BREAKING NEWS

मोदी सरकार 2.0 की पहली वर्षगांठ पर कांग्रेस ने कसा तंज, ‘बेबस लोग, बेरहम सरकार’ का दिया नारा ◾मोदी जी की इच्छा शक्ति की वजह से सरकार ने साहसिक लड़ाई लड़ी एवं समय पर निर्णय लिये : नड्डा ◾कोविड-19 पर पीएम मोदी का आह्वान - 'लड़ाई लंबी है लेकिन हम विजय पथ पर चल पड़े हैं'◾दिल्ली में कोरोना संक्रमण के बढ़ते मामले को लेकर कांग्रेस, भाजपा के निशाने पर केजरीवाल सरकार◾राम मंदिर , सीएए, तीन तलाक, धारा 370 जैसे मुद्दों का हल दूसरे कार्यकाल की प्रमुख उपलब्धियां : PM मोदी ◾बीस लाख करोड़ रूपये का आर्थिक पैकेज ‘आत्मनिर्भर भारत’ की दिशा में बड़ा कदम : PM मोदी◾Coronavirus : दुनियाभर में वैश्विक महामारी का खौफ जारी, संक्रमितों की संख्या 60 लाख के करीब ◾कश्मीर के कुलगाम में सुरक्षाबलों के साथ मुठभेड़ में दो आतंकवादी मारे गए◾कोविड-19 : देश में अब तक 5000 के करीब लोगों की मौत, संक्रमितों का आंकड़ा 1 लाख 73 हजार के पार ◾मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल का एक वर्ष पूरे होने पर अमित शाह, नड्डा सहित कई नेताओं ने दी बधाई◾PM मोदी का देश की जनता के नाम पत्र, कहा- कोई संकट भारत का भविष्य निर्धारित नहीं कर सकता ◾लद्दाख के उपराज्यपाल आर के माथुर ने गृहमंत्री से की मुलाकात, कोरोना के हालात की स्थिति से कराया अवगत◾महाराष्ट्र : 24 घंटे में कोरोना से 116 लोगों की मौत, 2,682 नए मामले ◾दिल्ली-एनसीआर में महसूस किए गए भूकंप के झटके, रिक्टर स्केल पर तीव्रता 4.6 मापी गई, हरियाणा का रोहतक रहा भूकंप का केंद्र◾मशहूर ज्योतिषाचार्य बेजन दारुवाला का 90 वर्ष की उम्र में निधन, कोरोना लक्षणों के बाद चल रहा था इलाज◾जीडीपी का 3.1 फीसदी पर लुढ़कना भाजपा सरकार के आर्थिक प्रबंधन की बड़ी नाकामी : पी चिदंबरम ◾कोरोना प्रभावित टॉप 10 देशों की लिस्ट में नौवें स्थान पर पहुंचा भारत, मरने वालों की संख्या चीन से ज्यादा हुई ◾पश्चिम बंगाल में 1 जून से खुलेंगे सभी धार्मिक स्थल, 8 जून से सभी संस्थाओं के कर्मचारी लौटेंगे काम पर◾छत्तीसगढ़ के पूर्व CM अजीत जोगी का 74 साल की उम्र में निधन◾दिल्ली: 24 घंटे में कोरोना के 1106 नए मामले, मनीष सिसोदिया बोले- घबराएं नहीं, 50% मरीज ठीक◾

भारत में कोरोना के आँकड़े #GharBaithoNaIndiaSource : Ministry of Health and Family Welfare

कोरोना की पुष्टि

इलाज चल रहा है

ठीक हो चुके

मृत लोग

अमित शाह की रैली में शरणार्थियों का छलका दर्द

भारत सरकार ने नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) लागू करके पूर्वी पाकिस्तान और बांग्लादेश के शरणार्थियों को न्याय दिलाने की कवायद शुरू कर दी है। पाकिस्तान और बांग्लादेश की हिंदू कालोनियों में लगने वाले 'अल्लाह ओ अकबर' के नारों के बीच खुद को असहाय समझने वाले लोग सीएए कानून लागू होने से खुश नजर आ रहे हैं। 

अमित शाह की रैली में आए हुए शरणार्थियों से जब आईएएनएस ने बातचीत की तो उनका दर्द कुछ इस तरह छलका : लखीमपुर के रहने वाले विश्राम विश्वास ने बताया कि वह अपने दादा के साथ 1975 में पूर्वी पाकिस्तान से आए थे। उनके दादा के और उनके परिवार के साथ वहां पर बहुत अन्याय हुआ। वे अपना त्यौहार नहीं माना पाते थे। काफी लूट-पाट होती थी। इसके बाद उन्होंने उस देश को छोड़ने का निर्णय लिया। 

खीरी जिले के रमिया बेहड़ ब्लक में सुजानपुर (कृष्णनगर) के रहने वाले अनुकूल चंद्र दास ने बताया कि जब उनके पिताजी, मां, दादी और उनका एक छोटा भाई पूर्वी पाकिस्तान के जिला फरीदपुर की तहसील गोपालगंज क्षेत्र से विस्थापित होकर आए, तब उनकी उम्र मात्र 14 साल थी। 

शुरुआत में उनका परिवार माना कैम्प, रायपुर (तब के मध्यप्रदेश और वर्तमान छत्तीसगढ़) में रुका। 3 माह तक ट्रांजिट कैम्प में रुकने के बाद पहले 1700 परिवार उधम सिंह नगर और रुद्रपुर आए। वहां से सरकार ने इन परिवारों को खीरी जिले में विस्थापित किया। बाद में भी हजारों परिवार लगातार 1970 तक खीरी में आकर बसे। यह लोग सीएए कानून लागू होने की खुशी मना रहे हैं। 

रवींद्रनगर, मोहम्मदी तहसील खीरी के रहने वाले निर्मल विश्वास ने बताया कि उनका परिवार बांग्लादेश के जसोर जिला से आाए थे। तब निर्मल आठ साल के थे। सन् 1964 में अपने माता-पिता के साथ आए निर्मल के पिता खीरी तक नहीं पहुंचे और विस्थापन की दौड़ में कलकत्ता (कोलकाता) में ही उनकी मौत हो गई।

 

आज निर्मल 65 साल के बुजुर्ग हैं। उन्होंने बताया कि इनके पास वोटर कार्ड और राशन कार्ड तो बन गए, पर नागरिकता अभी तक नहीं मिली है। यह कानून लागू होने के बाद भारत के नागरिक बन जाएंगे। 

रमेश अहूजा ने बताया कि उनके परदादा लखीमपुर 1967 में आए थे। पूर्वी पाकिस्तान में छोटे बच्चों तक की हत्या होती थी। वहां के लोग हिंदुओं की बस्ती में जबरदस्ती नारेबाजी करते थे। ऐसी हालत में उनके दादाजी वहां से जान बचाकर भागे थे। 

विक्रम ने कहा, 'सीएए कानून का विरोध करने वालों को एक बार इस कानून के बारे में पढ़ना चाहिए। वे हम लोगों से मिलें, हम उन्हें अपनी दर्दभरी दास्तां सुनाएंगे, तब उन्हें यकीन होगा।'