BREAKING NEWS

आप नेता सुनीता, उमेद और अनवर भाजपा में शामिल◾बैंक धोखाधड़ी : हीरा कारोबारी के 13 ठिकानों पर सीबीआई छापे◾केजरीवाल के नामांकन पत्र दाखिले में चुनाव आयोग ने जानबूझकर विलंब नहीं किया : दिल्ली निर्वाचन कार्यालय◾केजरीवाल के पास कुल 3.4 करोड़ रुपये की संपत्ति, 2015 से 1.3 करोड़ रुपये बढ़त◾दावोस में डोनाल्ड ट्रंप से मिले इमरान , अमेरिकी राष्ट्रपति बोले- कश्मीर पर करीबी नजर◾टुकड़े-टुकड़े गैंग का अस्तित्व है और वह सरकार चला रहा है : थरूर◾गणतंत्र दिवस : 23 जनवरी को परेड रिहर्सल, दिल्ली पुलिस ने जारी की सूचना, ये मार्ग रहेंगे बंद, यहां से जाना होगा !◾ब्राजील के राष्ट्रपति बोलसोनारो शुक्रवार को चार दिवसीय यात्रा पर आएंगे भारत◾दिल्ली को सर्दी से मिली फौरी तौर पर राहत, उत्तर प्रदेश और हरियाणा में अभी भी शीत लहर ◾भारत कठिन दौर से गुजर रहा है, नीचे बनी रहेगी आर्थिक वृद्धि दर : अर्थशास्त्री◾अदालत ने आजाद की जमानत शर्तों में बदलाव कर चिकित्सा, चुनावी कारणों से दिल्ली आने की इजाजत दी◾अमित शाह की रैली में शरणार्थियों का छलका दर्द◾जम्मू कश्मीर के लोगों से उनकी समस्याओं के बारे में सुनना चाहता है केंद्र : नकवी ◾छह घंटे के इंतजार के बाद केजरीवाल ने नामांकन पत्र किया दाखिल◾TOP 20 NEWS 21 January : आज की 20 सबसे बड़ी खबरें◾बेटियों के खिलाफ FIRदर्ज होने पर मुनव्वर राना बोले- मुझ पर दर्ज करो मुकदमा, मैंने ऐसी बागी बेटियां पैदा की◾कोर्ट ने चंद्रशेखर आजाद की जमानत शर्तों में बदलाव कर चिकित्सा, चुनावी कारणों से दिल्ली आने की इजाजत दी◾कांग्रेस नेता कपिल सिब्बल ने CAA पर PM मोदी और अमित शाह को बहस की चुनौती दी◾लखनऊ में बोले अमित शाह- जिसे विरोध करना हो करे, मगर सीएए वापस नहीं होने वाला◾पेरियार पर की गई टिप्पणी के लिए माफी नहीं मांगूंगा : रजनीकांत ◾

SC ने मुजफ्फरपुर आश्रय गृह की आठ लड़कियों को उनके परिवार को सौंपने की दी इजाजत

उच्चतम न्यायालय ने यौन उत्पीड़न के आरोपों की वजह से चर्चा में आये बिहार के मुजफ्फरपुर के एक आश्रय गृह की 44 में से आठ लड़कियों को सभी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद उनके परिवारों को सौंपने की बृहस्पतिवार को अनुमति दे दी। 

न्यायमूर्ति एन वी रमण, न्यायमूर्ति एम एम शांतानागौडार और न्यायमूर्ति अजय रस्तोगी की पीठ ने टिस की कार्य परियोजना ‘कोशिश’ द्वारा पहचान की गयी इन आठ लड़कियां को सभी आवश्यक वित्तीय और मेडिकल सहायता उपलब्ध कराने का बिहार सरकार को निर्देश दिया।

 

टाटा इंस्टीट्यूट आफ सोशल साइंसेज (टिस) ने बिहार में संचालित आश्रय गृहों का सोशल आडिट करके अपनी रिपोर्ट राज्य सरकार को दी थी। टिस की रिपोर्ट से ही यह तथ्य सामने आया बिहार के मुजफ्फरपुर में एक गैर सरकारी संगठन द्वारा संचालित इस आश्रय गृह में अनेक लड़कियों का कथित रूप से यौन उत्पीड़न किया गया। 

