नई दिल्ली : पाकिस्तान द्वारा आतंकवादियों की फंडिंग रोक पाने में विफल रहने के कारण फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (एफएटीएफ) ने उसे निगरानी सूची (ग्रे लिस्ट) में डाल दिया है। आतंकवादी को आर्थिक मदद करने के आरोप के दौरान यह कारवाही की थी। उसके बाद अपकिस्तान अपनी छवि सुधारने के लिए वह लगातार कोशिश में रहा है। मगर साड़ी कोशिशें बेकार साबित होती रही है। इस्लामाबाद ने इस कार्रवाई से बचने के लिए काले धन को वैध बनाने की प्रक्रिया पर लगाम लगाने के मकसद से 26 सूत्रीय कार्यक्रम की पेशकश की थी। जिससे आतंकियों को आर्थिक मदद पहुंचाने वाली गतिविधियों को रोका जा सके।

पाकिस्तानी अखबारों की मानें तो इस्लामाबाद ने पिछले महीने बैंकॉक में हुई एफएटीएफ की बैठक में आतंकी संगठनों के खिलाफ कार्रवाई से जुड़ी योजना का ब्लू प्रिंट पेश किया था। लेकिन पाकिस्तान लश्कर-ए-तैयबा, जमात-उद-दावा और फलाह-ए-इंसानियत फाउंडेशन जैसे संगठनों के खिलाफ की गई कार्रवाई के सिलसिले में कोई ठोस दलील पेश नही कर पाया था। हक्कानी नेटवर्क के खिलाफ की कार्रवाई करने के लिए पाकिस्तान पर दबाव है।

लेकिन पाकिस्तान ने यह कहकर अपना बचाव करने की कोशिश की है कि हक्कानी नेटवर्क अफगानिस्तान में है। हालांकि, पाकिस्तान एक बार फिर ब्लैक लिस्ट होने से बच गया है जो उसके लिए थोड़ी राहत की बात है। पाकिस्तान ने पूरा कूटनीतिक प्रयास किया था कि 37 सदस्य देशों वाले एफएटीएफ का फैसला उसके खिलाफ न जाए पर वह इसमें नाकाम रहा। पाकिस्तान का इस निगरानी सूची में बने रहना उसकीअर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ा झटका होगा और इससे अमेरिका के साथ इसके संबंध ज्यादा तनावपूर्ण होंगे।