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राहुल गांधी के अध्यक्ष पद से इस्तीफे की पेशकश पर अनिश्चितता बरकरार

लोकसभा चुनाव में करारी हार का सामना करने के बाद राहुल गांधी के अध्यक्ष पद से इस्तीफे की पेशकश को लेकर अनिश्चितता बरकरार है और दूसरी तरफ कई राज्यों में पार्टी की अंदरुनी कलह खुलकर सामने आ गई है। 

सूत्रों के मुताबिक गत 25 मई को कांग्रेस कार्य समिति (सीडब्ल्यूसी) की बैठक में गांधी की ओर से की गई इस्तीफे की पेशकश के बाद से स्थिति में कोई बदलाव नहीं आया है यानी गांधी अब भी अध्यक्ष पद से मुक्त होने के अपने रुख पर कायम है। 

वैसे, कांग्रेस नेताओं का बड़ा धड़ा यह उम्मीद कर रहा है कि गांधी अपने फैसले पर पुनर्विचार करेंगे और अगले कुछ महीनों के बाद महाराष्ट्र, हरियाणा, झारखंड और जम्मू-कश्मीर में होने वाले विधानसभा चुनाव में पार्टी का नेतृत्व करेंगे। 

गांधी के इस्तीफे की पेशकश के बाद से कांग्रेस नेताओं के एक धड़े के बीच यह चर्चा लगातार हो रही है कि राहुल गांधी के अपने रुख से पीछे नहीं हटने की स्थिति में पार्टी नेतृत्व को लेकर कुछ अंतरिम व्यवस्था की जा सकती है।

राहुल गांधी के इस्तीफे की पेशकश से जुड़ी मौजूदा स्थिति के संदर्भ में पूछे जाने पर पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने कहा, ‘‘मीडिया में और दूसरे लोग अपने स्तर से अटकलें लगा रहे हैं। पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं की यही भावना है कि राहुल गांधी ही पार्टी को मजबूती दे सकते हैं। वैसे, आखिर में राहुल गांधी जो भी फैसला करेंगे, सभी को वह स्वीकार होगा।’’ 

कांग्रेस अध्यक्ष के इस्तीफे पर अनिश्चितता के बीच कई पंजाब, उत्तर प्रदेश, राजस्थान और तेलंगाना सहित कई राज्यों में पार्टी की अंदरुनी कलह खुलकर सामने आ गई है। 

लोकसभा चुनाव में पश्चिमी उत्तर प्रदेश में कांग्रेस के निराशाजनक प्रदर्शन की समीक्षा के लिए मंगलवार को बुलाई गई बैठक के दौरान और बाद में नेताओं के बीच जमकर कहासुनी हुई। 

सूत्रों के मुताबिक पार्टी के पश्चिमी उत्तर प्रदेश प्रभारी ज्योतिरादित्य सिंधिया की अध्यक्षता में हुई बैठक में शामिल कई नेताओं ने कांग्रेस के कुछ वरिष्ठ नेताओं के बारे में शिकायत की, तो कुछ नेताओं ने चुनाव के दौरान संगठन की तरफ से उचित सहयोग नहीं मिलने का मुद्दा उठाया। 

दूसरी तरफ, जयपुर की पूर्व महापौर और लोकसभा चुनाव में जयपुर सीट से कांग्रेस की प्रत्याशी रहीं ज्योति खंडेलवाल ने आरोप लगाया है कि पार्टी के कुछ नेताओं के भीतरघात के चलते वह चुनाव हार गयीं न कि ‘मोदी सुनामी’ उनकी हार का प्रमुख कारण है। 

इस लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को करारी हार का सामना करना पड़ा है और उसे सिर्फ 52 सीटें हासिल हुई हैं।