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'मन की बात' में PM मोदी ने दिया जल संकट पर जोर

लोकसभा चुनाव 2019 में दोबारा जनादेश मिलने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रविवार को पहली बार देशवासियों के साथ रेडियो पर ‘मन की बात’ का रहे है। पीएम मोदी ने 2014 में प्रधानमंत्री बनने के बाद देशवासियों के साथ नियमित संवाद की परंपरा शुरू करते हुए हर महीने के अंतिम रविवार को रेडियो पर ‘मन की बात’ कार्यक्रम शुरू किया था। प्रधानमंत्री नरेंन्द्र मोदी ने केंद्र में नई सरकार बनाने के बाद अपने पहले ‘मन की बात’ कार्यक्रम में कहा कि लोकतंत्र हमारी संस्कृति, संस्कार और विरासत है और हम इसी विरासत को लेकर पले बढ़े लोग हैं। 

जब देश में आपातकाल लगाया गया, तब उसका विरोध सिर्फ राजनीतिक दायरे तक सीमित नहीं था। दिन-रात जब समय पर खाना खाते हैं तब भूख क्या होती है, इसका पता नहीं होता है, वैसे ही सामान्य जीवन में लोकतंत्र के अधिकार का मजा क्या है वो तब पता चलता है जब कोई लोकतांत्रिक अधिकारों को छीन ले। लोकतंत्र के अधिकार का मजा क्या है वो तब पता चलता है जब कोई लोकतांत्रिक अधिकारों को छीन ले।

पीएम मोदी ने ‘मन की बात’ में कहा कि 2019 का लोकसभा का चुनाव अब तक के इतिहास में दुनिया का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक चुनाव था क्योंकि चीन को छोड़ दिया जाए तो भारत में दुनिया के किसी भी देश की आबादी से ज्यादा लगभग 61 करोड़ लोगों ने मतदान किया। 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश में पानी की कमी को देखते हुए आज देशवासियों से जल संरक्षण के लिए जन आंदोलन शुरू करने का आह्वान करते हुए कहा कि इसके लिए पारंपरिक तौर तरीकों पर जोर दिया जाना चाहिए। पीएम मोदी ने‘ मन की बात’ में राष्ट्र को संबोधित करते हुए कहा कि जैसे स्वच्छता अभियान को एक जन आंदोलन का रुप दिया गया है वैसे ही जल संरक्षण के लिए भी जन आंदोलन शुरु किया जाना चाहिए।

 

उन्होंने कहा, ‘‘ हम सब साथ मिलकर पानी की हर बूंद को बचाने का संकल्प करें और मेरा तो विश्वास है कि पानी परमेश्वर का दिया हुआ प्रसाद है, पानी पारस का रूप है। पहले कहते थे कि पारस के स्पर्श से लोहा सोना बन जाता है। मैं कहता हूँ, पानी पारस है और पारस से, पानी के स्पर्श से, नवजीवन निर्मित हो जाता है। पानी की एक-एक बूंद को बचाने के लिए एक जागरूकता अभियान की शुरुआत करें। ’’ 

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पीएम मोदी के दूसरी बार केंद्र में सत्ता संभालने के बाद यह पहला ‘मन की बात’ कार्यक्रम था। प्रधानमंत्री ने कहा कि जन आंदोलन में पानी से जुड़ी समस्याओं के बारे में बताया जाना चाहिए और पानी बचाने के तरीकों का प्रचार-प्रसार किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा, ‘‘ मैं विशेष रूप से अलग-अलग क्षेत्र की हस्तियों से, जल संरक्षण के लिए, नव अभियानों का नेतृत्व करने का आग्रह करता हूँ। 

फिल्म जगत हो, खेल जगत हो, मीडिया के हमारे साथी हों, सामाजिक संगठनों से जुड़े हुए लोग हों, सांस्कृतिक संगठनों से जुड़े हुए लोग हों, कथा-कीर्तन करने वाले लोग हों, हर कोई अपने-अपने तरीके से इस आंदोलन का नेतृत्व करें। समाज को जगायें, समाज को जोड़े, समाज के साथ जुटें। आप देखिये, अपनी आंखों के सामने हम परिवर्तन देख पायेंगें।’’

