साल 2019 के लोकसभा चुनाव में BJP को मात देने के लिए विपक्षी दलों ने अभी से कमर कस ली है। राजनीतिक और जनसंख्या के लिहाज से देश के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश में एनडीए को हराने के लिए कांग्रेस, मायावती की बहुजन समाज पार्टी और अखिलेश यादव की समाजवादी पार्टी में सहमति बन गई है। इन तीनों दलों में सीटों को लेकर जो सहमति बनी है उसके मुताबिक राहुल गांधी अमेठी से ही चुनाव लड़ेंगे। हालांकि उत्तर प्रदेश में कौन सी पार्टी कितने सीटों पर चुनाव लड़ेगी अभी यह साफ नहीं हुआ है। यूपी में साल 2017 में हुए विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने समाजवादी पार्टी से गठबंधन कर चुनाव में उतरी थी और उससे सबसे ज्यादा घाटा हुआ था। कांग्रेस राज्य में महज 8 सीटों पर सिमट गई थी जबकि बीजेपी ने 325 सीटों पर जीत दर्ज की थी। सूत्रों के मुताबिक बैठक में इस बात पर भी सहमति बन गई है कि 2019 में चुनाव से पहले महागठबंधन की तरफ से पीएम पद का चेहरा तय नहीं किया जाएगा। पीएम कौन होगा और किस पार्टी का होगा यह चुनाव नतीजों के बाद तय किया जाएगा कांग्रेस के वरिष्ठ सूत्रों के मुताबिक यूपी के 80 लोकसभा सीटों पर तीन पार्टियों के बीच सीट शेयरिंग पर भी बात बन गई है।

इस बैठक में कांग्रेस ने यह भी साफ कर दिया है कि वो सिर्फ मुसलमानों की नहीं कांग्रेसियों की पार्टी है। बैठक में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी की तरफ से इस बात का दावा भी किया गया है कि अगर लोकसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) 230 से 240 सीटें अपने दम पर जीतेगी तभी नरेंद्र मोदी दोबारा पीएम बन पाएंगे। कांग्रेस के सूत्रों के मुताबिक बीजेपी और नरेंद्र मोदी को साल 2019 चुनाव में शिकस्त देने के लिए कांग्रेस दो चरणों में तैयारी कर रही है। पहले चरण में बीजेपी हराओ का लक्ष्य रखा गया जबकि दूसरे चरण में सीटें पर तय किया जाएगा कि पीएम कौन बनेगा। यूपी में सीटों पर समहमति बनने के बाद दावा किया जा रहा है कि अगर सभी विपक्षी राज्य में एकजुट हो जाएं तो बीजेपी 5 सीटों के भीतर सिमट सकती है। सुत्रों के मुताबिक बैठक में राहुल गांधी ने शिवसेना से गठबंधन की सभी संभावनाओं को खारिज कर दिया।

इसके साथ ही उन्होंने यह भी दावा किया कि अगर यूपी, बिहार और महाराष्ट्र में महागठबंदन को ज्यादा सीटें मिलेंगी तो बीजेपी को सत्ता गंवानी पड़ेगी। गौरतलब है कि यूपी में महागठबंधन को लेकर बीएसपी प्रमुख मायावती ने कहा था कि उनकी पार्टी तभी गठबंधन में चुनाव लड़ेगी जब सम्मानजनक सीटें मिलेंगी। पीएम पद के चेहरे पर समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने कहा था कि प्रधानमंत्री कौन होगा यह चुनाव नतीजों पर निर्भर करेगा। वहीं दूसरी तरफ आरजेडी नेता तेजस्वी यादव ने यह कहकर कांग्रेस की मुश्किलें बढ़ा दी थी कि महगठबंदन में कोई भी प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार हो सकता है। इसके लिए तेजस्वी ने शरद पवार समेत कई लोगों के उदाहरण भी दिए थे।