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करगिल युद्ध में बाप-बेटे की इस जोड़ी ने दिया वीरता का परिचय, जिसे देख देश ने भी किया सलाम !

आज कारगिल युद्ध को 20 साल पूरे हो गए हैं। आज पूरा देश 'करगिल विजय दिवस' की 20वीं वर्षगांठ मना रहा है। साल 1999 में आज ही के दिन भारत माता के वीर सपूतों ने करगिल में पाकिस्तान को करारा जवाब दिया था। 

यह युद्ध करीब दो महीने तक चला था जिसमें भारतीय सेना ने साहस और जाबांजी का ऐसा उदाहरण पेश किया था जिसपर सभी देशवासियों को गर्व है। इस युद्ध में हिस्सा लेने वाले सैनिकों के जहन में आज भी इसकी यादें ताजा हैं।

वही , विजय की लड़ाई लड़ रहे जांबाज़ों में पिता और पुत्र की एक ऐसी भी जोड़ी (Father Lt Gen Am Aul Son Colonel Amit Aul Pair ) थी, जिन्होंने एक नई मिसाल कायम की। बता दे कि उन्‍होंने इस मौके पर करगिल युद्ध के शहीदों को अपनी श्रद्धांजलि भी दी।

जी हाँ ,1999 में पाकिस्‍तान के साथ हुए इस युद्ध में लेफ्टिनेंट जनरल औल 56 माउंटेन ब्रिगेड के कमांडर थे। जिसने द्रास सब सेक्‍टर में रणनीतिक रूप से महत्‍वपूर्ण टाइगर हिल पहाड़ी पर कब्‍जा किया था। लेफ्टिनेंट जनरल औल वेस्‍टर्न कमांड के चीफ ऑफ स्‍टाफ के पद से रिटायर हो चुके हैं।

लेफ्टिनेंट जनरल ऑल उस समय बिग्रेडियर थे और 56 माउंटेन ब्रिगेड का नेतृत्‍व कर रहे थे। इस ब्रिगेड ने तोलोलिंग और टाइगर हिल पर विजय पाई थी। 

वहीं , अमित उस समय 3/3 गोरखा राइफल्‍स में सेकंड लेफ्टिनेंट थे। अमित मारपो ला एरिया में तैनात थे। अब औल परिवार पंचकुला में रहता है, इन दोनों को ही सेना में बहादुरी के लिए पदकों से सम्‍मानित किया गया है। जनरल ऑल को उत्तम युद्ध सेवा मेडल और अमित को सेना मेडल मिला था। 

अमित ऑल ने बताया कि मुझे मेरे पिता ने सलाह दी थी कि इस बारे में माँ को सबकुछ नहीं बताना क्युकी तुम एक सिपाही हो जिसका कर्म है युद्ध करना। 

आगे अमित ऑल ने बताया कि उनकी और उसके पिता कि युद के दौरान बातचीत नहीं हो पाई थी और हम युद्ध के करीब दो माह के बाद ही मिले। अमित ऑल ने कहा कि मैंने अपना आखिर खत यूनिट को भेज दिया था। अगर कोई सैनिक युद्ध के मैदान में शहीद हो जाता है तो ये खत उसके परिवार को भेज दिया जाता है।  

वही , जब जनरल औल से पूछा गया कि क्‍या उन्‍हें अपने इकलौते बेटे की चिंता नहीं थी तो जनरल औल ने कहा कि युद्ध में ऐसे विचारों के लिए कोई जगह नहीं है। 

वह एक सैनिक था और आदेशों का पालन कर रहा था जोकि हर सैनिक को करना चाहिए। मुझे गर्व है कि उसने बहादुरी से युद्ध लड़ा और इसके लिए उसे पदक भी मिला।

वही इस बात पर जनरल औल की पत्‍नी का कहना है कि साल 1999 कारगिल युद्ध के इन ढाई महीनों में उन्‍होंने अपने पूरे जीवन भर की प्रार्थनाएं कर डाली थीं।