वित्त मंत्री अरुण जेटली ने रविवार को ‘संस्थागत अस्थिरता लाने वालों’ पर निशाना साधते हुए कहा कि उनका पूरी तरह से असत्यापित आरोपों को समर्थन देना भारत के मुख्य न्यायाधीश की संस्था को अस्थिर कर रहा है। उन्होंने कहा कि कहा कि झूठ बोलकर संस्थान को बदनाम करने वालों के खिलाफ अगर अनुकरणीय तरीके से कार्रवाई नहीं की जाती है फिर इस तरह की प्रवृत्ति में सिर्फ तेजी आएगी।

भारत के प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई के खिलाफ यौन उत्पीड़न के आरोपों के बाद एक ब्लॉग पोस्ट में जेटली ने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय की एक पूर्व जूनियर महिला कर्मचारी द्वारा उत्पीड़न का आरोप लगाए जाने को अनुचित तव्वजो दिया गया। वित्त मंत्री ने कहा, ‘ऐसी शिकायतें जब किसी भी प्रशासनिक कामकाज के सामान्य रूप से की जाती हैं तो उन्हें उपयुक्त समिति के पास भेजा जाता है।

हालांकि, जब शिकायतकर्ता अपने आरोपों को सनसनीखेज बनाने के लिए सर्वोच्च न्यायालय के अन्य और मीडिया को अपने ज्ञापन की प्रतियां वितरित करती है। तो इसे सामान्य तौर पर यही खत्म कर देना चाहिए। जेटली ने कहा कि जब चार डिजिटल मीडिया संस्थान ‘संस्थागत अवरोध’ के अनोखे ट्रैक रिकॉर्ड के साथ एक ही तरह के प्रश्न भारत के प्रधान न्यायाधीश को भेजते हैं तो निश्चित रूप से हम जो देख रहे हैं, समझ रहे हैं, मामला उससे कहीं ज्यादा है। अपने ब्लॉग में जेटली ने कहा कि भारत ने हमेशा अपनी स्वतंत्र न्यायपालिका पर गर्व किया है।

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प्रधान न्यायाधीश ने अपने खिलाफ लगे यौन उत्पीड़न के आरोप को शनिवार को सिरे से खारिज कर दिया और कहा कि यह न्यायपालिका की स्वतंत्रता को अस्थिर करने के लिए एक ‘बड़ी साजिश’ है, जिसके बारे में उन्होंने कहा, ‘यह बहुत गंभीर खतरे में है।’ सर्वोच्च न्यायालय की एक पूर्व कर्मचारी द्वारा लगाए गए आरोप के बाद मीडिया के एक वर्ग द्वारा इसकी रिपोर्ड किए जाने के बाद न्यायमूर्ति अरुण मिश्रा और न्यायमूर्ति संजीव खन्ना सहित प्रधान न्यायाधीश की अगुवाई वाली एक पीठ ने शनिवार को विशेष सुनवाई की थी।

जेटली ने कहा कि वर्तमान प्रधान न्यायाधीश का व्यक्तिगत शालीनता, मूल्यों, नैतिकता और अखंडता के मामले में बहुत सम्मान है। उन्होंने कहा, ‘यहां तक कि जब आलोचक उनके न्यायिक दृष्टिकोण से असहमत होते हैं, तब भी उनकी मूल्य प्रणाली पर सवाल नहीं उठाया गया है। एक असंतुष्ट व्यक्ति के पूरी तरह से अपुष्ट आरोपों का समर्थन करना प्रधान न्यायाधीश की संस्था को अस्थिर करने की प्रक्रिया की सहायता करना है।’

जेटली ने कहा कि प्रतिष्ठा किसी व्यक्ति के सम्मान के साथ जीने के मौलिक अधिकार का एक अभिन्न अंग है। एक अभित्रस्त न्यायाधीश एक संभावित दृष्टिकोण के परिणामों से डर सकता है। ‘इसलिए, यह आवश्यक है कि सभी अच्छे लोग न्यायिक संस्था के साथ तब खड़े हों, जब अवरोधक इस पर हमला करने के लिए तैयार हो जाए।’

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उन्होंने कहा कि चूंकि आरोपों से संबंधित मामला अदालत की पीठ के समक्ष न्यायिक पक्ष में लंबित है, इसलिए इसे अदालत की बुद्धिमत्ता पर छोड़ देना चाहिए कि वे इससे कैसे निपटना चाहते हैं। इनमें से कई अवरोधक वाम या अति वाम विचारों का प्रतिनिधित्व करते हैं। उनके पास कोई चुनावी आधार या लोकप्रिय समर्थन नहीं है। फिर भी, मीडिया और शिक्षा में अब भी उनकी अनुचित रूप से उपस्थिति है।

जब मुख्यधारा की मीडिया से बाहर हो गए तो उन्होंने डिजिटल और सोशल मीडिया की शरण ले ली है। वे पुराने मार्क्‍सवादी दर्शन में ‘सिस्टम को अंदर से खत्म करने’ पर विश्वास करते रहे हैं। भाजपा नेता ने कहा कि एक स्वतंत्र लोकतंत्र के लिए स्वतंत्र न्यायपालिका और स्वतंत्र मीडिया दोनों आवश्यक हैं और कोई एक दूसरे को नष्ट करने का काम स्वयं अपने हाथ में नहीं ले सकता।