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वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बैंकों से कहा- जांच एजेंसियों से डरे बिना सभी पात्र कर्जदारों को स्वत: कर्ज दें

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शनिवार को बताया कि बैंकों को ‘3-सी’ नाम से चर्चित जांच एजेंसियों ‘सीबीआई, सीवीसी और सीएजी’ के डर के बिना अच्छे कर्जदारों को स्वचालित रूप से कर्ज देने के लिये कहा है। उन्होंने कहा कि शुक्रवार को सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों और वित्तीय संस्थानों के मुख्य कार्यकारी अधिकारियों व प्रबंध निदेशकों के साथ बैठक में स्पष्ट निर्देश दिये गये हैं कि बैंकों को ऋण देने से डरना नहीं चाहिये, क्योंकि सरकार द्वारा 100 प्रतिशत गारंटी दी जा रही है। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेता नलिन कोहली के साथ एक बातचीत में यह कहा। वित्त मंत्री की इस बातचीत को पार्टी के सोशल मीडिया खातों पर डाला गया है।

सीतारमण ने कहा, ‘‘कल, मैंने दोहराया कि अगर कोई निर्णय गलत हो जाता है, और अगर कोई नुकसान होता है, तो सरकार ने 100 प्रतिशत गारंटी दी है। यह व्यक्तिगत अधिकारी और बैंक के खिलाफ नहीं जाने वाला है। अत: बिना किसी डर के उन्हें इस स्वचालित मार्ग को इस अर्थ में अपनाना चाहिये कि सभी पात्र लोगों को अतिरिक्त ऋण और अतिरिक्त कार्यशील पूंजी उपलब्ध हो।’’

सरकार ने 20.97 लाख करोड़ रुपये के व्यापक आर्थिक पैकेज के हिस्से के रूप में एमएसएमई क्षेत्र के लिये तीन लाख करोड़ रुपये की आपात ऋण गारंटी योजना की घोषणा की है। यह कहा जा रहा है कि बैंकिंग क्षेत्र में थ्री-सी यानी केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई), केंद्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी) और नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) द्वारा अनुचित उत्पीड़न की आशंका के कारण निर्णय प्रभावित हो रहे हैं।

उन्होंने कहा कि वित्त मंत्रालय ने इन आशंकाओं को दूर करने के लिये कई कदम उठाये हैं। इन कदमों में कुछ ऐसी अधिसूचनाओं को वापस लेना भी शामिल है, जो बैंकरों में डर पैदा कर रहे थे। सीतारमण ने कहा, इन बैंकों के मन में चिंताएं पहले भी थीं और बहुतों को अब भी यह डर रहता है।और उसका ठोस आधार भी है। वास्तव में मैंने पिछले सात-आठ महीनों में कम से कम तीन बार बैंकों से कहा है कि उनके मन में तीन-सी का डर नहीं होना चाहिये।’’

आर्थिक पैकेज में आतिथ्य सत्कार, वाहन और नागरिक उड्डयन सहित कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों को छोड़ दिये जाने को लेकर हो रही आलोचना के बारे में पूछे जाने पर सीतारमण ने कहा कि सरकार ने एक क्षेत्र आधारित दृष्टिकोण नहीं बल्कि समग्र दृष्टिकोण अपनाया है। उन्होंने कहा, कृषि और बिजली क्षेत्रों में सुधार किये गये हैं। इन्हें छोड़कर मैंने किसी भी क्षेत्र विशेष का नाम नहीं लिया है। इसे अब एमएसएमई पैकेज कहा जा रहा है, लेकिन इसमें एमएसएमई शामिल हैं और अन्य क्षेत्रों को भी शामिल रखने के प्रयास किये गये हैं। अत: आप जिन क्षेत्रों का नाम ले रहे हैं, इससे (पैकेज से) उन्हें भी लाभ मिलेगा।’’