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UNHRC में कश्मीर मुद्दे के राजनीतिकरण की PAK की कोशिश नाकाम रही : भारत

भारत ने बृहस्पतिवार को कहा कि संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (यूएनएचआरसी) में झूठ एवं धोखे के जरिए कश्मीर मुद्दे के “राजनीतिकरण” एवं “ध्रुवीकरण” का पाकिस्तान का प्रयास पूरी तरह विफल हो गया और वैश्विक समुदाय उसके चरित्र से भली- भांति परिचित है। 

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने कहा कि यह पाकिस्तान, ऐसा देश जो “आतंकवाद का केंद्र’’ है, का “दुस्साहस’’ है कि वह जिनेवा में यूएनएचआरसी सत्र में मानवाधिकारों पर वैश्विक समुदाय की तरफ से बोलने का ढोंग कर रहा है। 

कुमार ने पाकिस्तान के उस दावे पर भी सवाल उठाए कि करीब 60 देशों ने जम्मू-कश्मीर में मानवाधिकारों की स्थिति पर उसके संयुक्त बयान का समर्थन किया है। पाकिस्तान के मुताबिक उसने यह संयुक्त बयान यूएनएचआरसी को सौंपा है। 

उन्होंने कहा, “यूएनएचआरसी में 47 सदस्य देश हैं। वे (पाकिस्तान) 60 देशों के समर्थन का दावा कर रहे हैं।” 

साथ ही उन्होंने कहा कि भारत के पास उन देशों की सूची नहीं है जिनका समर्थन प्राप्त होने का पाकिस्तान दावा कर रहा है। 

जम्मू-कश्मीर पर भारत के खिलाफ चलाए जा रहे पाकिस्तान के अभियान पर कुमार ने कहा कि पाकिस्तान को यह समझ लेना चाहिए कि ‘‘चार या पांच बार झूठ दोहराने से कोई बात सच नहीं होती। ’’ 

पिछले महीने, भारत ने जम्मू-कश्मीर का विशेष दर्जा वापस लेने के लिए संविधान के अनुच्छेद 370 के अधिकतर प्रावधानों को रद्द करने के साथ ही राज्य को दो केंद्रशासित प्रदेशों में विभाजित कर दिया था। 

पाकिस्तान ने इस कदम पर आक्रोश जाहिर किया था और वह इस मुद्दे पर भारत के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय राय बनाने की असफल कोशिश करता रहा है। 

विदेश मंत्री ने संवाददाता सम्मेलन में कहा कि वैश्विक समुदाय आतंकवादी ढांचों को मदद पहुंचाने, उन्हें बढ़ावा और समर्थन देने में पाकिस्तान की भूमिका से परिचित है। 

कुमार ने कहा, “स्थिति के राजनीतिकरण एवं ध्रुवीकरण करने (यूएनएचआरसी में) के पाकिस्तान के प्रयास नाकाम रहे, यह बहुत स्पष्ट था। वैश्विक समुदाय आतंकवादी ढांचे को समर्थन देने, उसका पोषण करने एवं बढ़ावा देने में पाकिस्तान की भूमिका से अवगत है।” 

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब दो दिन पहले ही यूएनएचआरसी में कश्मीर के मुद्दे पर भारत और पाकिस्तान के बीच वाक् युद्ध देखने को मिला था । भारत ने जम्मू कश्मीर का विशेष दर्जा समाप्त करने के फैसले को अपना संप्रभु अधिकार बताया था जबकि पाकिस्तान ने मानवाधिकारों के विषय की जांच कराने की मांग की थी । 

कुमार ने कहा, ‘‘ पाकिस्तान, जो आतंकवादियों को पनाह देता है और आतंकवाद का केंद्र है, वैश्विक समुदाय की ओर से मानवाधिकारों पर बोलने का ढोंग कर रहा है। ’’ उन्होंने कहा, “ धार्मिक एवं नस्ली दोनों ही अल्पसंख्यकों के दमन के उनके (पाकिस्तान) रिकॉर्ड के बारे में, मुझे कुछ बताने की जरूरत नहीं है। संदेशवाहक (पाकिस्तान) की विश्वसनीयता काफी संदिग्ध है। यह वैश्विक समुदाय को पता है।” 

कुमार ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय जम्मू-कश्मीर पर लिए गए भारत के फैसलों के पीछे के कारणों और क्षेत्र में स्थिति सामान्य करने के लिए उठाए गए कदमों से परिचित है। 

उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर में स्थिति को सामान्य बनाने के लिए हरसंभव प्रयास किए जा रहे हैं। 

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय मीडिया के कुछ धड़े कश्मीर घाटी में स्थिति पर गलत रिपोर्टिंग कर रहे हैं। 

इस बात पर ध्यान दिलाते हुए कि सरकार आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा दे रही है, उन्होंने कहा कि सरकार किसानों की आजीविका को समर्थन देने के लिए 80 करोड़ डॉलर की राशि के साथ 12 लाख मीट्रिक टन सेब खरीदेगी। 

उन्होंने कहा, “अस्पताल एवं चिकित्सीय सुविधाएं सामान्य तरीके से काम कर रही हैं। दवाओं का कोई अभाव नहीं है। श्रीनगर में, 1,666 केमिस्ट दुकानों में से 1,165 खुली हुई हैं।” 

उन्होंने कहा कि बैंकिंग और एटीएम सुविधाएं भी सामान्य रूप से काम कर रही हैं और नकदी नियमित रूप से डाली जा रही है, ताकि लोगों को कोई परेशानी न हो। 

कुमार ने कहा, “जम्मू-कश्मीर के 92 प्रतिशत हिस्से में कोई पाबंदी नहीं है। इससे पहले स्थानीय प्रशासन ने कानून-व्यवस्था बरकरार रखने के लिए कुछ हिस्सों में पाबंदियां लगाई थीं। किसी-किसी दिन समय की पाबंदियां कुल 199 थानों में से केवल 11 पर लागू रही हैं।” 

उन्होंने कहा कि सरकारी कार्यालय 16 अगस्त से पूरी तरह से काम कर रहे हैं। कुमार ने कहा कि 20,339 स्कूल खुले हुए हैं और कक्षाएं ली जा रही हैं। 

कुमार ने कहा कि लैंडलाइन टेलीफोन संपर्क बहाल कर दिया गया है और सभी टेलीफोन एक्सचेंज काम कर रहे हैं।