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मौजूदा खरीफ सत्र में धान की बुआई में आई कमी को पूरा कर लिए जाने की संभावना : कृषि मंत्रालय

कृषि मंत्रालय के नवीनतम आंकड़ों के मुताबिक मौजूदा खरीफ सत्र में धान की बुआई 231.59 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में ही हो पाई है जो पिछले साल की तुलना में 35.46 लाख हेक्टेयर कम है।

कृषि मंत्रालय के नवीनतम आंकड़ों के मुताबिक मौजूदा खरीफ सत्र में धान की बुआई 231.59 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में ही हो पाई है जो पिछले साल की तुलना में 35.46 लाख हेक्टेयर कम है। एक साल पहले 29 जून तक 267.05 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में धान की बुआई हुई थी।
भारत धान का दूसरा बड़ा उत्पादक और अग्रणी निर्यातक देश 
तोमर ने कहा कि धान की बुआई में इस साल गिरावट आई है लेकिन खरीफ सत्र के बचे हुए समय में इस कमी की भरपाई कर लिए जाने की संभावना है। कृषि मंत्रालय के आंकडों के मुताबिक धान की बुआई में सबसे ज्यादा 10.62 लाख हेक्टेयर की गिरावट पश्चिम बंगाल में आई है। उत्तर प्रदेश (6.68 लाख हेक्टेयर), बिहार (5.61 लाख हेक्टेयर), झारखंड (4.72 लाख हेक्टेयर) और तेलंगाना (4.06 लाख हेक्टेयर) भी धान की बुआई के मामले में काफी पीछे चल रहे हैं।
इसके अलावा ओडिशा, छत्तीसगढ़, त्रिपुरा और असम में भी इस खरीफ सत्र में धान की बुआई कम होने के आंकड़े सामने आए हैं। 
देश के पूर्वी एवं उत्तर-पूर्व इलाकों में बारिश 15 प्रतिशत कम 
धान खरीफ सत्र की प्रमुख फसल है और देश के कुल चावल उत्पादन का 80 प्रतिशत से भी अधिक इसी फसल सत्र में पैदा होता है। ऐसी स्थिति में धान की बुआई में कमी आने से चावल उत्पादन पर भी असर पड़ सकता है। खरीफ सत्र की फसलों की बुआई जून में दक्षिण-पश्चिम मानसून के सक्रिय होने के साथ ही शुरू हो जाती है। 
इस साल एक जून से 27 जुलाई के दौरान मानसूनी बारिश सामान्य से 10 प्रतिशत अधिक ही हुई है लेकिन देश के पूर्वी एवं उत्तर-पूर्व इलाकों में बारिश 15 प्रतिशत कम हुई है। इसका सीधा असर धान की बुआई पर पड़ा है। मौसम विज्ञान विभाग के मुताबिक, खास तौर पर उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल, मिजोरम और मणिपुर में मानसून कम सक्रिय रहा है।

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