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भारत में कोरोना के आँकड़े #GharBaithoNaIndiaSource : Ministry of Health and Family Welfare

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कोरोना महामारी के संकट में प्रधानमंत्री मोदी की यूरोपीय संघ से अपील, वैक्सीन के पेटेंट पर दें छूट

भारत और यूरोपीय संघ ने शनिवार को आठ वर्ष के अंतराल के बाद मुक्त कारोबार समझौता (एफटीए) पर बातचीत शुरू करने की घोषणा की। साथ ही निवेश सुरक्षा तथा भौगोलिक संकेत के विषय पर दो महत्वपूर्ण समझौते पर वार्ता शुरू करने पर भी सहमति जतायी।

इस संबंध में निर्णय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और 27 सदस्यीय यूरोपीय संघ समूह के शासनाध्यक्षों या राष्ट्राध्यक्षों के बीच डिजिटल माध्यम से हुई शिखर बैठक में लिया गया । इस बैठक में कारोबार, सम्पर्क और निवेश के क्षेत्र सहित सम्पूर्ण सहयोग बढ़ाने को लेकर विस्तृत चर्चा हुई ।

अधिकारियों ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संबोधन में यूरोपीय संघ को भारत एवं दक्षिण अफ्रीका के उस प्रस्ताव का समर्थन करने का आग्रह किया जिसमें कोविड-19 रोधी टीके पर पेटेंट में छूट देने की बात कही गई है ताकि टीके तक पूरी दुनिया की समान रूप से पहुंच सुनिश्चित हो सके। हालांकि, इस विषय पर यूरोपीय संघ की ओर से कोई ठोस निर्णय नहीं हो सका ।

भारत-यूरोपीय संघ शिखर सम्मेलन पर विदेश मंत्रालय में सचिव (पश्चिम) विकास स्वरूप ने संवाददाताओं से कहा,‘‘ यह एक महत्वपूर्ण क्षण है, बैठक ने संबंधों को नयी गति दी है।’’कोरोना वायरस रोधी टीके पर पेटेंट में छूट पर स्वरूप ने कहा कि इस पर यूरोपीय संघ का विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) में समर्थन टीके के उत्पादन को गति देगा ।

उन्होंने कहा, ‘‘ प्रधानमंत्री ने यूरोपीय संघ से दक्षिण अफ्रीका के साथ हमारे टीका से संबंधित उतपादन पर पेटेंट में ट्रिप्स छूट से जुड़े प्रस्ताव का समर्थन करने का आग्रह किया । अमेरिका ने कुछ दिन पहले इस प्रस्ताव का समर्थन किया था । ’’उन्होंने बताया कि भारत और यूरोपीय संघ (ईयू) संतुलित, महत्वाकांक्षी और समग्र व्यापार एवं निवेश समझौता के लिए वार्ता बहाल करने पर सहमत हुए ।

मंत्रालय ने कहा कि भारत और यूरोपीय संघ ‘स्टैंड-अलोन’ निवेश संरक्षण समझौता पर बातचीत शुरू करने के लिए सहमत हुए ।उन्होंने कहा कि दोनों के बारे में बातचीत समानांतर रूप से इस इरादे के साथ होगी कि इस बारे में जल्द निष्कर्ष तक पहुंचा जा सके ।उल्लेखनीय है कि मुक्त कारोबार समझौता पर बातचीत की शुरूआत 2007 में हुई थी और शुल्क, बाजार पहुंच जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर विचारों में भिन्नता के कारण साल 2013 में यह स्थगित हो गया था ।

विदेश मंत्रालय द्वारा भारत-यूरोपीय संघ के नेताओं की बैठक के संबंध में जारी संयुक्त बयान में कहा गया है, ‘‘ आज की बैठक में साझे हितों, लोकतंत्र, स्वतंत्रता, कानून के शासन एवं मानवाधिकारों का सम्मान जैसे मूल्यों एवं सिद्धांतों को रेखांकित किया गया जो हमारी सामरिक साझेदारी का मूल है।’’

