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अयोध्या विवाद में सुन्नी वक्फ बोर्ड और निर्वाणी अखाड़े ने सुप्रीम कोर्ट के मध्यस्थता पैनल को लिखा पत्र

अयोध्या मामले में सुनवाई के बीच मुख्य दो पार्टियां सुन्नी वक्फ बोर्ड और निर्वाणी अखाड़े ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित मध्यस्थता समिति को एक पत्र लिखा है। पत्र के मुताबिक दोनों पक्ष फिर से कोर्ट के बाहर बातचीत से मुद्दे को सुलझाना चाहते हैं। जानकारी के मुताबिक पत्र सुप्रीम कोर्ट की ओर से नियुक्त मध्यस्थता पैनल के अध्यक्ष जस्टिस कलीफुल्ला को लिखा गया है। 

मुस्लिम पक्षकारों में से कुछ का मानना है कि राम जन्मभूमि हिंदुओं को देने में कोई हर्ज नहीं है लेकिन इसके बाद हिंदू किसी अन्य मस्जिद या ईदगाह पर दावा नहीं करें। अयोध्या पर सुप्रीम कोर्ट ने पहले मध्यस्थता से हल निकालने के लिए पैनल बनाया था। 155 दिनों तक कोशिशें भी हुईं, लेकिन कोई हल नहीं निकला था। यह सामने आया था कि हिंदू और मुस्लिम पार्टियां इस विवाद का समाधान निकालने में सफल नहीं रहीं। 

सुप्रीम कोर्ट ने मध्यस्थता के लिए जो पैनल बनाया था उसमें तीन लोग शामिल थे। इसमें सुप्रीम कोर्ट के जज एफएम कलीफुल्ला, सीनियर वकील श्रीराम पंचू और श्री श्री रविशंकर का नाम था। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट में मामले की रोजाना सुनवाई शुरू हुई। जानकारी के लिए बता दें की यह भूमि विवाद अयोध्या की 2.77 एकड़ जमीन के मालिकाना हक को लेकर है। 

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सुन्नी वक्फ बोर्ड ने साल 1961 में विवादित जमीन के मालिकाना हक के लिए केस किया था। बोर्ड ने कोर्ट द्वारा नियुक्त मध्यस्थता पैनल को पत्र लिखकर दोबारा बातचीत शुरू करने की मांग की है। इसी तरह की बात वाला पत्र निर्वाणी अखाड़े ने भी सुप्रीम कोर्ट को लिखा है। यह अयोध्या के तीन रामआनंदी अखाड़े में से एक है जो हनुमान गढ़ी मंदिर का संचालन और देखरेख करता है।