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लखीमपुर खीरी कांड पर सुरजेवाला बोले- अजय मिश्रा को किया जाए बर्खास्त, आरोपियों की तत्काल हो गिरफ्तारी

लखीमपुर खीरी मामले में योगी सरकार के कदमों को लेकर सुप्रीम कोर्ट द्वारा असंतोष जताए जाने के बाद शुक्रवार को कांग्रेस ने केंद्र और राज्य सरकार पर जमकर निशाना साधा है और दोहराया कि गृह राज्य मंत्री के पद से अजय मिश्रा को बर्खास्त किया जाए तथा हिंसा के सभी आरोपियों की जल्द गिरफ्तारी की जाए।

आशीष मिश्रा साथ पुलिस दामाद की तरह कर रही है व्यवहार

पार्टी के मुख्य प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने उत्तर प्रदेश पुलिस पर अजय मिश्रा के बेटे के साथ ‘दामाद की तरह की व्यवहार करने’ का आरोप लगाया और कहा कि सुप्रीम कोर्ट के दो न्यायाधीशों का आयोग बनाकर उसकी देखरेख में इस मामले की जांच होनी चाहिए।

सुरजेवाला ने संवाददाताओं से कहा, ‘‘अजय मिश्रा टेनी का बेटा हत्या का आरोपी है, लेकिन पुलिस कह रही है कि आप पेश हो जाइए। क्या किसी हत्या के आरोपी को पुलिस पेश होने के लिए आग्रह करती है?’’ उन्होंने दावा किया, ‘‘अजय मिश्रा टेनी पर 17 साल से हत्या का एक मामला लंबित है।

सुप्रीम कोर्ट भी चाहता है जिम्मेदार सरकार 

यानी बाप हत्या का आरोपी और बेटा हत्या का मुलजिम है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ऐसे व्यक्ति को देश का गृह राज्य मंत्री बना रखा है तो कानून और संविधान की रक्षा कौन करेगा?’’ सुरजेवाला ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट को मंत्री के खिलाफ चल रहे मामले का भी संज्ञान लेना चाहिए।

आशीष मिश्रा के घर के बाहर चस्पा हुआ दूसरा नोटिस, कल नहीं पहुंचे तो जारी होगा अरेस्ट वारंट 

उन्होंने कहा, ‘‘ आज सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हम जिम्मेदार सरकार चाहते हैं। क्या योगी आदित्यनाथ सरकार और नरेंद्र मोदी सरकार को एक मिनट भी पद पर बने रहने का अधिकार है? क्या यह साबित नहीं होता कि मोदी सरकार और योगी सरकार संविधान को कुचलने और लोगों को टायर के नीचे कुचलने वाले अपराधियों के साथ खड़ी हैं? कांग्रेस नेता ने कहा, ‘‘मोदी जी, 2002 में अटल बिहारी वाजपेयी के कहने पर भी आपने राजधर्म नहीं निभाया।

लेकिन यह राजधर्म निभाने की कसौटी है। तीन अक्टूबर से अपराधी गिरफ्त से बाहर हैं। हमारी एक मांग है कि बिना किसी विलंब को अजय मिश्रा को बर्खास्त किया जाए तथा सभी आरोपियों की तत्काल गिरफ्तारी की जाए।’’ उन्होंने कहा, ‘‘पुलिस, सरकार और सीबीआई जांच के काबिल नहीं है।

सुप्रीम कोर्ट के देखरेख में हो जांच

सुप्रीम कोर्ट के दो न्यायाधीशों का आयोग बनाकर उनकी देखरेख में जांच हो।’’ गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को कहा कि वह लखीमपुर खीरी हिंसा मामले में उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा उठाए गए कदमों से संतुष्ट नहीं है। साथ ही, न्यायालय ने उससे सवाल किया कि जिन आरोपियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है, उन्हें गिरफ्तार क्यों नहीं किया गया है। तीन अक्टूबर को हुई हिंसा की इस घटना में आठ लोग मारे गये थे।

प्रधान न्यायाधीश एन वी रमण की अध्यक्षता वाली पीठ ने उत्तर प्रदेश सरकार की तरफ से पेश हुए वकील हरीश साल्वे को शीर्ष पुलिस अधिकारियों को यह बताने को कहा कि मामले में साक्ष्य और संबद्ध सामग्री नष्ट नहीं हों।

किसानों का एक समूह उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य की यात्रा के खिलाफ तीन अक्टूबर को प्रदर्शन कर रहा था, तभी लखीमपुर खीरी में एक एसयूवी (कार) ने चार किसानों को कथित तौर पर कुचल दिया। इससे गुस्साए प्रदर्शनकारियों ने भाजपा के दो कार्यकर्ताओं और एक चालक की कथित तौर पर पीट-पीट कर हत्या कर दी, जबकि हिंसा में एक स्थानीय पत्रकार की भी मौत हो गई थी।

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