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सीबीआई और ईडी की माल्या, नीरव के प्रत्यर्पण की लड़ाई जारी

केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) हाल के दिनों में कई हाई-प्रोफाइल मामलों को देख रही है। इसके साथ ही दोनों केंद्रीय एजेंसियां अभी भी किंगफिशर एयरलाइंस के संस्थापक विजय माल्या और भगोड़े हीरा व्यापारी नीरव मोदी के प्रत्यर्पण के लिए कानूनी लड़ाई लड़ रही हैं। 

सीबीआई और ईडी ने कई मामलों में प्रगति की है, जिनमें आईसीआईसीआई-विडियोकॉन ऋण मामले में पूर्व बैंक चैयरपर्सन और प्रबंध निदेशक चंदा कोचर और यस बैंक घोटाला मामले में इसके संस्थापक राणा कपूर शामिल हैं। 

इसके साथ ही 3,600 करोड़ रुपये के वीवीआईपी अगस्ता वेस्टलैंड हेलिकॉप्टर मामले में आरोप पत्र (चार्जशीट) दायर किया गया है। वहीं कॉपोर्रेट लॉबीस्ट दीपक तलवार और 2013 के रेलवे रिश्वत घोटाले में कथित तौर पर रेल मंत्री और वरिष्ठ कांग्रेसी नेता पवन बंसल के भांजे विजय सिंगला के खिलाफ भी नई चार्जशीट दायर की गई है। 

सीबीआई और ईडी माल्या के प्रत्यर्पण के लिए ब्रिटेन में कानूनी लड़ाई लड़ रही है और केंद्रीय एजेंसियों को पूरा भरोसा है कि वह भगोड़े कारोबारी का भारत में प्रत्यपर्ण सुनिश्चित करेगी। 

माल्या, जो 9,000 करोड़ रुपये के ऋण मामले में भारत में वांछित (वॉन्टेड) है, वो ब्रिटेन में रह रहा है। उसने ब्रिटेन के हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया, जिसने 20 अप्रैल को प्रत्यर्पण के खिलाफ उसकी अपील खारिज कर दी। 

इस वर्ष की शुरूआत में गृह मंत्रालय (एमएचए) ने एक हलफनामे में भारत के सर्वोच्च न्यायालय को सूचित किया कि माल्या की अपील पर इनकार किए जाने के बाद, भारत में उसका प्रत्यर्पण सैद्धांतिक रूप से 28 दिनों के भीतर पूरा हो जाना चाहिए। हालांकि ब्रिटेन के गृह मामलों के कार्यालय ने कहा कि इसमें एक कानूनी मुद्दा शामिल है, जिसे प्रत्यर्पण होने से पहले हल करने की आवश्यकता है। 

हलफनामे में कहा गया है, ब्रिटेन पक्ष ने कहा कि यह मुद्दा बाहरी है और प्रत्यर्पण प्रक्रिया से अलग है, लेकिन इसका प्रभाव यह है कि यूनाइटेड किंगडम कानून के तहत, प्रत्यर्पण तब तक नहीं हो सकता, जब तक कि इसे हल नहीं किया जाता। 

एमएचए ने कहा कि ब्रिटेन ने यह सूचित किया है कि यह एक अलग तरह का कानूनी मुद्दा है, जो कि न्यायिक और गोपनीय है। 

इसके अलावा केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया है कि भगोड़े शराब कारोबारी विजय माल्या के प्रत्यर्पण का मामला समाप्त हो चुका है, लेकिन ब्रिटेन में इस मामले में कुछ गोपनीय कार्यवाही चल रही है, जिसकी जानकारी भारत को भी नहीं दी गई है। केंद्र ने कहा कि भारत को माल्या के प्रत्यर्पण में देरी की जा रही है। 

31 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट ने 2017 के फैसले की समीक्षा की मांग वाली माल्या की याचिका को खारिज कर दिया था, जिसने उन्हें अदालत की अवमानना के लिए दोषी ठहराया था। शीर्ष अदालत ने पांच अक्टूबर को अदालत के समक्ष माल्या को उपस्थित होने का निर्देश दिया था। 

शीर्ष अदालत ने माल्या को अवमानना का दोषी माना था, क्योंकि शराब कारोबारी ने अपनी संपत्ति का पूरा हिसाब नहीं दिया था। 

न्यायाधीश यू.यू. ललित और अशोक भूषण की पीठ ने पुनर्विचार याचिका को खारिज करते हुए कहा कि मामले में फिर से सुनवाई की अनुमति नहीं दी जा सकती है। 

विजय माल्या बंद हो चुकी किंगफिशर एयरलाइंस के लिए बैंकों से लिए नौ हजार करोड़ रुपये से ज्यादा के कर्ज की अदायगी नहीं करने के मामले में आरोपी है। इस समय वह ब्रिटेन में रह रहा है, जिसके प्रत्यर्पण के लिए सरकार कोशिश कर रही है। 

शराब कारोबारी ब्रिटेन में दो मार्च 2016 को भारत छोड़कर भाग गया था। माल्या ऐसा पहला व्यक्ति है, जिस पर भारत में नए भगोड़े आर्थिक अपराधी अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया है। 

हालांकि, भगोड़े हीरा व्यापारी नीरव मोदी के मामले में एजेंसियों को अधिक उम्मीद है, क्योंकि नवंबर 2020 में ब्रिटेन की अदालत ने भारत सरकार के पक्ष में फैसला सुनाया है। 

भगोड़े हीरा व्यापारी नीरव को एक बड़े झटके का सामना करना पड़ा, क्योंकि ब्रिटिश अदालत ने नीरव के खिलाफ सबूत स्वीकार कर भारतीय पक्ष में फैसला सुनाया है। इसके साथ ही नीरव के भारत प्रत्यर्पण की संभावनाएं बढ़ गई हैं। 

नीरव मोदी अनुमानित 13,500 करोड़ रुपये के पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) धोखाधड़ी घोटाले के मुकदमे का सामना करने के लिए भारत में वांछित है। 49 वर्षीय नीरव ने कोर्ट की कार्यवाही दक्षिण-पश्चिम लंदन के वैंड्सवर्थ जेल से वीडियो लिंक के जरिए देखी, जहां वह मार्च 2019 से बंद है। 

नीरव मोदी को एक दिसंबर तक रिमांड पर भेज दिया गया। दोनों पक्ष 7 और 8 जनवरी को अंतिम बहस करेंगे और 2021 में इसके कुछ हफ्ते बाद फैसला आने की उम्मीद है। 

जांच एजेंसियों के अधिकारियों के मुताबिक, दोनों पक्ष 7 और 8 जनवरी को अपनी क्लोजिंग सबमिशन करेंगे और इसके बाद नीरव मोदी को प्रत्यर्पित करने का फैसला 2021 की शुरूआत में आने की उम्मीद है। 

इसके अलावा सीबीआई और ईडी ने यस बैंक के मामले में भी अपनी पकड़ मजबूत कर ली है।