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SC ने रद्द किया शिक्षा और नौकरी के क्षेत्र में मराठा आरक्षण, कहा- 50% की सीमा तोड़ना समानता के खिलाफ

सुप्रीम कोर्ट ने मराठा आरक्षण को लेकर आज अपना अहम फैसला सुनाया है। 5 जजों की संवैधानिक बेंच ने मुद्दे पर सुनवाई करते हुए शिक्षा और नौकरी के क्षेत्र में मराठा आरक्षण को असंवैधानिक करार दिया है। इसके साथ ही कोर्ट ने कहा है कि इसकी सीमा को 50 फीसदी से ज्यादा नहीं बढ़ाया जा सकता। 

सुप्रीम कोर्ट ने कहा, कोई असाधारण परिस्थिति नहीं है, जिसके तहत मराठा समुदाय को आरक्षण देने के लिए मंडल फैसले के तहत तय की गई 50 प्रतिशत आरक्षण सीमा से अधिक आरक्षण दिया जाए। संवैधानिक बेंच ने सर्वसम्मति से फैसला सुनाया कि मराठा समुदाय को आरक्षण देने वाला महाराष्ट्र का कानून 50 प्रतिशत सीमा का उल्लंघन करता है।

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सुप्रीम कोर्ट ने कहा, इंद्रा साहनी द्वारा निर्धारित 50 प्रतिशत की सीमा सीमा अनुच्छेद 14 का उल्लंघन है। कोर्ट ने कहा कि मराठा समुदाय के लोगों को शैक्षिक और सामाजिक रूप से पिछड़ा घोषित नहीं किया जा सकता है। सर्वसम्मत निर्णय एक पीठ द्वारा दिया गया जिसमें जस्टिस एल। नागेश्वर राव, एस अब्दुल नाजेर, हेमंत गुप्ता और एस रवींद्र भट शामिल थे।

सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि मराठा समुदाय को 50 प्रतिशत से अधिक आरक्षण देने के लिए कोई असाधारण परिस्थिति नहीं थी। सुप्रीम कोर्ट ने सामाजिक और शैक्षिक रूप से पिछड़े वर्गों (एसईबीसी) अधिनियम, 2018 के लिए महाराष्ट्र राज्य आरक्षण को रद्द कर दिया, जो सार्वजनिक शिक्षा और रोजगार में मराठा समुदाय को आरक्षण प्रदान करता है।

सुप्रीम कोर्ट ने जोर दिया कि असाधारण परिस्थितियों के बिना 50 प्रतिशत की सीमा से अधिक अनुच्छेद 14 का उल्लंघन होता है, और यह 2019 में संशोधित 2018 अधिनियम बिना किसी असाधारण परिस्थितियों के सीमा से अधिक है। कोर्ट ने कहा कि एसईबीसी अधिनियम, जो सार्वजनिक शिक्षा और रोजगार में मराठा समुदाय को आरक्षण प्रदान करता है, असंवैधानिक है।