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Goa Maritime Conclave: अजीत डोभाल बोले- हिंद महासागर में आपसी सहयोग किसी देश के खिलाफ नहीं

राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) अजीत डोभाल ने कहा है कि हिंद महासागर क्षेत्र में आपसी सहयोग समय की जरूरत है। उन्होंने कहा कि इस सहयोग के मायने किसी भी देश के खिलाफ नहीं है। डोभाल ने कहा, "हम मानते हैं कि कुछ भी जो एक देश के लिए अच्छा है, बाकी की भलाई में भी योगदान करने वाला होता है। लेकिन सबसे महत्वपूर्ण एक और पहलू है, जिसे मैं बताना चाहूंगा कि हम किसी भी गठबंधन का हिस्सा नहीं हैं।" 

डोभाल गोवा मैरिटाइम कॉन्क्लेव में बोल रहे थे। इस कार्यक्रम में नौसेना अधिकारियों के साथ ही हिंद महासागर से जुड़े विभिन्न देशों के पदाधिकारियों ने हिस्सा लिया। ये देश हैं-श्रीलंका, मालदीव, बांग्लादेश, म्यामां, थाइलैंड, इंडोनेशिया, मॉरिशस, सेशल्स, सिंगापुर और मलेशिया। इस दौरान डोभाल ने कहा, "हमारा सहयोग किसी भी देश के खिलाफ नहीं है।" डोभाल ने यह भी कहा कि भारत की भौगोलिक मजबूती, इसके आकार और ट्रैक रिकॉर्ड के बावजूद देश अभी भी कई क्षेत्रों में कमजोर है। 

डोभाल ने कहा, "लेकिन हम उस दिशा में विकास करना चाहते हैं, जहां हम न केवल अपने राष्ट्रीय लाभों को बढ़ाएंगे, बल्कि अपने पड़ोसी देशों के लिए भी अधिक उपयोगी बनेंगे।" भारत की विशेषज्ञता पर डोभाल ने कहा कि आपदा प्रबंधन के साथ-साथ एक लंबी दूरी की पहचान और ट्रैकिंग प्रणाली के क्षेत्र में अन्य देशों के साथ साझा प्रयास किया जा सकता है।

डोभाल ने कहा कि आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में भारत ने कुछ विशेषज्ञता हासिल करने के साथ ही संस्थान तंत्र विकसित किया है। उन्होंने कहा, "हमने समुद्र में संभावित आपदाओं को उच्च प्राथमिकता दी है। भारत के सभी आपदा प्रबंधन संसाधन हमारे सभी पड़ोसियों के साथ दक्षिण एशियाई और प्रशांत क्षेत्र के सभी देशों के लिए उपलब्ध होंगे।" 

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डोभाल ने अपने संबोधन में कहा, "आने वाले वक्त में समुद्र, अंतरिक्ष और साइबर ऐसे तीन क्षेत्र होंगे, जो सबसे बड़े अवसर देंगे लेकिन ये ही वह तीन क्षेत्र होंगे, जहां से सबसे गंभीर खतरे भी पैदा होंगे।" उन्होंने कहा कि देशों के समक्ष चुनौती यह है कि खतरों को किस तरह से कम से कम किया जा सके और अधिक से अधिक अवसरों का लाभ उठाया जा सके। 

डोभाल ने कहा, "यही भावना हमें साथ लाती है। यह भावना है कि हम किस तरह अपनी शक्तियों को पहचानें और उन्हें साथ लाएं।" सम्मेलन में शिरकत करने वाले राष्ट्रों के संदर्भ में उन्होंने कहा, "हम महत्वाकांक्षी देश हैं, जो क्षेत्र में शांति देखना चाहते हैं और देशों को तरक्की और विकास करते देखना चाहते हैं।"