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पत्थरबाजों पर प्रहार से हुर्रियत थर्राया, बोला- सरकार को नाराजगी पैदा करने वाले फरमान वापिस लेने चाहिए

जम्मू-कश्मीर में केंद्र सरकार ने कश्मीर घाटी में पत्थरबाजों पर कड़ा हमला किया और उनको तोड़ने के लिए ऐतिहासिक कदम उठाया। तो वहीं, हुर्रियत कांफ्रेंस ने पत्थरबाजों को पासपोर्ट के लिये सुरक्षा मंजूरी और नौकरी नहीं देने के जम्मू-कश्मीर पुलिस द्वारा जारी एक आदेश को लेकर सोमवार को चिंता व्यक्त की और आरोप लगाया कि यह कदम घाटी के लोगों के लिये रोजगार के दरवाजे बंद करने के मकसद से उठाया गया है।

जम्मू-कश्मीर पुलिस की अपराध जांच विभाग (सीआईडी) ​​शाखा ने शनिवार को जारी आदेश में अपने अधीन सभी क्षेत्र इकाइयों को सुनिश्चित करने को कहा कि पासपोर्ट और सरकारी नौकरी अथवा अन्य सरकारी योजनाओं हेतु सत्यापन के दौरान किसी व्यक्ति की कानून-व्यवस्था उल्लघंन, पत्थरबाजी के मामलों और राज्य में सुरक्षा बलों के खिलाफ अन्य आपराधिक गतिविधियों में संलिप्तता की विशेष तौर पर जांच हो।

मीरवाइज उमर फारूक के नेतृत्व वाले हुर्रियत के धड़े ने एक बयान में कहा, ''उपराज्यपाल के नेतृत्व वाले प्रशासन द्वारा एक के बाद एक निरंकुश आदेश जारी करना कश्मीरी लोगों के हितों के खिलाफ है, और यहां के लोगों के लिए रोजगार के दरवाजे बंद करना है।''

बयान में कहा गया है, ''पिछले कुछ हफ्तों में कई सरकारी कर्मचारियों की जबरन बर्खास्तगी के बाद, अब तथाकथित 'पत्थरबाज' या 'राष्ट्र-विरोधी' होने की आड़ में युवाओं को पासपोर्ट जारी नहीं करने और सरकारी नौकरी से वंचित करने की नीति बनाई जा रही है।'' संगठन ने कहा जिम्मेदार लोगों को अपनी ''दमनकारी रणनीति'' पर पुनर्विचार करना चाहिए और ऐसे फरमानों को वापस लेना चाहिए जिससे केवल और नाराजगी पैदा हो।