बयान में कहा गया है कि दोनों पक्षों ने भौगोलिक संकेतों को लेकर पृथक समझौता वार्ता शुरू करने पर भी सहमति व्यक्त की और बातचीत की रफ्तार के आधार पर इसे अलग से अंतिम रूप दिया जायेगा ।स्वरूप ने कहा कि सम्पर्क साझेदारी दोनों पक्षों के सहयोग के केंद्र में है और यह अफ्रीका, मध्य एशिया, हिन्द प्रशांत क्षेत्र सहित किसी तीसरे देश में टिकाऊ संयुक्त परियोजना को आगे बढ़ाने पर इनकी आकांक्षा से स्पष्ट होता है ।

बैठक में प्रधानमंत्री मोदी और यूरोपीय संघ के नेताओं ने कोविड-19 महामारी एवं स्वास्थ्य क्षेत्र में सहयोग को लेकर विचारों का आदान-प्रदान किया।विदेश मंत्रालय ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यूरोपीय संघ को कोविड-19 रोधी टीकों पर पेटेंट छोड़ने के लिए भारत और दक्षिण अफ्रीका के प्रस्ताव का समर्थन करने के लिए आमंत्रित किया।

संयुक्त बयान में कहा गया है कि दोनों पक्षों ने कोविड-19 रोधी टीके, उपचार तक सुरक्षित एवं समान पहुंच सुनिश्वित करने का सतर्थन किया। संयुक्त बयान में कारोबार पर कहा गया है कि कारोबार एवं निवेश पर उच्च स्तरीय वार्ता को बाजार पहुंच के मुद्दे पर प्रगति सुनिश्चित करने और वार्ता पर नजर रखने का दायित्व सौंपा गया है । इसे नियामक आयामों एवं अन्य मुद्दों पर सहयोग की प्रगति पर ध्यान देने को कहा गया है ।

स्वरूप ने कहा,‘‘ हम उन क्षेत्रों में त्वरित संवाद की जरूरत एवं क्षमता की पुष्टि करते हैं जहां दोनों पक्ष आर्थिक सहयोग को और गहरा बनाना चाहते हैं ।’’दोनों पक्षों ने आपूर्ति श्रृंखला पर संयुक्त कार्य समूह स्थापित करने पर सहमति व्यक्त की । इसके अलावा कोविड-19 महामारी से प्राप्त अनुभवों पर काम करने पर सहमत हुए ।

मंत्रालय के अनुसार, शिखर बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने शुरूआती संबोधन में भारत और यूरोपीय संघ के साथ यूरोपीय संघ के सभी सदस्य देशों के साथ मजबूत संबंधों के महत्व को रेखांकित किया । उन्होंने भारत और यूरोपीय संघ् के सामरिक संबंधों को 21वीं सदी में वैश्चिक भलाई के लिये महत्वपूर्ण ताकत बताया ।

विदेश मंत्रालय के अनुसार, बैठक में यूरोपीय संघ परिषद एवं यूरोपीय संघ आयोग के अध्यक्षों के अलावा समूह के 19 सदस्य देशों के नेताओं ने संबोधित किया।विदेश मंत्रालय द्वारा भारत-यूरोपीय संघ के नेताओं की बैठक के संबंध में जारी संयुक्त बयान में कहा गया है, ‘‘ आज की बैठक में साझे हितों, लोकतंत्र, स्वतंत्रता, कानून के शासन एवं मानवाधिकारों का सम्मान जैसे मूल्यों एवं सिद्धांतों को रेखांकित किया गया, जो हमारी सामरिक साझेदारी का मूल है । ’’

बयान में कहा गया है, ‘‘हम मानवाधिकार वार्ता की शुरूआत का स्वागत करते हैं जो दोनों पक्षों के बीच रचनात्मक सम्पर्क को पोषित करते हैं तथा साल 2022 में अगली बैठक को लेकर आशान्वित हैं।’’