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मोदी सरकार ने देश को आर्थिक आपातकाल की तरफ धकेला, अर्थव्यवस्था पर लाए श्वेतपत्र : कांग्रेस

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) द्वारा केंद्र सरकार को लाभांश और अधिशेष कोष के मद से 1.76 लाख करोड़ रुपये हस्तांतरित करने के निर्णय को लेकर कांग्रेस ने मंगलवार को नरेंद्र मोदी सरकार पर देश को 'आर्थिक आपातकाल और दिवालियेपन' की तरफ धकेलने का आरोप लगाया और कहा कि सरकार एक सप्ताह के भीतर अर्थव्यवस्था की स्थिति पर श्वेतपत्र लाए। 

पार्टी के वरिष्ठ नेता आनंद शर्मा ने कहा कि आरबीआई से जुड़ा निर्णय इस बात का प्रमाण है कि भारत की अर्थव्यवस्था गहरे संकट में है, लेकिन सरकार लोगों का ध्यान भटकाने की कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा, ''भारत एक गहरे आर्थिक संकट में है। देश की अर्थव्यवस्था चरमरा गई है। जीडीपी निरन्तर गिर रही है। अर्थव्यवस्था के सभी सूचकांक नीचे हैं। रुपये का लगातार अवमूल्यन हो रहा है।'' 

शर्मा ने कहा, ''वास्तव में भारत बेरोजगारी 20 फीसदी से ऊपर है। हर जानकार अर्थशास्त्री इससे सहमत होगा। लोगों को कर्ज भी नहीं मिल रहा है। देश का निर्यात जहां पांच साल पहले था वहीं अटका हुआ है। इसमें बढ़ोतरी नहीं हुई है।'' उन्होंने आरोप लगाया, ''आरबीआई से पैसा लेने का निर्णय खतरनाक है। दुनिया में कहीं भी केंद्रीय बैंक अपने फंड का पैसा सरकार को नहीं देता। इससे भारत की अर्थव्यवस्था के गहरे संकट में होने की पुष्टि है।'' 

शर्मा ने कहा, ''आरबीआई के सभी पुराने गवर्नर ने इसका विरोध किया था। रघुराम राजन ने इसका विरोध किया और उर्जित पटेल ने इस्तीफा दे दिया। ये हालात इस सरकार की नीतियों और बदइंतजामी से पैदा हुए हैं। सरकार कुछ नहीं कर रही है।'' 

उन्होंने दावा किया, ''सरकार घाटे में है, बजट गलत बना दिया। सब्सिडी बन्द कर दी। इन्हें कुछ समझ नहीं आ रहा। देश को आर्थिक आपातकाल और दिवालियेपन की तरफ धकेल दिया।'' शर्मा ने कहा कि प्रधानमंत्री और वित्त मंत्री अब इस स्थिति को नकार नहीं सकते। सरकार एक सप्ताह के भीतर अर्थव्यवस्था की स्थिति पर श्वेतपत्र लाए। 

इससे पहले पार्टी के मुख्य प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने सवाल किया कि क्या आरबीआई से मिले इस पैसे का इस्तेमाल भाजपा के पूंजीपति मित्रों (क्रोनी फ्रेंड्स) को बचाने के लिए होगा। सुरजेवाला ने यह भी पूछा कि क्या यह महज इत्तेफाक है कि आरबीआई से लिया जा रहा 1.76 लाख करोड़ रुपये की राशि बजट आकलन में 'गायब' राशि के बराबर है। उन्होंने ट्वीट कर कहा, ''क्या यह वित्तीय समझदारी है या फिर वित्तीय आत्महत्या है?"

 

गौरतलब है कि भारतीय रिजर्व बैंक ने केंद्र सरकार को लाभांश और अधिशेष कोष के मद से 1.76 लाख करोड़ रुपये हस्तांतरित करने का सोमवार को निर्णय किया। रिजर्व बैंक के निदेशक मंडल के बिमल जालान की अध्यक्षता वाली समिति की सिफारिशों को स्वीकार करने के बाद यह कदम उठाया गया है।