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कांग्रेस-तृणमूल सदस्यों के हंगामे के कारण दो बार के स्थगन के बाद राज्यसभा पूरे दिन के लिए स्थगित

कर्नाटक के राजनीतिक घटनाक्रम पर कांग्रेस सदस्यों के और सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों के निजीकरण के मुद्दे पर तृणमूल कांग्रेस के सदस्यों के हंगामे की वजह से मंगलवार को राज्यसभा की बैठक दो बार के स्थगन के बाद दोपहर दो बजे पूरे दिन के लिए स्थगित कर दी गई। 

हंगामे की वजह से उच्च सदन में शून्यकाल, प्रश्नकाल और बजट पर चर्चा शुरू नहीं हो पायी। केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल में संसद सत्र के दौरान उच्च सदन में मंगलवार को पहली बार हंगामे की वजह से कार्यवाही बाधित हुई। दो बार के स्थगन के बाद दोपहर दो बजे सदन की बैठक शुरु होने पर तृणमूल कांग्रेस के सदस्यों ने सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों के निजीकरण के मुद्दे पर और कांग्रेस के सदस्यों ने कर्नाटक के राजनीतिक घटनाक्रम पर चर्चा कराने की मांग करते हुये नारेबाजी शुरु दी। 

उपसभापति हरिवंश ने नारेबाजी कर रहे सदस्यों से बजट पर चर्चा शुरु कराने का हवाला देते हुये शांति बनाये रखने की अपील की। अपनी मांग पर अड़े कांग्रेस और तृणमूल सदस्य आसन के समीप आकर नारेबाजी करने लगे। हंगामे में माकपा और भाकपा के भी कुछ सदस्य शामिल होकर आसन के समीप आ गए। 

उपसभापति ने हंगामा कर रहे सदस्यों से कहा कि बजट पर चर्चा की शुरुआत पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम के वक्तव्य से होनी है। उन्होंने सदस्यों से अपने स्थान पर लौट जाने एवं बजट पर चर्चा शुरू करने की अपील की। हंगामा नहीं थमने पर उपसभापति ने दोपहर दो बज कर करीब पांच मिनट पर सदन की बैठक बुधवार 11 बजे तक के लिये स्थगित कर दी। 

इससे पहले सुबह 11 बजे बैठक शुरू होने पर सभापति एम वेंकैया नायडू ने आवश्यक दस्तावेज पटल पर रखवाने के बाद कहा कि शून्यकाल स्थगित कर दो मुद्दों पर चर्चा करने के लिए नियम 267 के तहत उन्हें दो नोटिस मिले हैं। दोनों ही नोटिस उन्होंने अस्वीकार कर दिए हैं। 

सभापति ने कहा कि कांग्रेस सदस्य बी के हरिप्रसाद ने कर्नाटक मुद्दे पर चर्चा करने के लिए शून्यकाल स्थगित करने का अनुरोध किया है। नायडू ने कहा कि यह नोटिस इसलिए उन्होंने अस्वीकार किया क्योंकि शून्यकाल के दौरान कांग्रेस सदस्य यह मुद्दा उठा सकते हैं। 

गौरतलब है कि कर्नाटक की साल भर पुरानी कांग्रेस-जदएस गठबंधन सरकार 14 विधायकों के इस्तीफे की वजह से गिरने की कगार पर है। कांग्रेस ने भाजपा पर गठबंधन में दरार के लिए उकसाने का आरोप लगाया है। सभापति ने कहा कि तृणमूल कांग्रेस की डोला बनर्जी ने सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों के निजीकरण के मुद्दे पर चर्चा करने के लिए शून्यकाल स्थगित करने का अनुरोध करते हुए नोटिस दिया है। 

उन्होंने कहा, "लेकिन इस मुद्दे पर 21 जून को इसी सदन में चर्चा की जा चुकी है। जिस मुद्दे पर चर्चा हो चुकी है उस पर एक ही सत्र में दोबारा चर्चा नहीं की जा सकती इसीलिए बनर्जी का नोटिस भी अस्वीकार कर दिया गया है।" सभापति ने शून्यकाल आरंभ करने के लिए कहा। लेकिन इसी दौरान कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस के सदस्य अपने अपने मुद्दों पर चर्चा की मांग करते हुए आसन के समक्ष आ कर हंगामा करने लगे। 

उल्लेखनीय है कि तृणमूल सदस्यों ने कल भी यह मुद्दा उठाया था और आसन से बोलने की अनुमति न मिलने पर उन्होंने प्रश्नकाल के दौरान सदन की कार्यवाही का बहिष्कार किया था। नायडू ने सदस्यों से अपने स्थानों पर लौट जाने की अपील की। लेकिन सदन में व्यवस्था न बनते देख उन्होंने 11 बज कर करीब पांच मिनट पर ही बैठक दोपहर बारह बजे तक के लिए स्थगित कर दी। 

इससे पहले, पिछले सप्ताह राज्यसभा के लिए संपन्न उप चुनाव में गुजरात से जीते भाजपा सदस्य जुगलसिंह माथुरसिंह लोखंडवाला को उच्च सदन की सदस्यता की शपथ दिलाई गई। एक बार के स्थगन के बाद दोपहर बारह बजे जब उच्च सदन की बैठक पुन: आरंभ हुई तो सदन में फिर से हंगामा शुरू हो गया।  

उप सभापति हरिवंश ने हंगामा कर रहे कांग्रेस सदस्यों से कहा, "सभापति ने शून्यकाल में आपको कर्नाटक का मुद्दा उठाने की अनुमति दी थी लेकिन आप सहमत नहीं हुए।" उन्होंने तृणमूल कांग्रेस के सदस्यों से कहा, "सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों के निजीकरण के मुद्दे पर इसी सत्र में और इसी सदन में चर्चा हो चुकी है।"

  इसी बीच कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस के सदस्य आसन के समक्ष आ कर नारे लगाने लगे। उप सभापति ने इन सदस्यों से अपने स्थानों पर लौट जाने की अपील की । हंगामा थमते न देख उन्होंने 12 बज कर करीब चार मिनट पर ही बैठक को दोपहर दो बजे तक के लिए स्थगित कर दिया।