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देश

नकवी बोले- विकास की संभावनाएं तलाशने इस सप्ताह कश्मीर जाएगी अल्पसंख्यक मंत्रालय की टीम

अल्पसंख्यक कार्य मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने कहा है कि जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 के अधिकतर प्रावधान हटाए जाने के बाद उनके मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों की एक टीम इस सप्ताह कश्मीर घाटी का दो दिवसीय दौरा उन इलाकों की पहचान करेगी जहां अल्पसंख्यकों से जुड़ी केंद्रीय योजनाओं का क्रियान्वयन किया जाना है। उन्होंने यह भी कहा कि विपक्ष के जो लोग ''राजनीतिक पूर्वाग्रह'' के चलते 370 से जुड़े कदम का विरोध कर रहे हैं वो भी भविष्य में इसका समर्थन करेंगे। 

नकवी ने कहा, "हम जम्मू-कश्मीर और लद्दाख पर विशेष ध्यान दे रहे हैं। मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों की एक टीम 27-28 अगस्त को कश्मीर जा रही है। वह राज्य में सामाजिक-आर्थिक और शैक्षणिक विकास की संभावनाओं को देखेगी।" उन्होंने यह भी बताया कि यह टीम बाद में जम्मू और लद्दाख का भी दौरा करेगी। इस टीम में मंत्रालय के सचिव, संयुक्त सचिव और दूसरे वरिष्ठ अधिकारी शामिल होंगे। 

मंत्री ने कहा कि अनुच्छेद 370 हटने का राज्य के मुस्लिम समुदाय सहित सभी लोग स्वागत कर रहे हैं और राज्य में सुरक्षा से जुड़े कदम उठाने का मकसद यह है कि अलगावादी, लोगों को गुमराह नहीं कर सकें। उन्होंने यह भी कहा कि समूचे जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में "प्रधानमंत्री जनविकास कार्यक्रम" के तहत विकास कार्य शुरू किए जाएंगे। 

नकवी ने कहा, "जो लोग भी कश्मीर और उसकी वास्तविकता जानते हैं और राजनीतिक पूर्वाग्रह से ऊपर उठकर सोचते हैं वो 370 को हटाने के कदम का समर्थन कर रहे हैं। जिनका राजनीतिक पूर्वाग्रह है वो इसका विरोध कर रहे हैं, लेकिन भविष्य में वे भी इसका समर्थन करेंगे।" 

उन्होंने विपक्षी दलों पर निशाना साधते हुए कहा, ''विपक्ष के हमारे कुछ मित्रों को लगा था कि अनुच्छेद 370 हटाते ही देश में आग लग जाएगी, लेकिन इसका उल्टा हुआ और इस कदम का हर जगह स्वागत हुआ। इसका जम्मू, कश्मीर और लद्दाख में भी स्वागत किया गया।'' 

अल्पसंख्यक कार्य मंत्री ने कहा, "एक चीज स्पष्ट है कि 370 हटा दिया गया है। अब 370 वापस नहीं आने जा रहा है क्योंकि यह मोदी सरकार है। हर कोई जानता है कि यह सरकार पूरा सोचकर निर्णय करती है और इसमें फैसला होने के बाद पुनर्विचार (रीथिंक) नहीं होता है।" 

उन्होंने कहा कि अनुच्छेद 370 के कारण शिक्षा, रोजगार, मानवाधिकार, अल्पसंख्यक और बाल अधिकार तथा अन्य विषयों से जुड़े 100 से अधिक कानून वहां लागू नहीं थे। इसलिए वहां के लोगों को भी यह अहसास हुआ कि 370 उनके विकास के रास्ते का बड़ा रोड़ा है। उन्होंने कहा कि राज्य के लोगों के अधिकारों और संस्कृति की सुरक्षा की जाएगी। नकवी ने कहा कि इस बार जम्मू-कश्मीर से करीब 12 हजार लोगों ने हज किया जो आजादी के बाद पहली बार हुआ है। 

गौरतलब है कि मंत्रालय की यह पहल इस मायने में महत्वपूर्ण है कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख अल्पसंख्यक बहुल हैं। कश्मीर मुस्लिम बहुल है तो लद्दाख में भी मुस्लिम और बौद्ध आबादी बहुसंख्यक है। जम्मू क्षेत्र में मुस्लिम समुदाय की अच्छी-खासी आबादी है और वहां सिख समुदाय के लोग भी रहते हैं।