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राकांपा में विद्रोह के बाद पार्टी के केंद्र में पहुंची सुप्रिया सुले

महाराष्ट्र में सरकार बनाने को लेकर चले सियासी संग्राम के बीच राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) की आंतरिक प्रणाली में बदलाव देखने को मिल सकता है। राकांपा प्रमुख शरद पवार की बेटी सुप्रिया सुले ने पहले सत्र की शुरुआत से पहले बुधवार को नव निर्वाचित विधायकों के साथ ही चचेरे भाई अजित पवार (दादा) का भी स्वागत किया। 

राकांपा से बगावत करने वाले अजित पवार के बाद अब सुप्रिया सुले ही पार्टी के केंद्र में हैं। 

वह उन सभी बैठकों और वार्ताओं का हिस्सा रही, जो उनके पिता शरद पवार ने सरकार बनाने की दिशा में की थीं। अजीत पवार को पार्टी की पटरी पर वापस लाने में भी उनका अहम योगदान था। 

शनिवार को अजित पवार द्वारा बागी तेवर अपनाने के बाद सुले ने तुरंत अपना व्हाट्सएप स्टेटस बदल लिया। उन्होंने अपने सोशल मीडिया स्टेट्स को अपडेट करते हुए लिखा 'पार्टी और परिवार बंटे'। अब यह स्पष्ट है कि पवार परिवार की सारी गाथा सुप्रिया सुले के इर्द-गिर्द घूमेगी। 

पवार परिवार में हुए विद्रोह को सुले के उत्थान के रूप में देखा जा रहा है। जबकि इससे पहले तक राकांपा के मामलों में अजित पवार का दखल होता था। 

राकांपा के एक सूत्र ने बताया कि जिस तरह से पार्टी में सुप्रिया का दबदबा धीरे-धीरे बढ़ा तो अजित पवार चुपचाप परेशान नजर आ रहे थे। उन्होंने बताया कि पिछले कुछ दिनों से सुप्रिया सुले की दिनचर्या काफी व्यस्त थी और यहां तक कि इसमें पवार के सहयोगी प्रफुल्ल पटेल भी गायब थे। शरद पवार के बाद राकांपा की अगली वारिस सुप्रिया सुले के होने की ही संभावना है। 

पवार मंगलवार को होटल ट्राइडेंट में जोर से लगते जयकारों के बीच पहुंचे, जहां उद्धव ठाकरे को तीनों दलों के नेता के रूप में चुना गया। 

इस पूरे प्रकरण में, पवार ने शुक्रवार तक सस्पेंस बनाए रखा जब उन्होंने घोषणा की कि उद्धव ठाकरे गठबंधन का नेतृत्व करेंगे। इससे पहले वह कह रहे थे कि उन्हें नहीं पता था कि सरकार कौन बनाएगा। फिर एक अन्य अवसर पर उन्होंने कहा था कि भाजपा-शिवसेना गठबंधन को सरकार बनाने का जनादेश मिला है। 

इस बीच जैसे ही शिवसेना, कांग्रेस और राकांपा कॉमन मिनिमम प्रोग्राम पर अंतिम चरण में पहुंच रहे थे तो पवार ने गृह मंत्री अमित शाह की मौजूदगी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की और उनके बीच क्या हुआ, इसकी जानकारी नहीं है। 

अजित पवार के भाजपा खेमे में चले जाने के बाद पवार परिवार और पार्टी के लिए चौंकाने का क्षण था। मगर शरद पवार ने शांत रहते हुए हाई-वोल्टेज विद्रोह को शांत करने में कामयाबी हासिल की, जिससे साबित होता है कि वह एक अनुभवी राजनीतिक ऑपरेटर हैं। 

शरद पवार पिछले कुछ वर्षो से सेवानिवृत्ति के बारे में विचार कर रहे हैं। इसके बाद उनकी बेटी सुप्रिया सुले राकांपा में शीर्ष नेता के तौर पर जिम्मेदारी संभालेंगी।