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लोकसभा में साध्वी प्रज्ञा के शपथ लेने के दौरान विपक्ष ने किया हंगामा

अपने बयानों के कारण प्राय : विवादों में रहने वाली भाजपा सांसद साध्वी प्रज्ञा ठाकुर सोमवार को जब लोकसभा की सदस्यता की शपथ ले रही थीं तो वहां भी विवाद ने उनका पीछा नहीं छोड़ा। शपथ लेने के दौरान उन्होंने जब अपना नाम पढ़ा तो उसे लेकर कई विपक्षी सदस्यों ने आपत्ति व्यक्त की। 

विपक्षी सदस्यों की तीखी आपत्ति के बाद कार्यवाहक अध्यक्ष वीरेन्द्र कुमार ने आश्वासन दिया कि साध्वी प्रज्ञा का जो नाम निर्वाचन प्रमाणपत्र में लिखा होगा वही सदन के रिकार्ड में दर्ज किया जाएगा। सत्रहवीं लोकसभा के प्रथम सत्र के पहले दिन नवनिर्वाचित सदस्यों को सदन की सदस्यता की शपथ राज्यवार दिलवाई गयी। 

जब मध्य प्रदेश के सदस्यों का नंबर आया तो भोपाल से निर्वाचित होकर आयी साध्वी प्रज्ञा का नाम पुकारा गया। साध्वी प्रज्ञा ने संस्कृत में शपथ ली। उन्होंने अपना नाम साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर पूर्णचेतनानन्द अवधेशानंद गिरि बोला। उन्होंने अपनी शपथ पूरी करने के बाद ‘‘भारत माता की जय’’ भी बोला। 

उनके इस नाम को लेकर कांग्रेस समेत विपक्ष के कुछ सदस्यों ने आपत्ति जताई। पीठासीन अध्यक्ष वीरेंद्र कुमार ने प्रज्ञा ठाकुर से संविधान या ईश्वर के नाम पर शपथ लेने को कहा। साध्वी प्रज्ञा ठाकुर ने कहा कि वह ईश्वर के नाम पर ही शपथ ले रही हैं और अपना वही नाम ले रही हैं जो उन्होंने फॉर्म में भरा है। 

इस बीच कुछ देर तक लोकसभा के अधिकारी और कर्मचारी रिकार्ड में साध्वी प्रज्ञा का रिकार्ड में उल्लेखित नाम खोजते रहे। इसके बाद जब अध्यक्ष के हस्तक्षेप से हंगामा थमा तो ठाकुर ने शपथ-पत्र का नाम के बाद का हिस्सा ही पढ़ा। इस पर भी कांग्रेस के सदस्यों ने देर तक आपत्ति जताई। 

हालांकि कार्यवाहक अध्यक्ष कुमार ने आश्वासन दिया कि साध्वी प्रज्ञा का जो नाम निर्वाचन प्रमाणपत्र में लिखा होगा वही सदन के रिकार्ड में दर्ज किया जाएगा। साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर ने लेाकसभा चुनाव में भोपाल से कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह को हराया है। 

वह महात्मा गांधी के हत्या के दोषी नाथूराम गोडसे और महाराष्ट्र एटीएस के पूर्व प्रमुख और मुंबई आतंकवादी हमले दौरान जान गंवाने वाले हेमंत करकरे के बारे में चुनाव प्रचार के दौरान दिये गये उनके बयानों को लेकर विवादों में रहीं। उनके शपथ लेने के बाद कुछ सदस्य शपथ के अंत में भारत माता की जय बोल रहे थे।

 इस पर आरएसपी के एन के प्रेमचंद्रन ने आपत्ति जताते हुए कहा कि शपथ-पत्र का एक प्रारूप और प्रक्रिया होती है, उसी अनुसार शपथ ली जानी चाहिए। इस पर पीठासीन वीरेंद्र कुमार ने कहा, ‘‘सदस्यों से अनुरोध है कि वे शपथ-पत्र का ही वाचन करें।’’

