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पाकिस्तान के सीमा पार आतंकवाद से सख्ती से निपटना जारी रखेगा भारत : सरकारी सूत्र

कड़ाके की सर्दी पड़ने से पहले भारत में अधिकतम आतंकियों की घुसपैठ कराने की पाकिस्तानी सेना की लगातार कोशिशों के जवाब में भारतीय सेना पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में संदिग्ध आतंकी ठिकानों पर “सटीक लक्षित हमले” कर रही है। 

सुरक्षा प्रतिष्ठान से जुड़े सूत्रों ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी। 

सेना ने स्पष्ट किया है कि बृहस्पतिवार को नियंत्रण रेखा पर कोई गोलीबारी या संघर्षविराम का उल्लंघन नहीं हुआ। 

सीमा पार आतंकवाद के हाल के प्रयासों के संदर्भ में सूत्रों ने कहा कि पाकिस्तान में ‘डीप स्टेट’ (पर्दे के पीछे छद्म रूप से काम करने वाली सरकारी शक्तियां) ने आतंकवाद रोधी निगरानीकर्ता ‘एफएटीएफ’ की निगरानी से बचने और उसके साथ ही जम्मू कश्मीर में अशांति को हवा देने के लिए आतंकवादियों की मदद के उद्देश्य से संतुलन साधने की कोशिश की है। 

सेना ने कहा कि बृहस्पतिवार को उसके द्वारा सर्जिकल स्ट्राइक किये जाने संबंधी कयासपूर्ण खबरें “13 नवंबर को हुए संघर्षविराम उल्लंघन के विश्लेषण पर आधारित हैं। नियंत्रण रेखा पर आज कोई गोलीबारी या संघर्षविराम का उल्लंघन नहीं हुआ।” 

पाकिस्तान ने बीते शुक्रवार को संघर्ष विराम उल्लंघन की बड़ी घटना को अंजाम देते हुए उत्तरी कश्मीर में नियंत्रण रेखा पर भारी गोलाबारी की जिसमें कम से कम चार नागरिकों के अलावा पांच सुरक्षाकर्मियों की मौत हो गई। 

भारतीय सेना ने इस संघर्ष विराम उल्लंघन का मुंहतोड़ जवाब देते हुए कई पाकिस्तानी ठिकानों पर टैंक रोधी निर्देशित मिसाइलों और तोपों से गोले दागे जिसमें कम से कम आठ पाकिस्तानी सैनिकों की मौत हुई और 12 अन्य घायल हो गए। 

सूत्रों ने कहा कि बीते कुछ हफ्तों में जम्मू कश्मीर में आतंकवादियों की घुसपैठ कराने में मदद के उद्देश्य से पाकिस्तानी सेना नियंत्रण रेखा पर भारत की तरफ के असैन्य क्षेत्रों को लगातार मोर्टार और अन्य भारी हथियारों से निशाना बना रही है। 

आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, 2019 में जहां पूरे साल में 18 नागरिक पाकिस्तान की गोलाबारी में मारे गए थे, वहीं इस साल अब तक 21 निर्दोष नागरिकों की जान पाकिस्तान की गोलाबारी में जा चुकी है। 

सूत्रों ने कहा कि भारतीय सेना द्वारा आतंकवादियों (अधिकतर पाकिस्तानी और विदेशी) को नाकाम करने के लिए खुफिया सूचना आधारित लक्षित हमले किए जा रहे हैं और इन अभियानों में अपनी तरफ नुकसान की गुंजाइश बेहद नगण्य रहती है। 

उन्होंने कहा कि जम्मू कश्मीर में अशांति “भड़काने” और युवाओं को हथियार मुहैया कराने के लिए पाकिस्तान द्वारा नया तरीका अपनाया जा रहा है जिससे बढ़ते अंतरराष्ट्रीय दवाब के बीच किसी तरह की निगरानी से बचा जा सके। 

एक सैन्य सूत्र ने कहा, “पाकिस्तान नियंत्रण रेखा पर भारत की तरफ शांतिपूर्वक रह रहे ग्रामीणों को निशाना बनाकर इलाके में रहने वालों को यह संदेश देना चाहता है कि आतंकवाद को लेकर पाकिस्तानी निर्देशों की नाफरमानी जानलेवा साबित होगी।” 

उन्होंने कहा, “नागरिकों को खास तौर पर निशाना बनाने की पाकिस्तानी सेना की कार्रवाई का जवाब भारतीय सेना पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में संदिग्ध आतंकी लॉन्च पैड पर सटीक लक्षित हमले करके दे रही है।” 

सूत्रों ने कहा कि पाकिस्तान सहानुभूति बटोरने और अंतरराष्ट्रीय दानदाताओं से सहायता हासिल करने के उद्देश्य से वहां हो रही आतंकवादियों की मौत को नागरिकों की मौत के तौर पर दिखा रहा है। 

सूत्रों ने कहा कि पाकिस्तानी सेना नियंत्रण रेखा से लगे भारतीय ठिकानों पर भी भारी हथियारों से गोलीबारी कर रही है। 

आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक नियंत्रण रेखा पर इस साल घुसपैठ की आठ कोशिशों को नाकाम किया गया और 14 आतंकवादियों को मार गिराया गया। 

सूत्रों ने कहा कि भारत द्वारा पिछले साल बालाकोट हवाई हमले के बाद से पाकिस्तान आतंकी प्रशिक्षण शिविरों वाले स्थानों की कड़ी निगरानी कर रहा है। पुलवामा में हुए आतंकी हमले में सीआरपीएफ के 40 जवानों की मौत के बाद कार्रवाई करते हुए भारतीय विमानों ने पिछले साल 26 फरवरी को पाकिस्तान के अंदर घुसकर जैश-ए-मोहम्मद के आतंकवादी प्रशिक्षण शिविर पर बम बरसाए थे। 

भारत की इस कार्रवाई ने सीमा पार आतंकवाद से निपटने के देश के रुख में व्यापक बदलाव को परिलक्षित किया था। 

एक सुरक्षा अधिकारी के मुताबिक, “पाकिस्तान के झूठे विमर्श के बहकावे में आकर आतंकी तंजीम में शामिल होने वाले भटके हुए युवा सुरक्षा बलों के ठोस प्रयासों के बाद बड़ी संख्या में आत्मसमर्पण कर वापस मुख्यधारा में लौट रहे हैं। सुरक्षा बलों के इस प्रयास में आतंकवादियों के माता-पिता, दोस्त और परिजन भी मदद कर रहे हैं।”