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कपिल सिब्बल ने नई शिक्षा नीति का किया स्वागत, बोले- नई नीति का दृष्टिकोण सही, मगर लागू करने का रास्ता स्पष्ट नहीं

मोदी सरकार ने नई शिक्षा नीति को मंजूरी दे दी है। इसी के साथ है, अब 34 साल बाद देश में नई शिक्षा नीति लागू होगी। इस बीच, पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कपिल सिब्बल ने कहा है कि नई शिक्षा नीति का दृष्टिकोण सही है लेकिन इसमें कई कागजी बातें हैं तथा अनेक प्रावधानों को लागू करने का रास्ता नहीं सुझाया गया है। सिब्बल ने कहा, ‘‘नई शिक्षा नीति के बारे में मैं कहूंगा कि इसका दृष्टिकोण सही रास्ते पर जाता है। लेकिन इसके अनेक प्रावधानों एवं प्रस्तावों को लागू कैसे किया जायेगा... इसका रास्ता नहीं बताया गया है। ’’ उन्होंने कहा, ‘‘इसमें कई कागजी बातें हैं जिन्हें लागू करना मुश्किल है।’’

गौरतलब है कि केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बुधवार को नई शिक्षा नीति को मंजूरी दी थी। नई शिक्षा नीति में पांचवीं कक्षा तक मातृभाषा या क्षेत्रीय भाषा में पढ़ाई, बोर्ड परीक्षा के भार को कम करने, विदेशी विश्वविद्यालयों को भारत में परिसर खोलने की अनुमति देने, विधि और मेडिकल को छोड़कर उच्च शिक्षा के लिये एकल नियामक बनाने, विश्वविद्यालयों के लिये साझा प्रवेश परीक्षा आयोजित करने सहित स्कूली शिक्षा से लेकर उच्च शिक्षा तक अनेक सुधारों की बात कही गई है।

पूर्व मानव संसाधन विकास मंत्री ने कहा कि नई नीति में शिक्षा पर सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का 6 प्रतिशत खर्च करने का प्रस्ताव किया गया है लेकिन इसके लिये पैसा कहां से आयेगा, यह स्पष्ट नहीं है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस नीत संप्रग सरकार के दौरान शिक्षा पर जीडीपी का 3.2 प्रतिशत से अधिक खर्च होता था जबकि वर्तमान सरकार के दौरान शिक्षा बजट में आवंटन में कमी आई है। ऐसे में शिक्षा में जीडीपी का 6 प्रतिशत खर्च होने के अनुपालन को लेकर उन्हें संदेह है।

सिब्बल ने कहा कि नीति में कम से कम पांचवीं कक्षा तक मातृभाषा या क्षेत्रीय भाषा में पढ़ाई की बात कही गई है जिसे बढ़ाकर आठवीं कक्ष तक किया जा सकता है, लेकिन देश के अलग-अलग स्थानों पर सरकारी कर्मचारियों के बच्चों को कठिनाई आयेगी क्योंकि उनके अभिभावकों का तबादला होता रहता है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस नीत संप्रग सरकार के दौरान देश बोर्ड परीक्षा समाप्त करने की ओर बढ़ा था लेकिन वर्तमान सरकार ने बोर्ड परीक्षा को फिर लागू कर दिया। अब नई नीति में फिर उसी दिशा में बढ़ रहे हैं।

पूर्व केंद्रीय मंत्री ने कहा कि व्यावसायिक शिक्षा, कौशल विकास, पाठ्यक्रम का मानक तैयार करने जैसी कई बातें कही गई हैं लेकिन इनका रास्ता स्पष्ट नहीं है। उन्होंने कहा कि विज्ञान के साथ कला की पढ़ाई करना, उच्च शिक्षा में एकल नियामक का गठन, उच्च शिक्षण संस्थानों को स्वायत्तता देने तथा विदेशी शिक्षण संस्थाओं को भारत में परिसर खोलने की अनुमति देने जैसी कई बातें कांग्रेस नीत संप्रग सरकार के दौरान आगे बढ़ाई गई थी। भाजपा इसका पहले विरोध कर रही थी लेकिन अब उसी राह पर चलना चाहते हैं। इस प्रकार से छह साल बर्बाद कर दिए गए।

सिब्बल ने कहा, ‘‘हम जिस रेलगाड़ी को चलाना चाहते थे, पहले ये (भाजपा) उसका विरोध करते थे और उससे अलग हो गए थे। लेकिन अब उसी रेलगाड़ी को चलाना चाहते हैं।’’ उन्होंने कहा कि कोविड-19 महामारी के कारण उत्पन्न स्थिति को देखते हुए इसमें संदेह है कि कोई भी विदेशी शिक्षण संस्थान भारत में अपना परिसर खोलेगा। उन्होंने कहा कि शिक्षा में निजी क्षेत्र की क्या भूमिका होगी, यह नई शिक्षा नीति में स्पष्ट नहीं है। अनुसंधान कोष को कैसे लागू किया जायेगा, यह भी स्पष्ट नहीं है। कांग्रेस नेता ने आशंका व्यक्त की कि अनुसंधान कोष का पैसा कुछ खास संस्थाओं को चला जायेगा।