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कोरोना के मद्देनजर SC ने दिया आदेश, कहा- महामारी में रिहा हुए कैदी अगले आदेश तक नहीं करेंगे आत्मसमर्पण

कोरोना वायरस महामारी के प्रसार और तीसरी लहर की आशंका को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को आदेश दिया कि उसके निर्देश पर कोविड-19 की दूसरी लहर के दौरान राज्यों की उच्चाधिकार प्राप्त समितियों द्वारा रिहा किये गए कैदियों को अगले आदेश तक आत्मसमर्पण करने के लिए नहीं कहा जाएगा। प्रधान न्यायाधीश एन वी रमण की अध्यक्षता में विशेष पीठ ने राज्यों की उच्चाधिकार प्राप्त समितियों को निर्देश दिया कि जेलों में भीड़ कम करने के लिए कैदियों की रिहाई पर उसके सात मई के आदेश को लागू करने में अपनाए गए नियमों की जानकारी पांच दिन के भीतर दाखिल की जाए।

शीर्ष अदालत ने राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (नालसा) से राज्यों की उच्चाधिकार प्राप्त समितियों द्वारा पालन किए गए नियमों के विवरण मिलने के बाद एक रिपोर्ट दायर करने को भी कहा है। कोविड 19 मामलों में “अभूतपूर्व वृद्धि” का संज्ञान लेते हुए, पीठ ने 7 मई को उन सभी कैदियों को तत्काल रिहा करने का आदेश दिया था जिन्हें पिछले साल जमानत या पेरोल दी गई थी।

इसने पाया था कि देश भर में लगभग 4 लाख कैदियों के रहने वाली जेलों में भीड़भाड़ कम करना कैदियों और पुलिस कर्मियों के स्वास्थ्य और जीवन के अधिकार से संबंधित मामला है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि जिन लोगों को पिछले साल मार्च में राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की उच्चाधिकार प्राप्त समितियों द्वारा जमानत पर रिहा करने की अनुमति दी गई थी, उन्हें किसी पुनर्विचार के बगैर ही समान राहत दी जाए।