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विश्वविद्यालयों की जरुरतों के अनुरूप बने कानून

कांग्रेस समेत कई विपक्षी दलों ने विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता बनाये रखने पर बल देते हुए आज राज्यसभा में कहा कि आधुनिक समय की जरुरतों के अनुरुप केंद्रीय विश्वविद्यालय अधिनियम में आमूल चूल परिवर्तन किया जाना चाहिए। 

कांग्रेस के पी भट्टाचार्य ने केंद्रीय विश्वविद्यालय (संशोधन) विधेयक 2़019 पर चर्चा शुरु करते हुए कहा कि सरकार आंध्रप्रदेश में अपने वायदे को पूरा करते हुए एक केंद्रीय विश्वविद्यालय और एक जनजातीय केंद्रीय विश्वविद्यालय खोल रही है। उनकी पार्टी इसका स्वागत करती है। इससे जनजातीय केंद्रीय विश्वविद्यालय के बनने से आदिवासी समाज को मजबूती मिलेगी और यह समाज देश की मुख्यधारा से जुड़ सकेगा। 

उन्होंने कहा कि केंद्रीय विश्वविद्यालय कानून पूराना हो गया है। यह आधुनिक जरुरतों को पूरा नहीं कर रहा है। सरकार को इस कानूनों में बदलाव करना चाहिये। 

इससे पहले मानव संसाधन विकास मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने आंध्रप्रदेश में एक केंद्रीय विश्वविद्यालय और जनजातीय केंद्रीय विश्वविद्यालय खोलने का प्रावधान करने वाले ‘ केंद्रीय विश्वविद्यालय (संशोधन) विधेयक 2019’ सदन में चर्चा के लिए पेश किया।

चर्चा में हिस्सा लेते हुए भारतीय जनता पार्टी के जीवीएल नरसिंह राव ने कहा कि ये दोनों विश्वविद्यालय खोलने से आंध्रप्रदेश को दो केंद्रीय विश्वविद्यालय में मिल जाएगें। इससे राज्य में मजबूत एवं जागरूक समाज का निर्माण होगा। उन्होंने कहा कि दोनों शिक्षण संस्थानों के खुलने से क्षेत्रीय असमानता दूर करने में मदद मिलेगी। 

अन्नाद्रमुक के ए. विजय कुमार ने कहा कि केंद्रीय विश्वविद्यालय खुलने से क्षेत्र में उच्च शिक्षा को बढ़वा मिलेगा। उन्होंने कहा कि सरकार को शिक्षा की गुणवत्ता पर जोर देना चाहिए। उन्होंने तमिलनाडु में भी जनजातीय केंद्रीय विश्वविद्यालय खोलने की मांग की। 

अधीर रंजन विस्वास ने कहा कि पश्चिम बंगाल में एक केंद्रीय विश्वविद्यालय खोला जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालयों में खाली पदों को भरा जाना चाहिए। समाजवादी पार्टी के जावेद अली खान ने कहा कि प्रत्येक राज्य में कम से कम एक केंद्रीय विश्वविद्यालय खोला जाना चाहिए।

बीजू जनता दल के प्रशांत नंदा ने कोरापुट विश्वविद्यालय के लिए शिक्षकों की कमी को पूरा करने और राज्य में एक जनजातीय विश्वविद्यालय की स्थापना की मांग की। जनता दल यू की कहकशां प्रवीण ने पटना विश्वविद्यालय को केन्द्रीय विश्वविद्यालय का दर्जा देने तथा झारखंड में आदिवासी विश्वविद्यालय बनाने का अनुरोध किया। 

तेलंगाना राष्ट्र समिति के के केशव राव ने तेलंगाना में भी जनजातीय विश्वविद्यालय की स्थापना का मुद्दा उठाया। माकपा के के रागेश ने आन्ध, प्रदेश के जनजातीय विश्वविद्यालय का नाम रोहित वेमुला के नाम पर रखने की मांग की। राष्ट्रीय जनता दल के मनोज झा ने विश्वविद्यालयों में ढांचागत सुविधाओं तथा शिक्षकों की कमी की ओर ध्यान आकृष्ट किया। 

मनोनीत स्वपनदास गुप्ता ने केन्द्रीय और राज्य विश्वविद्यालयों के बीच अंतर को स्पष्ट करने पर बल दिया। उन्होंने कहा कि जनजातीय विश्वविद्यालय का दर्जा राष्ट्रीय होना चाहिए। वाईएसआर कांग्रेस के वी विजय साई रेड्डी ने कहा कि विश्वविद्यालय के लिए जितना कम पैसा स्वीकृत किया जा रहा है उससे लगता है कि इनके मूर्त रूप लेने में 9 वर्ष का समय लगेगा। उन्होंने विश्वविद्यालय की स्थापना की समय सीमा तय करने का अनुरोध किया। 

कांग्रेस के एल हनुमनथप्पा ने देश में हर दिशा में चार जनजातीय विश्वविद्यालय बनाने की मांग की। भाजपा के विनय सहह्मबुद्धे ने कहा कि केन्द्रीय विश्वविद्यालयों को अपनी अलग पहचान बनानी चाहिए। उन्होंने केन्द्रीय और जनजातीय विश्वविद्दालयों के संस्थागत ऑडिट की मांग की।