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गजेंद्र सिंह शेखावत बोले- जल को समवर्ती सूची में लाने का कोई विचार नहीं

केंद्र सरकार ने मंगलवार को स्पष्ट किया कि जल को संविधान की समवर्ती सूची में लाने का कोई प्रस्ताव नहीं है। इस संबंध में लग रही अटकलों पर विराम लगाते हुए जल शक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने राज्यसभा में कहा कि जल के संबंध में संविधान सभा में विस्तृत चर्चा हुयी थी और संविधान निर्माता बाबा साहेब आंबेडकर ने इसे राज्य की सूची में रखने की व्यवस्था दी थी। 

उन्होंने कहा कि जल को समवर्ती सूची में लाने के संबंध में सरकारिया आयोग और पंछी आयोगों ने भी गौर किया था। दोनों आयोगों में से किसी ने भी जल को केंद्र या समवर्ती सूची में लाने के प्रस्ताव पर सहमति नहीं दी। शेखावत कांग्रेस सदस्य केवीपी रामचंद्र राव के एक ध्यानाकर्षण प्रस्ताव पर सदस्यों द्वारा मांगे गए स्पष्टीकरण का जवाब दे रहे थे। अपने प्रस्ताव में राव ने जल संकट की उभरती समस्या से निपटने के लिए राष्ट्रीय सिंचाई परियोजनाओं को पूरा करने की खातिर जल को समवर्ती सूची में स्थानांतरित करने की आवश्यकता पर जोर दिया। 

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शेखावत ने कहा कि पानी का संकट पूरे विश्व में है और यह एक गंभीर चुनौती बन कर सामने आया है। भारत के सामने यह चुनौती ज्यादा है। उन्होंने कहा कि विभिन्न स्रोतों से देश को करीब 3800 अरब घन मीटर (बीसीएम) पानी मिलता है जबकि सतह पर इसके भंडारण की क्षमता 257 बीसीएम है और 457 बीसीमए भूमिगत जल रिचार्ज होता है। 

उन्होंने कहा कि देश की अधिकतम जरूरत करीब 1100 बीसीएम है और मिलने वाले जल का उचित प्रबंधन किया जाए तो आने वाले कई वर्षों तक यह समस्या दूर हो सकती है। केंद्र के जल जीवन मिशन योजना पर कुछ सदस्यों द्वारा संदेह जताने पर शेखावत ने कहा कि सरकार निश्चित रूप से प्रधानमंत्री मोदी द्वारा की गयी घेाषणा को पूरा करेगी। उन्होंने कहा कि किसी भी व्यक्ति को प्रधानमंत्री की घोषणा पर शक नहीं है। इस मिशन के तहत हर घर में पाइप के द्वारा पानी पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। 

उन्होंने कहा कि जल संचयन और पानी रोकने के लिए मनरेगा के तहत पांच साल में 30,000 करोड़ रूपये का निवेश किया गया है। पोलावरम परियोजना का जिक्र करते हुए शेखावत ने कहा कि शुरू में यह करीब 16,000 करोड़ रूपये की परियोजना थी और बाद में राज्य के अनुसार यह विभिन्न वजहों से बढ़कर 55,000 करोड़ रूपए की हो गयी। उन्होंने कहा कि इस के बाद वित्त मंत्रालय ने संशोधित लागत समिति गठित की और इसकी कुछ बैठकें भी हुयी हैं। समिति ने सरकार से कुछ सूचना मांगी है जो उसे अभी तक नहीं मिली है। 

वर्षा जल संग्रहण की चर्चा करते हुए मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने ‘‘मन की बात’’ कार्यक्रम में भी इस विषय पर जोर दिया था। उसके बाद इस संबंध में जनचेतना का भाव उभरा है और आम लोगों के मन में जल संरक्षण प्रमुख विषय बन गया है। उन्होंने कहा कि चर्चा के दौरान अक्सर यह बात कही जाती है कि जल राज्यों का अधिकार है लेकिन जब जिम्मेदारी की बात आती है तो वह भारत सरकार पर डाल देने का प्रयास किया जाता है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि संसाधन जिसका है, प्राथमिकी जिम्मेदारी भी उसी की है।