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देश

नफरत फैलाने के लिए अलगाववादी तत्वों की कही बातों पर भारत ध्यान नहीं देगा : विदेश मंत्रालय

विदेश मंत्रालय ने कहा है कि खालिस्तान समर्थक समूह ‘द सिख फॉर जस्टिस’ (एसएफजे) का सिख समुदाय की मुख्य धारा में कोई पैठ नहीं है और नफरत फैलाने के लिए अलगाववादी तत्वों द्वारा कही जाने वाली बातों पर भारत ध्यान नहीं देगा। 

अलगाववादी एजेंडा के तहत 2020 में सिखों का जनमत संग्रह कराने पर जोर दे रहे अमेरिकी संगठन एसएफजे को उसकी कथित राष्ट्र विरोधी गतिविधियों को लेकर सरकार ने बुधवार को प्रतिबंधित कर दिया। 

इस प्रतिबंध के बारे में एक सवाल का जवाब देते हुए विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने कहा कि यह एसएफजे एक अतिवादी समूह है, जो पंजाब में भारत विरोधी और विध्वंसकारी गतिविधियों में संलिप्त है तथा उसने चरमपंथ के हिंसक रूपों का समर्थन किया है। 

कुमार ने संवाददाताओं से कहा कि यह समझना जरूरी है कि कनाडा और दुनिया के अन्य हिस्से में रहने वाले सिख भारत के साथ मधुर संबंध रखते हैं। वे लोग भारत के साथ और अपने मौजूदा निवास वाले देश के साथ बेहतर संबंध चाहते हैं।

साथ ही, ‍‍विषमताएं पैदा करने और नफरत फैलाने के मकसद से अतिवादी तत्वों को जो कुछ कहना है उस पर हम ध्यान नहीं देंगे। 

उन्होंने कहा कि इस समूह की सिख समुदाय की मुख्यधारा में कोई पैठ नहीं है और भारत कनाडा तथा दुनिया के अन्य हिस्से में रहने वाले सिख समुदाय के लोगों के साथ बातचीत करने की कोशिश जारी रखेगा। 

अमेरिका, कनाडा और ब्रिटेन आदि देशों में विदेशी नागरिकता वाले कुछ कट्टरपंथी सिखों द्वारा संचालित एसएफजे को गैर कानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम, 1967 की धारा 3 (1) के प्रावधानों के तहत गैरकानूनी घोषित कर दिया गया है। इस समूह का मुख्य उद्देश्य पंजाब को एक स्वतंत्र और सप्रभु देश बनाना है।