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SC ने मनी लॉन्ड्रिंग केस में विजय माल्या को दिया आखिरी मौका, अदालत में 24 फरवरी तक पेश होने को कहा

भगौड़ा कारोबारी विजय माल्या को मनी लॉन्ड्रिंग मामले में अपना बचाव करने के लिए देश की सर्वोच्च अदालत में आखिरी मौका मिला है। माल्या को 24 फरवरी तक कोर्ट में पेश होने के लिए कहा गया है। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने नीरव मोदी और विजय माल्या जैसे भगौड़े कारोबारियों की वतन वापसी के लिए सरकार से उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई को रोकने पर विचार करने के लिए कहा था। शीर्ष अदालत ने कहा कि अगर विजय माल्या ऐसा करने में विफल रहता है तो अदालत मामले का तार्किक निष्कर्ष निकालेगी। विजय माल्या फिलहाल ब्रिटेन  की राजधानी लंदन  में रह रहा है।

पांच साल से अधिक समय से ब्रिटेन में रह रहे माल्या की वहां पर भी मुश्किलें कम नहीं हो रही हैं। दरअसल, लंदन में स्थित माल्या के घर पर कर्जदाता पहुंच रहे हैं, जिनसे माल्या ने कर्जा लिया था। ब्रिटेन की एक अदालत ने कहा था कि अगर बैंक के कर्ज को विजय माल्या चुका नहीं पाता है तो बैंक उसकी उच्च कीमत वाली संपत्ति पर कब्जा कर सकते हैं। 65 वर्षीय पूर्व किंगफिशर एयरलाइंस के बॉस ने फैसले के खिलाफ अपील करने का इरादा भी किया है. हालांकि, हाईकोर्ट के एक जस्टिस का कहना है कि इस मामले में माल्या को राहत नहीं मिलने वाली है और उसे घर खाली करना पड़ सकता है।

पिछले महीने टल गई थी सुनवाई

इससे पहले, 18 जनवरी को विजय माल्या के खिलाफ अवमानना मामले में सुनवाई होने वाली थी। लेकिन जस्टिस यू यू ललित और जस्टिस ह्रषिकेश रॉय की बेंच के उपलब्ध ना होने के सुनवाई टल गई थी। दरअसल, पिछले साल नवंबर में विदेश मंत्रालय ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता के जरिए सुप्रीम कोर्ट को एक नोट सौंपा था, जिसमें कहा गया था कि माल्या के प्रत्यर्पण की प्रक्रिया अपने अंतिम चरण में हैं. वहीं, जस्टिस ललित ने कहा था कि हमने माल्या का बहुत इंतजार कर लिया है. ये दिन के उजाले की तरह साफ है कि इस शख्स को कार्यवाही में हिस्सा लेना होता तो वो यहां आता, लेकिन वह नहीं आया है।

10 जुलाई 2017 को माल्या को अदालत में पेश होने का आदेश दिया

गौरतलब है कि 2017 में माल्या को सुप्रीम कोर्ट की अवमानना का दोषी माना गया था। माल्या ने अपनी संपत्ति का ब्योरा नहीं देकर ऐसा किया था। इसके बाद कोर्ट ने 10 जुलाई 2017 को माल्या को अदालत में पेश होने का आदेश दिया था। लेकिन कुछ कार्यवाही के कारण जो उस समय पर ब्रिटेन में अदालतों में चल रही थी, शीर्ष अदालत द्वारा निर्देशों के बावजूद उनकी यहां पेशी नहीं हो सकी थी। यहां गौर करने वाली बात ये है कि अदालत ने माल्या से उसकी संपत्तियों को लेकर सवाल भी किया था. लेकिन उसने सही जवाब नहीं दिया।