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जम्मू-कश्मीर व लद्दाख में जल्द ही केंद्रीय तथा राज्य के रिक्त पद भरे जाएंगे : PM मोदी

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को राष्ट्र के नाम सम्बोधन में कहा कि जल्द ही जम्मू एवं कश्मीर तथा लद्दाख में केंद्रीय और राज्य के रिक्त पदों को भरने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी और वहां की जनता गुड गवर्नेंस और पारदर्शिता के साथ अपने लक्ष्यों को पाने में सफल होगी। 

प्रधानमंत्री ने राष्ट्र के नाम संबोधन में गुरुवार को कहा, 'केंद्र सरकार की प्राथमिकता रहेगी कि आने वाले समय में राज्य के कर्मचारियों को दूसरे केंद्र शासित प्रदेशों के कर्मचारियों के बराबर सुविधाएं मिलें। अभी केंद्र शासित प्रदेशों में एलटीसी, एचआरए, हेल्थ स्कीम दी जाती हैं लेकिन जम्मू-कश्मीर के अधिकारियों और पुलिस सेवा के लोगों को ये सुविधाएं नहीं मिलती हैं। इन सबके ये सुविधाएं मुहैया कराई जाएंगी।'

प्रधानमंत्री ने कहा, 'बहुत जल्द ही जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में सभी केंद्रीय और राज्य के रिक्त पदों को भरने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। इससे वहां रोजगार का अवसर बढ़ेगा। साथ ही केंद्र सरकार की कम्पनियों और प्राइवेट सेक्टर को भी रोजगार उपलब्ध कराने के लिए कहा जा जाएगा। इसके अलावा प्रधानमंत्री स्कॉलरशिप का भी विस्तार किया जाएगा।' 

प्रधानमंत्री ने चिंता जाहिर करते हुए कहा कि जम्मू-कश्मीर में राजस्व घाटा बहुत ज्यादा है। यह चिंता की बात है। बकौल प्रधानमंत्री, ' केंद्र राजस्व घाटा कम करने का प्रयास करेगी। केंद्र ने अभी कुछ कालखंड के लिए जम्मू-कश्मीर को सीधे केंद्र सरकार के शासन में रखने का फैसला बहुत सोच समझकर रखा है।'

प्रधानमंत्री ने कहा कि एक राष्ट्र के तौर पर एक परिवार के तौर पर आपने, हमने पूरे देश ने एक ऐतिहासिक फैसला लिया है। एक ऐसी व्यवस्था थी, जिसकी वजह से जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के हमारे भाई बहन अनेक सुविधाओं से वंचित थे जो उनके विकास में बाधा थी, हम सबके प्रयासों से अब दूर हो चुकी है। 

प्रधानमंत्री ने कहा, 'जो सपना बाबा साहब अम्बेडकर का था, श्यामा प्रसाद मुखर्जी का था, अटल जी का था, वो अब पूरा हो चुका है। जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में नए युग की शुरुआत हुआ है। अब देश में सभी देशवासियों के अधिकार समान हैं।'

प्रधानमंत्री ने कहा कि आप चर्चा भी करें तो पता नहीं चलता था कि अनुच्छेद 370 से जम्मू-कश्मीर के लोगों के जीवन में क्या लाभ हुआ। इस धारा ने जम्मू-कश्मीर को कुछ नहीं दिया। इन दोनों अनुच्छेद का देश के खिलाफ कुछ लोगों की भावनाएं भड़काने के लिए पाकिस्तान द्वारा एक शस्त्र के रूप में इस्तेमाल हो रहा था। 

प्रधानमंत्री ने कहा, 'अब व्यवस्था में बदलाव से जम्मू-कश्मीर के लोगों का भविष्य सुरक्षित होगा? हमारे देश में किसी भी दल की सरकार संसद में कानून बनाकर देश की भलाई के लिए काम करती है। कानून बनाते समय संसद में बहस होती है। संसद के बाहर भी चर्चा होती है। चिंतन मनन होता है। 

इस प्रक्रिया से गुजरकर जो कानून बनता है, वो पूरे देश के लोगों का भला करता है। लेकिन कोई कल्पना नहीं कर सकता कि संसद इतनी बड़ी संख्या में कानून बनाए और वो कानून देश के एक हिस्से में लागू ही ना हो। यहां तक की पहले की जो सरकारें एक कानून बनाकर वाहवाही लूटती थीं, वो भी ये दावा नहीं कर पाती थीं कि उनका बनाया कानून जम्मू-कश्मीर में भी लागू होगा। जो कानून देश की पूरी आबादी के लिए बनता था, उसके लाभ से जम्मू-कश्मीर के 1.5 करोड़ लोग वंचित रह जाते थे। 

प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि अब आर्टिकल-370 और 35ए बीते हुए इतिहास की बातें हो जाने के बाद उसके नाकारात्मक प्रभावों से जम्मू-कश्मीर बाहर निकलेगा, इसका मुझे पूरा विश्वास है। 

मोदी ने कहा, 'जब से वहां गर्वनर रूल लगा है, वहां का प्रशासन सीधे केंद्र सरकार के सम्पर्क में है। इससे वहां गुड गवर्नेंस का बेहतर प्रभाव जमीन पर दिखने लगा है और योजनाओं को जमीन पर उतारा जा रहा है। दशकों से लटके हुए प्रोजेक्ट्स को नई गति मिली है। हमने प्रशासन में एक नई संस्कृति लाने के लिए भरसक प्रयास किया है। हमने एंटी करप्शन ब्यूरो, इरिगेशन और अन्य विभागों से जुड़े प्रोजेक्ट्स में तेजी लाने का काम किया है। सभी को तेजी से आगे बढ़ाया जा रहा है।'

 

मोदी ने कहा कि हमारे देश का लोकतंत्र इतना मजबूत है, लेकिन आप यह जानकर चौंक जाएंगे कि जम्मू-कश्मीर में दशकों से हजारों लाखों लोग ऐसे हैं, जिन्हें वहां की विधानसभा, नगरपालिका चुनावों में मतदान करने का अधिकार नहीं था। 

प्रधानमंत्री ने कहा, 'ये वो लोग हैं, जो 1947 में बंटवारे के बाद पाकिस्तान से भारत आए थे। क्या इन लोगों के साथ अन्याय ऐसे ही चलता रहता। मैं वहां के भाइयों को एक बात और कहना चाहता हूं। आपका जनप्रतिनिधि आपके द्वारा ही चुना जाएगा। आपके बीच से ही आएगा। सीएम, मंत्रीपरिषद, सांसद सभी पहले जैसे ही होंगे। 

मुझे पूरा विश्वास है कि जम्मू-कश्मीर को आतंकवाद और अलगाववाद से मुक्त कराएंगे और यह विकास की नई ऊंचाइयों को पार करके पूरे विश्व को आकर्षित करने लगेगा। नागरिकों को उनका हक मिलेगा। शासन प्रशासन की सारी व्यवस्था जनहित कार्यो को तेजी से आगे बढ़ाएगी, तो मैं नहीं मानता कि यूनियन टेरेटरी की व्यवस्था वहां चलाए रखने की जरूत पड़ेगी। हां, लद्दाख में वह बनी रहेगी।'