प्रधानमंत्री ने भारतीय संस्कृति में पानी के महत्व का उल्लेख करते हुए ऋग्वेद के ‘आप: सुक्तम्’ का यह स्त्रोत पढ़: ‘‘ आपो हिष्ठा मयो भुव:, स्था न ऊर्जे दधातन, महे रणाय चक्षसे, यो व: शिवतमो रस:, तस्य भाजयतेह न:, उषतीरिव मातर:।’’ अर्थात, जल ही जीवन दायिनी शक्ति, ऊर्जा का स्त्रोत है। आप माँ के समान यानि मातृवत अपना आशीर्वाद दें। अपनी कृपा हम पर बरसाते रहें।’’

पीएम मोदी ने कहा कि पानी की कमी से देश के कई हिस्से हर साल प्रभावित होते हैं। लेकिन साल भर में वर्षा से जो पानी प्राप्त होता है, उसका केवल आठ प्रतिशत बचाया जाता है। वर्षा जल का संरक्षण करने से पानी की समस्या का समाधान निकाला जा सकता है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि दूसरी और समस्याओं की तरह ही जनभागीदारी से, जनशक्ति से, एक सौ तीस करोड़ देशवासियों के सामर्थ्य, सहयोग और संकल्प से इस संकट का भी समाधान किया जा सकता है। सरकार ने जल की महत्ता को सर्वोपरि रखते हुए देश में नया जल शक्ति मंत्रालय बनाया गया है। 

इससे पानी से संबंधित सभी विषयों पर तेत्री से फैसले लिए जा सकेंगे। उन्होंने कहा, ‘‘ मैंने देश भर के सरपंचों को पत्र लिखा ग्राम प्रधान को। मैंने ग्राम प्रधानों को लिखा कि पानी बचाने के लिए, पानी का संचय करने के लिए, वर्षा के बूंद-बूंद पानी बचाने के लिए, वे ग्राम सभा की बैठक बुलाकर, गाँव वालों के साथ बैठकर के विचार-विमर्श करें। 

उन्होंने इस कार्य में पूरा उत्साह दिखाया है और इस महीने की 22 तारीख को हजारों पंचायतों में करोड़ लोगों ने श्रमदान किया। गाँव-गाँव में लोगों ने जल की एक-एक बूंद का संचय करने का संकल्प लिया।’’ प्रधानमंत्री ने झारखंड के हजारीबाग जिले के कटकमसांडी ब्लॉक की लुपुंग पंचायत के सरपंच का एक सन्देश भी सुनाया। 

पीएम मोदी ने बिरसा मुंडा का उल्लेख करते हुए कहा कि झारखंड में प्रकृति के साथ तालमेल बिठाकर रहना संस्कृति का हिस्सा है। वहाँ के लोग जल संरक्षण के लिए सक्रिय भूमिका निभाने के लिए तैयार हैं। उन्होंने कहा कि पूरे देश में जल संकट से निपटने का कोई एक फॉर्मूला नहीं हो सकता है। 

इसके लिए देश के अलग-अलग हिस्सों में, अलग-अलग तरीके से, प्रयास किये जा रहे हैं। लेकिन सबका लक्ष्य जल संरक्षण है। प्रधान मंत्री ने कहा कि पंजाब में नालों को ठीक किया जा रहा है। इस प्रयास से जल भराव की समस्या से छुटकारा मिल रहा है। तेलंगाना के थिमाईपल्ली में टैंक के निर्माण से गाँवों के लोगों की जिंदगी बदल रही है। 

राजस्थान के कबीरधाम में, खेतों में बनाए गए छोटे तालाबों से एक बड़ बदलाव आया है। मैं तमिलनाडु के वेल्लोर में एक सामूहिक से नागनदी को पुनर्जीवित करने के लिए 20 हजार महिलाएँ एक साथ आई है। इसके अलावा गढ़वाल की महिलायें आपस में मिलकर वर्षा संरक्षण पर बहुत अच्छा काम कर रही हैं।