तमिलनाडु, केरल और लक्षद्वीप के संपूर्ण तटीय क्षेत्र में सक्रिय चक्रवाती तूफान ‘ओखी’ के कारण भारी नुकसान हुआ है जिससे 2004 में आई भयंकर सुनामी जैसी आशंका उत्पन्न पैदा हो गई है।  एक स्थानीय महिला फिलोमीना ने बताया,’ समुद्र में गए मेरे परिवार के सभी सदस्य गुरुवार सुबह से लापता हैं, एक दशक के बाद यह पहली बार है जब मैं इस तरह के भयंकर चक्रवाती तूफान का सामना कर रही हूं।

स्थानीय लोगों के अनुसार गहरे समुद्र में मछली पकड़ने के लिए गए लगभग 200 से अधिक मछुआरे अभी तक वापस नहीं लौटे हैं। इसी बीच, समुद्र से वापस लौटे 20 मछुआरों के एक समूह ने प्रशासन पर राहत एवं बचाव कार्य को देरी से शुरू करने का आरोप लगाया और वेट्टुकड़ में मछुआरों ने सड़क जाम कर विरोध प्रदर्शन किया।

पूर्व मुख्यमंत्री उम्मन चांडी ने भी चक्रवाती तूफान ओखी के कारण प्रभावित तटीय क्षेत्र का दौरा किया। श्री चांडी ने कहा कि उन्होंने इस संबंध में मुख्यमंत्री से बात की और मामले की गंभीरता को देखते हुए राहत एवं बचाव कार्यों में तेजी लाने के लिए कहा है।

राज्य की मत्स्य पालन मंत्री मर्सीकुट्टी अम्मा ने कहा कि मछुआरों को चक्रवाती तूफान की चेतावनी की सूचना पहले ही दे दी गयी थी। श्रीमती अम्मा के अनुसार नौसेना और तटरक्षक बल ने लगभग 70 मछुआरों का पता लगा लिया गया है और उन्हें बचाने के लिए राहत एवं बचाव कार्य जारी है। उन्होंने बताया कि नौसेना और तटरक्षक बल ने आज सुबह लगभग 33 मछुआरों को बचा लिया।

कोल्लम से प्राप्त एक अन्य रिपोर्ट के अनुसार लगभग 20 मछुआरे लापता हैं जिनका पता लगाने के लिए राहत एवं बचाव अभियान चलाया जा रहा है। चक्रवाती तूफान ओखी के कारण मुल्लापेरियार बांध का जलस्तर 127.9 फीट तक बढ़ गया है। अधिक लेटेस्ट खबरों के लिए यहां क्लिक  करें.