आप सरकार ने विस्थापित कश्मीरी शिक्षकों के नियमन के लिए उनके मंत्रिमंडल द्वारा दी गई सहमति के फैसले पर संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) से उसका पक्ष जानना चाहा है। कश्मीर छोड़ कर आए यह शिक्षक दिल्ली के नगर निगम और सरकारी स्कूलों में अनुबंध पर करीब 13 वषो’ से काम कर रहे हैं।

दिल्ली उच्च न्यायालय ने दिल्ली सरकार को विस्थापित कश्मीरी शिक्षकों के नियमन पर तेजी से फैसला लेने का आदेश दिया है जिसके बाद सरकार ने यूपीएससी को एक पत्र लिखा है।

दिल्ली सरकार के अतिरिक्त स्थायी अधिवक्ता संतोष कुमार त्रिपाठी ने कहा कि UPSC को लिखे गए इस पत्र की प्रति को 15 सितंबर को अदालत के समक्ष रखा जाना था। लेकिन पीठ बैठी ही नहीं और अब इसे मामले की अगली सुनवाई 13 अक्तूबर को अदालत के समक्ष रखा जाएगा।

दिल्ली सरकार के शिक्षा महानिदेशालय (DOE) ने 21 अगस्त को UPSC को एक पत्र भेजा था जिसमें नियुक्ति की प्रक्रिया और आयु सीमा के प्रावधानों में रियायत देने की बात कही गई थी। दिल्ली सरकार ने यूपीएससी को बताया था कि 12 जुलाई को मंत्रिमंडलीय फैसले के बाद, उन्होंने उप राज्यपाल की अनुमति प्राप्त कर ली थी और अब वह इसपर आयोग की सहमति चाहते हैं।