पीठ ने टाटा इंस्टीट्यूट आफ सोशल साइंसेज (टिस) को शेष 36 लड़कियों के मामले में स्थिति रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया है। 

पीठ ने राज्य सरकार को इस तरह की पीड़ितों को योजना के तहत देय क्षतिपूर्ति का आकलन करने और इस संबंध में आठ सप्ताह में न्यायालय को अपनी रिपोर्ट देने का भी निर्देश दिया। 

टिस द्वारा अपनी कार्य परियोजना ‘कोशिश’ की रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में पेश रिपोर्ट के अवलोकन के बाद शीर्ष अदालत ने यह निर्णय दिया। ‘कोशिश’ की इस रिपोर्ट में कहा गया था कि आठ लड़कियों को उनके परिवारों को सौंपा जा सकता है। ये लड़कियां पूरी तरह स्वस्थ हैं। 

टिस की ओर से अधिवक्ता वृन्दा ग्रोवर ने कहा कि यौन उत्पीड़न का मामला सुर्खियों में आने के बाद से ये 44 लड़कियां चार अलग अलग आश्रय गृहों में रह रही हैं। 

उन्होंने कहा कि कुछ लड़कियों को उनके परिवार वापस लेने के लिये तैयार हैं जबकि कुछ अन्य लड़कियां विशेष जरूरत वाली बच्चियां हैं। उन्होंने कहा कि एक लड़की अपने परिवार का पता बताने में असमर्थ है लेकिन उसने उस इलाके का विवरण दिया है जहां उसका परिवार रहता है। 

न्यायालय इस मामले में बिहार सरकार के एक आवेदन पर विचार कर रहा था। इसमें राज्य सरकार ने मुजफ्फरपुर आश्रय गृह की 44 लड़कियों के पुनर्वास और उन्हें उनके परिवारां को सौंपने की प्रक्रिया पूरी करने की अनुमति मांगी थी। ये लड़कियां इस समय अलग अलग आश्रय गृहों में रह रही हैं। 

शीर्ष अदालत ने इस साल जुलाई में कोशिश को इन बच्चियों और उनके परिवार के सदस्यों से बात करने की अनुमति प्रदान की थी ताकि यह पता चल सके कि क्या वे अपने बच्चों को लेने के लिये तैयार हैं। 

बिहार सरकार की ओर से पेश वकील ने इससे पहले न्यायालय से कहा था कि मुजफ्फरपुर आश्रय गृह के बच्चों को अलग अलग बच्चों की देखभाल करने वाली संस्थाओं में रखा गया है और इनमें से कुछ लड़कियों के व्यवहार में आक्रामकता नजर आने लगी है और वे खुद को नुकसान पहुंचाने का भी प्रयास कर रही हैं। 

शीर्ष अदालत ने जून महीने में केन्द्रीय जांच ब्यूरो को इस मामले की जांच पूरी करने के लिये तीन महीने का वक्त दिया था। जांच ब्यूरो को इस दौरान संदिग्ध हत्या के मामलों की भी जांच पूरी करनी थी। न्यायालय ने जांच ब्यूरो को अपनी जांच का दायरा बढ़ाने और इस अपराध में ‘बाहरी लोगों’ के शामिल होने की जांच का पता लगाने का भी निर्देश दिया था। 

यही नहीं, शीर्ष अदालत ने इस मामले में अप्राकृतिक यौनाचार के आरोपों की भारतीय दंड संहिता की धारा 377 के तहत जांच करने के लिये भी कहा था। 

इस मामले में सीबीआई ने आश्रय गृह में रहने वाली लड़कियों का कथित यौन शोषण और उनसे शारीरिक हिंसा के आरोपों में 21 व्यक्तियों के खिलाफ आरोप पत्र दायर किया है। इन सभी पर दिल्ली की अदालत में मुकदमा चल रहा है। 

शीर्ष अदालत ने इस साल फरवरी में इस मामले को बिहार से दिल्ली में साकेत अदालत परिसर में स्थित बच्चों का यौन अपराधों से संरक्षण कानून (पोक्सो) के तहत मुकदमों की सुनवाई करने वाली अदालत में स्थानांतरण कर दिया था।