पाकिस्तान अपनी तरफ झुकाव रखने वाले भारतीय कश्मीरी युवकों की पीढ़ी तैयार करने के लिए उन्हें स्कॉलरशिप की पेशकश कर रहा है। इन छात्रों को अलगाववादी संगठन हुर्रियत के नेताओं की सिफारिश पर नई दिल्ली स्थित पाक उच्चायोग आसानी से वीजा जारी कर देता है। इसके बाद घाटी के युवाओं का पाकिस्तान के मेडिकल एवं इंजीनियरिंग कॉलेजों में सहजता से दाखिला हो जाता है। ऐसा नहीं कि यह सुविधा सभी कश्मीरियों के लिए है। सिर्फ उन्हीं परिवारों के बच्चों के लिए पाकिस्तान दरियादिली दिखा रहा है, जो या तो आतंकियों के रिश्तेदार हैं अथवा उनके परिवार का जुड़ाव अलगाववादियों से है।

दिल्ली की एक अदालत में टेरर फंडिंग मामले में 18 जनवरी को दाखिल चार्जशीट में यह आरोप लगाया है। आतंकियों या अलगाववादियों के परिवार के कश्मीरी युवाओं को वीजा व वजीफा देकर डॉक्टरी और इंजीनियरिंग पढ़ाने के पीछे उन्हें पाकिस्तान का पिट्ठू बनाना है। जांच के दौरान पाया गया कि ज्यादातर आतंकियों और अलगाववादियों के रिश्तेदार ही MBBS और इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने के लिए वीजा लेकर पाकिस्तान जा रहे हैं। वे पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले हुर्रियत नेताओं के सहयोग से अपने संबंधित काम करवाते हैं। पाकिस्तान सरकार की कई परियोजनाओं के अंतर्गत उन्हें वहां MBBS और इंजिनियरिंग सीटें उपलब्ध करवाई जाती हैं। आतंकवादी, हुर्रियत और पाकिस्तानी प्रतिष्ठान तीन केंद्रों में हैं और ये सभी मिलकर कश्मीर में डॉक्टरों और इंजिनियरों की ऐसी पीढ़ी पैदा कर रहे हैं, जिसका झुकाव पाकिस्तान की तरफ होगा।’

बता दें कि नईम खान और शाहिद-उल-इस्लाम के घर से ऐसे दस्तावेज जब्त किए गए जिसमें पाकिस्तान स्थित एक नामी मेडिकल कॉलेज में एक छात्रा के दाखिले की इस आधार पर सिफारिश की गई थी कि उसका परिवार कश्मीर में स्वतंत्रता संघर्ष के लिए हर तरह से प्रतिबद्ध है। आरोपपत्र में पाकिस्तान में रह रहे आतंकवादी हाफिज सईद, सैयद सलाहुद्दीन व सात अन्य कश्मीरी अलगाववादियों समेत तीन अन्य के नाम हैं। तथा हुर्रियत के जिन नेताओं के नाम हैं, उनमें अफताब हिलाली ऊर्फ शाहिद-उल-इस्लाम, एयाज अकबर खांडेय, फारूक अहमद डार ऊर्फ बिट्टा कराटे, नईम खान, अल्ताफ अहमद शाह, राजा मेहराजुद्दीन कलवल और बशीर अहमद भट ऊर्फ पीर सैफुल्लाह शामिल है।

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