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लोकसभा में निर्मला सीतारमण ने दिवाला और शोधन अक्षमता संहिता दूसरा संशोधन विधेयक 2019 पेश किया

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने गुरूवार को लोकसभा में दिवाला और शोधन अक्षमता संहिता दूसरा संशोधन विधेयक 2019 पेश किया। दिवाला और शोधन अक्षमता संहिता, 2016 का और संशोधन करने के लिए लाये गये इस विधेयक को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बुधवार को ही मंजूरी दी है। इससे पहले संहिता में तीन संशोधन हो चुके हैं। कांग्रेस और कुछ अन्य विपक्षी दलों ने आज विधेयक पेश किये जाने का विरोध किया। 

सदन में कांग्रेस के नेता अधीर रंजन चौधरी ने कहा कि विधेयक की प्रति सदस्यों को आज सुबह ही सर्कुलेट की गयी है और इसका अध्ययन करने के लिए नियमानुसार दो दिन का समय नहीं दिया गया। उन्होंने कहा कि कुछ समय पहले भी सरकार इसमें संशोधन लेकर आई थी और अब दोबारा संशोधन विधेयक लाई है। चौधरी ने कहा कि लोकसभा अध्यक्ष को मंत्री को विधेयक पेश करने की अनुमति देने का अधिकार है लेकिन सरकार सदन को अपने हिसाब से चला रही है। 

उन्होंने विधेयक को स्थाई समिति को भेजने की मांग की। द्रमुक के टी आर बालू, तृणमूल कांग्रेस के सौगत राय और आरएसपी के एन के प्रेमचंद्रन ने भी विधेयक की प्रति दो दिन पहले सदस्यों को नहीं सर्कुलेट किये जाने के मुद्दे पर विरोध दर्ज कराया। राय ने भी विधेयक को स्थाई समिति को भेजने की मांग की। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि स्पीकर की सहमति और अनुमति से यह विधेयक लेकर आए हैं। जुलाई में सरकार दिवाला और शोधन अक्षमता संहिता में एक संशोधन लाई थी क्योंकि कुछ भ्रम की स्थिति को लेकर उद्योग जगत को संरक्षण की जरूरत थी। 

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उन्होंने कहा कि अब घर खरीददारों के बीच कुछ संशय हैं। जिन्हें दूर करने के लिहाज से स्पष्टता लाने के लिए सरकार यह संशोधन विधेयक लेकर आई है। सीतारमण ने कहा कि उन्होंने विधेयक को केवल पेश करने की अनुमति मांगी है और बाद में जब इस पर चर्चा होगी तो सदस्य विस्तार से अपनी बात रख सकते हैं। उन्होंने विपक्षी सदस्यों पर अवरोध पैदा करके सरकार को विधायी कामकाज नहीं करने देने का भी आरोप लगाया। 

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा कि मौजूदा सत्र 13 दिसंबर तक ही है। इसलिए दो दिन पहले प्रति सर्कुलेट करने की अनिवार्यता को पूरा नहीं किया जा सकता था। इसलिए उन्होंने मंत्री को विधेयक पेश करने की अनुमति प्रदान की है। इस बीच कांग्रेस के गौरव गोगोई की एक टिप्पणी पर जवाब देते हुए संसदीय कार्य राज्यमंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने कहा कि कांग्रेस सदस्य ने अभी कहा कि सरकार ने निजी डाटा संरक्षण विधेयक स्थाई समिति को नहीं भेजा क्योंकि उसके अध्यक्ष कांग्रेस के हैं और इसलिए संयुक्त प्रवर समिति में विधेयक भेजा गया है। मेघवाल ने कहा कि यह अनुचित बात है और कांग्रेस के सदस्य इस मुद्दे पर राजनीति कर रहे हैं।