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विपक्ष के भारी हंगामे के बीच नौचालन के लिए सामुद्रिक सहायता विधेयक राज्यसभा से पारित

राज्यसभा में मंगलवार को विभिन्न मुद्दों को लेकर विपक्ष के भारी हंगामे के बीच नौचालन के लिए सामुद्रिक सहायता विधेयक पारित हो गया। उच्च सदन ने इस विधेयक को ध्वनिमत से मंजूरी प्रदान कर दी। उस समय सदन में पेगासस जासूसी मामला, तीन कृषि कानूनों सहित विभिन्न मुद्दों को लेकर विपक्षी दलों के कई सदस्य सरकार के खिलाफ नारेबाजी कर रहे थे।

विधेयक को पारित किए जाने के दौरान कुछ सदस्यों ने इस पर मत-विभाजन कराने की मांग की। इस पर उपसभापति हरिवंश ने आसन के समीप आकर नारेबाजी कर रहे सदस्यों से पहले अपनी सीट पर जाने को कहा। उन्होंने कहा कि इसके बाद ही मत विभाजन करा पाना संभव हो पाएगा। लोकसभा इस विधेयक को पहले ही पारित कर चुकी है। विधेयक पर हुयी संक्षिप्त चर्चा में विभिन्न दलों ने नौवहन के क्षेत्र के बेहतर प्रबंधन के लिए कानून सहित विभिन्न उपाय किए जाने की आवश्यकता पर बल दिया तथा लाइट हाउस का उपयोग कर पर्यटन को बढ़ावा देने की पहल का स्वागत किया।

पत्तन, पोत परिवहन एवं जलमार्ग मंत्री सर्वानंद सोनोवाल ने मौजूदा सत्र के पहले ही दिन यह विधेयक चर्चा एवं पारित कराने के लिए सदन में पेश किया था। सोनोवाल के अनुसार इस विधेयक में नौवहन क्षेत्र के विकास के लिए कई प्रावधान किए गये हैं। उन्होंने कहा कि पुराने लाइट हाउस कानून में सहायता के समुचित प्रावधान नहीं थे जिन्हें वर्तमान विधेयक में शामिल किया गया है। सोनावाल ने कहा कि यह विधेयक अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी को अपनाने के लिए एक वैध ढांचा प्रदान करेगा और विश्व की सर्वश्रेष्ठ कार्यप्रणाली के लिए आवश्यक जरूरतों की पूर्ति करेगा। इससे नौचालन का क्षेत्र सुरक्षित भी होगा। 

उन्होंने कहा कि यह विधेयक आजादी से पहले के काल के 98 साल पुराने कानूनों को समाप्त करेगा। इससे समुद्री नौचालन क्षेत्र में विकास की संभावनाओं के नए द्वार खुलेंगे और इस क्षेत्र को विश्व स्तरीय प्रौद्योगकी मिल सकेगी। इस विधेयक में समुद्री नौवहन के क्षेत्र में प्रौद्योगिकी बदलाव को ध्यान में रखते हुए पोत यातायात सेवाओं के लिये नया ढांचा तैयार करने एवं उनका प्रबंधन सुगम बनाने का प्रस्ताव किया गया है।

विधेयक के उद्देश्य एवं कारणों में कहा गया है कि समय-समय पर सामुद्रिक क्षेत्र में कई परिवर्तन हुए हैं और नौचालन के लिये सामुद्रिक सहायता के क्षेत्र में प्रौद्योगिकी का काफी विकास हुआ है। इसमें जलयान यातायात सेवा और नौचालन सहायता का विविधीकरण शामिल है जिसके अंतर्गत प्रकाश स्तम्भ और प्रकाश पोतों से भिन्न तकनीकी सहायता शामिल है। इसमें कहा गया है कि नौचालन के लिये सामुद्रिक सहायता की भूमिका ‘रेडियो और डिजिटल’ आधारित हो गई है।

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