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राज्यसभा में उठा मंडी हाउस पर प्रदर्शन कर रहे दिव्यांगों को हटाए जाने का मुद्दा

राज्यसभा में गुरूवार को बसपा नेता सतीश चंद्र मिश्र ने दिल्ली के मंडी हाउस पर पिछले 16 दिनों से प्रदर्शन कर रहे दिव्यांगों को ‘जबरन’ हटाए जाने का मुद्दा उठाया और आरोप लगाया कि उनके साथ बर्बर व्यवहार किया गया। मिश्र ने शून्यकाल में यह मुद्दा उठाया और कहा कि उन लोगों को रेलवे में नौकरियों के लिए चयन हो गया था और उन्हें नियुक्तियां नहीं मिल रही हैं।

वे अपने हक के लिए शांतिपूर्वक प्रदर्शन कर रहे थे। लेकिन अर्धसैनिक बल द्वारा उन्हें हटा दिया गया और उनके साथ अमानवीय व्यवहार किया गया। उन्होंने रेल मंत्री से इस मुद्दे पर गौर करने और दिव्यांग लोगों को न्याय दिलाने की मांग की। इस पर सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री थावरचंद गहलोत ने कहा कि उन्होंने इस संबंध में रेल मंत्री से मुलाकात की थी और बाद में उनके विभाग के अधिकारियों ने रेल अधिकारियों से भेंट की। उन्होंने कहा कि वह फिर से रेल मंत्री से इस संबंध में गौर करने का आग्रह करेंगे। 

शून्यकाल में ही भाजपा के सत्यनारायण जटिया ने विभिन्न प्रकार के हादसों से बचाव के लिए सावधानी बरतने पर जोर दिया और कहा कि ऐसे मामलों में प्रशासन के साथ ही सामाजिक संगठनों को भी मदद ली जानी चाहिए।शून्यकाल में ही मनोनीत नरेंद्र जाधव ने विभिन्न राज्यों में खाद्य पदार्थों में मानकों का पालन नहीं होने का जिक्र किया और कहा कि यह लोगों के जीवन के साथ खिलवाड़ है।

 उन्होंने जांच के लिए पर्याप्त प्रयोगशालाएं नहीं होने की ओर भी सरकार का ध्यान आकृष्ट किया। उन्होंने खाद्य पदार्थों के मानकों का पालन किए जाने तथा जरूरी तंत्र विकसित किए जाने की मांग की। पीएमके सदस्य अंबुमणि रामदास ने कावेरी और गोदावरी नदियों को जल्दी जोड़े जाने की मांग की और विभिन्न नदियों के राष्ट्रीयकरण का सुझाव दिया। 

शून्यकाल में ही अन्नाद्रमुक सदस्य ए विजय कुमार और भाजपा के टीजी वेंकटेश ने भी लोक महत्व के अपने अपने मुद्दे उठाए। शून्यकाल में ही बीजद के सस्मित पात्रा, सरोजिनी हेम्ब्रम, प्रसन्न आचार्य और अमर पटनायक, तृणमूल कांग्रेस के मो. नदीमुल हक और कांग्रेस के राजमणि पटेल आदि ने विशेष उल्लेख के जरिए लोक महत्व के अपने अपने मुद्दे उठाए।