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उपराष्ट्रपति चुनाव परिणाम : धनखड़ ने जीता चुनाव , प्रतिद्वंदी मार्गेट अल्वा को 346 मतों से किया पराजित

उपराष्ट्रपति चुनाव में एनडीए उम्मीदवार जगदीप धनखड़ ने अपनी प्रतिद्वंदी विपक्ष की संयुक्त उम्मीदवार को 346 मतों से पराजित कर दिया हैं। जगदीप धनखड़ को5 28  मत मिले हैं जबकि मार्गेट अल्वा को128 सांसदों का वोट मिल सका। एनडीए उम्मीदवार को गैर एनडीए दलों ने भी समर्थन किया हैं।  जबकि विपक्ष में उपजे असंतोष के कारण मार्गेट अल्वा के खिलाफ क्रोसवोंटिग की गयी । 

दरअसल एनडीए उम्मीदवार धनखड़ के जीत पहले से ही तय मानी जा रही थी । शनिवार को संसद में उपराष्ट्रपति चुनाव के लिए कुल 780 में से 725 सांसदों ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया। 

टीएमसी ने किया वोटिंग से किनारा , बसपा ने जगदीप का दिया साथ 

टीएमसी के 34 सांसदों, एसपी और शिवसेना के दो और बीएसपी के एक सांसद ने वोटिंग से किनारा किया। शाम पांच बजे तक मतदान चला और एक घंटे बाद यानि 6 बजे से काउंटिंग शुरू हुई। टीएमसी के दो सांसदों ने पार्टी के आदेश का उल्लंघन कर एनडीए उम्मीदवार के पक्ष में वोट डाला हैं। बीजेपी के भी दो सांसदो ने उपराष्ट्रपति चुनाव में वोट नहीं डाला हैं। 

धनखड़ का शैक्षिक व वकालत का सफर 

धनखड़ का जन्म 18 मई 1951 को राजस्थान राज्य के झुंझुनू जिले के एक छोटे से गाँव 'किठाना' में हुआ था। उनकी प्राथमिक शिक्षा किठाना गांव के स्कूल में हुई। उन्होंने अपनी स्कूली शिक्षा सैनिक स्कूल, चित्तौड़गढ़ से पूरी की और फिर राजस्थान विश्वविद्यालय, जयपुर से स्नातक की उपाधि प्राप्त की। 

देश के नामी -गिरामी वकीलों में शुमार रहे जगदीप धनखड़

स्कूली शिक्षा के बाद जगदीप धनखड़ ने राजस्थान के प्रतिष्ठित महाराज कॉलेज जयपुर में ग्रेजुएशन की पढ़ाई के लिए एडमिशन लिया। यहां से उन्होंने फिजिक्स में BSE की डिग्री ली| साल 1978  में उन्होंने जयपुर विश्वविद्यालय में एलएलबी कोर्स में एडमिशन लिया |कानून की डिग्री लेने के लेने बाद जगदीप धनखड़ ने वकालत शुरू कर दी और साल 1990 में जगदीप धनखड़ को राजस्थान हाईकोर्ट में सीनियर एडवोकेट का ओहदा दिया गया, जगदीप धनखड़ ने सुप्रीम कोर्ट से लेकर देश के कई हाईकोर्टों में वकालत की प्रैक्टिस की. साल 1988 तक देश में प्रतिष्ठित वकीलों में शुमार हो गए |

जगदीप धनखड़ का सियासी सफर 

वह 1989-91 के दौरान राजस्थान में झुंझुनू (लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र) से 9वीं लोकसभा में जनता दल का प्रतिनिधित्व करते हुए संसद सदस्य थे। वह 1993-98 के दौरान 10वीं विधान सभा राजस्थान में किशनगढ़, राजस्थान से विधान सभा के पूर्व सदस्य और राजस्थान उच्च न्यायालय बार एसोसिएशन, जयपुर के पूर्व अध्यक्ष भी रहे। जगदीप धनखड़ का राजनीतिक करियर करीब 30 सालों का है | वह चंद्रशेखर की सरकार में संसदीय कार्य मंत्री की जिम्मेदारी निभा चुके हैं ।

सदन की अहम समितियों का हिस्सा रहे जगदीप 

लोकसभा हो या विधानसभा वह जिस सदन के भी सदस्य रहे उसकी अहम समितियों में शामिल रहे हैं, इसके साथ ही उन्होंने राजस्थान में जाट बिरादरी को आरक्षण दिलाने में भी अहम भूमिका निभाई है।  20 जुलाई 2019 को उनको पश्चिम बंगाल का गवर्नर नियुक्त किया गया | बंगाल का गर्वनर रहने के दौरान धनखड़ को सत्तारूढ दल टीएमसी से काफी आलोचना को झेलना पड़ा।  लेकिन उपराष्ट्रपति चुनाव में टीएमसी ने राज्यसभा चुनाव में वोटिंग से अलग रहने का फैसला किया।  जिसका सीधे तौर धनखड़ को फायदा मिला।