केन्द्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने बुधवार को दिल्ली उच्च न्यायालय से कहा कि सीबीआई के विशेष निदेशक राकेश अस्थाना और डीएसपी देवेंद्र कुमार के खिलाफ रिश्वत के आरोपों की जांच जारी रहनी चाहिए और उनके खिलाफ दर्ज प्राथमिकी को खारिज करने का उनका अनुरोध ठुकराया जाना चाहिए।

न्यायमूर्ति नाजिमी वजीरी के सामने सीबीआई की ओर से दलीलें देते हुए अतिरिक्त सालीसिटर जनरल (एएसजी) विक्रमजीत बनर्जी ने कहा कि दोनों अधिकारियों की याचिकाओं में कोई दम नहीं है और एजेंसी इस मामले में पूरी तरह से जांच करने के लिए बाध्य है।

अदालत ने सीबीआई, केन्द्र, अस्थाना, कुमार, सीबीआई निदेशक आलोक कुमार वर्मा और संयुक्त निदेशक ए के शर्मा के वकीलों की दलीलें सुनने के बाद विभिन्न याचिकाओं पर आदेश सुरक्षित रख दिया।

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एएसजी ने कहा कि कानून के मुताबिक, संज्ञेय अपराधों के मामले में प्राथमिकी दर्ज करनी होती है और जांच अधिकारी जांच के दौरान साक्ष्यों की विश्वसनीयता पर गौर करता है।

वर्मा की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता अमित सिब्बल ने कहा कि अस्थाना के खिलाफ रिश्वत के आरोपों को लेकर प्राथमिकी दर्ज करने में कानून की सभी अनिवार्य प्रक्रियाओं का पालन किया गया।

हैदराबाद के शिकायतकर्ता कारोबारी सतीश बाबू सना ने इस मामले में राहत पाने के लिए रिश्वत देने का आरोप लगाया था। सना ने अस्थाना के खिलाफ भ्रष्टाचार, वसूली और गंभीर कदाचार जैसे आरोप भी लगाए थे।

सना ने हालांकि इस मामले में पक्षकार बनाने के अपने अनुरोध पर जोर नहीं दिया। उन्होंने कहा कि वह जरूरत के हिसाब से एजेंसी के साथ सहयोग करेंगे और पहले भी तीन बार जांच में शामिल हो चुके हैं।

अदालत ने अस्थाना के खिलाफ कार्यवाही पर यथास्थिति कायम रखने का सीबीआई को निर्देश का अपना अंतरिम आदेश अगली तारीख तक बढा दिया। कुमार को 31 अक्टूबर को जमानत मिली थी।