुरुवार को खत्म करने का ऐलान कर दिया। संयुक्त किसान मोर्चा ने एक अहम बैठक के बाद ऐलान किया कि वे 11 दिसंबर से दिल्ली की सीमाओं को खाली करना शुरू कर देंगे।

शहीद अन्नदाताओं को भी याद करते हैं

वहीं इस मसले पर कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने ट्वीट कर कहा, अपना देश महान है, यहां सत्याग्रही किसान हैं! सत्य की इस जीत में हम शहीद अन्नदाताओं को भी याद करते हैं। वहीं कांग्रेस महासचिव रणदीप सिंह सुरजेवाला ने गुरुवार को कहा, इतिहास साक्षी है कि अहंकार हमेशा हारता है। चाहे वो इतिहास के पन्नों में अंकित रावण का अहंकार हो, या प्रचंड बहुमत की मोदी सरकार का। उन्होंने कहा कि दिल्ली की सीमाओं पर 378 दिनों के सतत संघर्ष के बाद देश के अन्नदाताओं को मिली विजय के लिए करोड़ों किसानों व खेतिहर मजदूरों को हार्दिक बधाई। 

भारत के प्रजातंत्र ने समूचे विश्व को यह पाठ पढ़ाया 

किसान आंदोलन ने महात्मा गांधी के सिद्धांत को अक्षरश: सही सिद्ध किया है कि 'जनतंत्र की असली शक्ति जनता में निहित है।' सुरजेवाला ने कहा कि आज भारत के प्रजातंत्र ने समूचे विश्व को यह पाठ पढ़ाया है कि अगर मुट्ठी भर पूंजीपतियों के सहयोग से सत्ता हासिल भी कर लोगे तो भी उसके संचालन के सूत्र जनता के हाथ ही में रहते हैं। केंद्र सरकार की सदन की असंवैधानिक मनमानियों को सड़क पर कैसे ठीक किया जाता है, आज ये पाठ किसानों के आंदोलन ने देश को पढ़ाया है। आज हम कह सकते हैं कि प्रजातंत्र के नए युग की शुरूआत हुई है।

मजदूर को जानलेवा कर्ज मुक्ति के बंधन से आजाद 

उन्होंने कहा कि किसानों को उपज का केवल 'न्यूनतम समर्थन मूल्य' नहीं, बल्कि 'लाभकारी मूल्य' दिलाने का दिन है। आज साल 2022 शुरू होने में मात्र 20 दिन शेष हैं, इसलिए किसान की आय साल 2022 तक दोगुनी करने का वादा निभाने का दिन है। भारत सरकार के एनएसओ के मुताबिक किसान की औसत आय तो 27 रुपये प्रतिदिन है, जो मनरेगा की मजदूरी से भी कम है। किसान-खेतिहर मजदूर को जानलेवा कर्ज मुक्ति के बंधन से आजाद करवाने का दिन है।

सात साल में 10 लाख करोड़ माफ कैसे कर दिए?

सुरजेवाला ने केंद्र से सवाल करते हुए कहा, देश के हर किसान पर औसत 72 हजार रुपये का कर्ज है और मोदी सरकार यह कहती है कि किसान की कर्जमाफी के लिए उसके पास फूटी कौड़ी नहीं, तो यह सोचने का वक्त है कि फिर पूंजीपति मित्रों के सात साल में 10 लाख करोड़ माफ कैसे कर दिए? क्या किसान को 6 हजार रुपये प्रति हेक्टेयर का सालाना, जुमला है ? उन्होंने कहा कि केंद्र ने डीजल पर एक्साइज शुल्क 21.80 प्रति लीटर बढ़ाकर, खाद पर 5 प्रतिशत जीएसटी लगाकर, कीटनाशक दवाई पर 18 प्रतिशत जीएसटी लगाकर, ट्रैक्टर और खेती के उपकरणों पर 12 प्रतिशत जीएसटी लगाकर किसानों के साथ कैसा न्याय किया है।