उनकी इस व्यवस्था का संप्रग अध्यक्ष सोनिया गांधी समेत कांग्रेस के अन्य सदस्यों ने मेज थपथपाकर स्वागत किया। आसन से आयी व्यवस्था के बाद भले ही शपथ लेने वाले सत्ता पक्ष के संबंधित सदस्य ने यह नारा लगाना बंद कर दिया किंतु सत्ता पक्ष के अन्य सदस्य अपने पक्ष के सदस्य के शपथ लेने के बाद ‘‘भारत माता की जय’’ का नारा लगाने लगे। 

आम चुनाव के दौरान नाथूराम गोडसे के संबंध में दिये गये बयान के कारण भारी विवाद का सामना करने वाली भारतीय जनता पार्टी की सदस्य साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर को सोमवार को लोकसभा में पहले ही दिन उस वक्त विपक्ष के विरोध का सामना करना पड़ जब उन्होंने शपथ लेते वक्त अपने नाम के साथ ‘चिन्मयानंद अवधेशानंद गिरि’ जोड़ दो महिला मार्शलों के सहारे लोकसभा महासचिव के पास शपथ लेने पहुंची साध्वी प्रज्ञा ने संस्कृत भाषा में शपथ लेते हुए अपने नाम के साथ ‘चिन्मयानंद अवधेशानंद गिरि’ भी जोड़, जिसका कांग्रेसी सदस्यों ने जोरदार विरोध किया। विरोध कर रहे सदस्यों का कहना था कि भाजपा सदस्य शपथ संबंधी नियमावली की अनदेखी करके अपनी इच्छा से ‘चिन्मयानंद अवधेशानंद गिरि’ का नाम जोड़ रही हैं। 

अस्थायी अध्यक्ष वीरेन्द, कुमार ने इस ओर साध्वी प्रज्ञा का ध्यान आकृष्ट किया और कहा कि वह ईश्वर या सत्यनिष्ठा के नाम पर शपथ लें। इस पर पहली बार संसद पहुंची साध्वी प्रज्ञा ने कहा कि उन्होंने अपना पूरा नाम ‘साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर चिन्मयानंद अवधेशानंद गिरि’ रिकॉर्ड में दर्ज कराया है और उन्होंने कोई गलत नहीं किया, लेकिन कांग्रेसी सदस्य ‘ओबे द रूल’ (नियमों का पालन करें) कहते हुए हंगामा करने लगे।

 अस्थायी अध्यक्ष ने लोकसचिव कार्यालय के कर्मचारियों से साध्वी को दिया गया निर्वाचन प्रमाण पत्र मांगा, लेकिन वह वहां उपलब्ध नहीं था। हंगामे के बीच ही साध्वी प्रज्ञा ने विपक्ष की ओर इशारा करके कहा, ‘‘कम से कम ईश्वर के नाम पर शपथ तो लेने दो।’’ लेकिन हंगामा कर रहे सदस्य नहीं माने, फिर अस्थायी अध्यक्ष को अपनी सीट से खड़ा होना पड़ा ।

उन्होंने हंगामा कर रहे सदस्यों को आश्वस्त किया कि वह मामले का संज्ञान लेंगे और जो नाम निर्वाचन प्रमाण पत्र में होगा वहीं रिकॉर्ड में भी जायेगा। कांग्रेस सदस्य तब तक हंगामा करते रहे जब तक महासचिव ने अस्थायी अध्यक्ष के निर्देश पर दूसरे सदस्य को शपथ के लिए बुला नहीं लिया। 

कांग्रेस के दिग्गज नेता दिग्विजय सिंह को हराकर पहली बार संसद पहुंची साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर को सीढ़ियां उतरने और चढ़ने में दिक्कत होती है, इसलिए उन्हें दो महिला मार्शलों ने सहारा देकर मंच तक पहुंचाया था। चुनाव के दौरान साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर ने महात्मा गांधी के हत्यारे नाथू राम गोड्से को देशभक्त बताया था, जिसे लेकर बहुत विवाद हुआ था।