वित्त मंत्री अरुण जेटली ने शनिवार को कहा कि बालाकोट आतंकवादी शिविरों पर हुए हवाई हमलों से हुए नुकसान का हिसाब मांग कर विपक्ष ने खुद अपने पैरों पर कुल्हाड़ी मार ली है। इंडिया टीवी के एक कार्यक्रम के दौरान जेटली ने कहा कि सशस्त्र बलों द्वारा की गई सर्जिकल स्ट्राइल या हवाई हमला लोकसभा चुनाव अभियान का हिस्सा नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा, ‘‘मैं चुनाव आयोग से पूर्णतया सहमत हूं कि राजनीतिक पोस्टरों पर शहीदों की तस्वीरों का इस्तेमाल नहीं होना चाहिए।’’ उन्होंने 1971 युद्ध का उदाहरण देते हुए कहा कि पूरा विपक्ष सरकार के साथ खड़ा था और जन संघ के नेता अटल विहारी वाजपेयी ने सभी मंचों पर सरकार का बचाव किया था।

हालांकि वित्त मंत्री ने कहा कि विपक्ष के कुछ सदस्यों ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर पुलवामा और बालाकोट घटनाओं का राजनीतिकरण करने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि 21 विपक्षी दलों के बयान से भारत के राष्ट्रीय हित को नुकसान पहुंचा है और उसने पाकिस्तान को देश की साख खराब करने का मौका दिया है।

जेटली ने कहा, ‘‘देश की जनता के दिमाग में भ्रम पैदा करने के लक्ष्य से सशस्त्र बलों की कार्रवाई पर सवाल उठाना अपने पैरों पर खुद कुल्हाड़ी मारने जैसा था।’’ उन्होंने कहा कि इससे उलट अमेरिका ने जब अल-कायदा सरगना ओसामा बिन-लादेन के खिलाफ कार्रवाई की थी तो किसी ने उसपर सवाल नहीं उठाया और नाहीं सबूत मांगे। भाजपा नेता बी. एस. येदियुरप्पा द्वारा सशस्त्र बलों की कार्रवाई का राजनीतिकरण करने की कोशिश के बारे में सवाल करने पर केन्द्रीय वित्त मंत्री ने कहा कि उन्होंने यह गलत किया और पार्टी ने इसकी आलोचना की है।