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MDMK और DMK ने राज्यसभा में उठाई सुप्रीम कोर्ट की क्षेत्रीय पीठ की मांग

दक्षिण भारतीय राज्यों के लोगों को हाई कोर्ट के फैसलों को आवश्यकता पड़ने पर सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने के समय होने वाली कठिनाइयों की ओर ध्यान दिलाते हुए राज्यसभा में बुधवार को कई सदस्यों ने चेन्नई में सुप्रीम कोर्ट की पीठ स्थापित किए जाने की मांग की। शून्यकाल में एमडीएमके सदस्य वाइको ने चेन्नई में सुप्रीम कोर्ट की पीठ स्थापित किए जाने की मांग करते हुए कहा कि ऐसा होने पर खुद सुप्रीम कोर्ट का ही बोझ कम होगा। वर्तमान में सुप्रीम कोर्ट में 54,013 मामले लंबित हैं। 

वाइको ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में है और दक्षिण भारतीय राज्यों के लोगों को हाई कोर्ट के फैसलों को आवश्यकता के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने के लिए दिल्ली आना पड़ता है। यहां आने, ठहरने पर होने वाला खर्च और भाषा की दिक्कत तथा अन्य समस्याएं होती हैं। 

उन्होंने कहा कि इन समस्याओं से राहत मिल सकती है अगर चेन्नई में सुप्रीम कोर्ट की एक पीठ स्थापित कर दी जाए। द्रमुक के पी विल्सन ने कहा कि पूर्व में स्थायी संसदीय समितियां सुप्रीम कोर्ट के क्षेत्रीय पीठ स्थापित किए जाने की सिफारिश कर चुकी हैं। उन्होंने कहा कि दिल्ली आने, ठहरने पर होने वाला खर्च और भाषा की दिक्कत तथा अन्य समस्याओं के कारण वही लोग सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटा सकते हैं जो इनका सामना कर सकते हैं। 

विभिन्न दलों के सदस्यों ने इस मुद्दे से स्वयं को संबद्ध किया। इनमें से ज्यादातर सदस्य दक्षिण भारतीय राज्यों के थे। शून्यकाल में भाजपा के डी पी वत्स ने मांग की सांसद क्षेत्रीय विकास निधि (एमपीलैड) के तहत पांच करोड़ रुपये की किस्त सालाना जारी की जानी चाहिए और इसके लिए कोष की उपयोगिता संबंधी प्रमाणपत्र की अनिवार्यता नहीं होनी चाहिए। 

वत्स ने कहा कि कोष जारी करने में दो से तीन साल का समय लग जाता है क्योंकि पहले अनुमान तैयार किया जाता है, फिर उसे मंजूरी दी जाती है और उसके बाद काम पूरा होता है। इसके पश्चात राशि जारी की जाती है। इस पर सभापति एम वेंकैया नायडू ने जानना चाहा कि अगर धन राशि जारी कर दी जाए और उसका उपयोग न हो पाए, वह राशि बैंक में पड़ी रहे तो इसके लिए जिम्मेदार कौन होगा।