सारदा चिट फंड घोटाला में कोलकाता के पूर्व पुलिस आयुक्त राजीव कुमार को गिरफ्तारी से अंतरिम संरक्षण देने वाले शीर्ष न्यायालय के आदेश को रद्द करने की सीबीआई की अर्जी पर शुक्रवार को उच्चतम न्यायालय के फैसला सुनाने की संभावना है। कुमार चिट फंड घोटाले की जांच करने वाली पश्चिम बंगाल एसआईटी का आरंभ में नेतृत्व कर रहे थे। बाद में, मई 2014 में शीर्ष न्यायालय ने सीबीआई को इस मामले की जांच करने का निर्देश दिया था।

सीबीआई ने शीर्ष न्यायालय से कहा कि वह कुमार को हिरासत में लेकर पूछताछ करना चाहती है क्योंकि इस बारे में प्रथम दृष्टया साक्ष्य है कि वह साक्ष्यों को कथित तौर पर नष्ट करने या उनसे छेडछाड़ करने की तथा मामले में ऊंचे और ताकतवर लोगों को बचाने की कोशिश कर रहे थे।

 हालांकि, कुमार के वकील ने सीबीआई की दलीलों का का विरोध किया और प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पीठ से कहा कि जांच एजेंसी उन्हें महज अपमानित करने के लिए उनसे हिरासत में पूछताछ करना चाहती है और सीबीआई को कानूनी की प्रक्रिया का दुरूपयोग करने की इजाजत नहीं देना चाहिए।

कुमार के वकील ने पीठ से कहा कि आईपीएस अधिकारी से हिरासत में पूछताछ की मांग करने वाली सीबीआई की अर्जी दुर्भावनापूर्ण कवायद है। उल्लेखनीय है कि शीर्ष न्यायालय ने पांच फरवरी को कुमार को गिरफ्तारी से संरक्षण दिया था।

साथ ही उन्हें सीबीआई के समक्ष पेश होने और घोटाले से जुड़े मामलों की जांच में सहयोग करने का निर्देश दिया था। इस बीच, बुधवार को चुनाव आयोग ने कुमार को हटाने का आदेश दिया और उन्हें बृहस्पतिवार को केद्रीय गृह मंत्रालय में रिपोर्ट करने को कहा। वह पश्चिम बंगाल में सीआईडी के अतिरिक्त महानिदेशक पद पर नियुक्त थे।