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मोदी सरकार गरीब, किसान समर्थक के साथ उद्योग हितैषी भी : मनसुख मंडाविया

रसायन एवं उर्वरक मंत्री मनसुख मंडाविया ने बृहस्पतिवार को कहा केंद्र घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देने और निवेश आकर्षित करने के लिए रसायन और पेट्रोकेमिकल क्षेत्र में सुधार लाने का इरादा रखता है। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार गरीब और किसान समर्थक होने के साथ उद्योग हितैषी भी है। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री की भी जिम्मेदारी संभाल रहे मंडाविया ने उद्योग को प्रदूषण और खतरनाक रसायनों को कम करके पर्यावरण के अनुकूल बनने के लिए कहा। मंत्री रसायन और पेट्रोकेमिकल विभाग और उद्योग मंडल फिक्की द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। 

मोदी सरकार गरीब, किसान हितैषी के साथ उद्योग हितैषी भी है - मंडाविया

मंडाविया ने कहा, ‘‘मोदी सरकार गरीब, किसान हितैषी के साथ उद्योग हितैषी भी है। हम जानते हैं कि अगर देश को आगे बढ़ना है तो औद्योगिक विकास की जरूरत है। औद्योगिक विकास के बिना देश वास्तव में प्रगति नहीं कर सकता।’’ उन्होंने कहा कि मोदी-सरकार की नीति, देश के विकास में भागीदार, संपत्ति-सृजनकर्ताओं का सम्मान करने और उन्हें प्रोत्साहित करने की रही है। उन्होंने कहा कि रासायनिक और पेट्रोकेमिकल उत्पाद हमारे जीवन का हिस्सा बन गए हैं। मंत्री ने कहा, ‘‘इस क्षेत्र में मौजूदा समय में बहुत अवसर है। उद्योग को इसे भुनाने की जरूरत है।’’ उन्होंने कहा कि इस तरह के सम्मेलन इस क्षेत्र के विकास के बारे में चर्चा के लिए मंच प्रदान करते हैं। 

हमें नीति लानी है और सुधार करना है - मनसुख मंडाविया 

उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र के विकास के लिए कौन से नीतिगत सुधारों की आवश्यकता है, यह जानने के लिए उद्योग के प्रमुख भागीदारों को चर्चा करनी चाहिए और शोध करना चाहिए। रिपोर्ट के निष्कर्ष मंत्रालय को प्रस्तुत किए जाने चाहिए। मंडाविया ने कहा, ‘‘अगर हमें नीति लानी है और सुधार करना है, तो उद्योगों को भी अपनी भूमिका निभाने की जरूरत है। हम सरकारी कार्यालयों में बैठकर नीति बनाने वाले नहीं हैं।’’ 

‘मेक इन इंडिया’ को बढ़ावा देना है संकल्प  - रसायन एवं उर्वरक मंत्री

उन्होंने कहा, ‘‘हम केवल ऐसी नीतियां लाएंगे जो उद्योग के लिए आवश्यक हैं। नीतियां जो रसायनों और पेट्रोकेमिकल उद्योगों का समर्थन कर सकती हैं। हम सुधार लाना चाहते हैं जो घरेलू उद्योग का समर्थन कर सके, निवेशकों को आकर्षित कर सके और ‘मेक इन इंडिया’ को बढ़ावा दे सके।’’ मंत्री ने कहा कि उद्योग को न केवल घरेलू बाजार के लिए बल्कि विश्व बाजार के लिए भी निर्माण करना चाहिए। उन्होंने कहा, ‘‘दुनिया भारत और भारतीय कंपनियों के साथ साझेदारी करना चाहती है। वे भारत में निवेश करना चाहती हैं।’’ 

मंडाविया ने खतरनाक रसायनों को कम करके इस क्षेत्र को ‘पर्यावरण अनुकूल’ बनाने पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र में शून्य प्रदूषण प्रौद्योगिकियों को विकसित करने की आवश्यकता है। उद्योग के अनुमान के अनुसार, भारत में रसायन और पेट्रोकेमिकल क्षेत्र का बाजार आकार लगभग 165 अरब डॉलर का है और इसके वर्ष 2025 तक 300 अरब डॉलर तक हो जाने की संभावना है।