नेशनल कॉन्फ्रेंस के उपाध्यक्ष उमर अब्दुल्ला ने पुलवामा आतंकवादी हमले पर दिल्ली में शनिवार को हुई सर्वदलीय बैठक में पारित किए गये प्रस्ताव में जम्मू में हिंसा और दूसरे राज्यों में तनाव के मद्देनजर शांति बनाए रखने की अपील को शामिल नहीं किए जाने को लेकर निराशा जाहिर की है।
सरकार की ओर से बुलाई गई सर्वदलीय बैठक में सभी बड़ी पार्टियों के वरिष्ठ नेता शामिल थे। इस बैठक में आतंकवादी हमले और सीमा पार से उसे मिल रहे समर्थन की निंदा करते हुए एक प्रस्ताव पारित किया गया। विपक्षी पार्टी के सदस्यों ने इस चुनौती से निपटने के लिए सरकार को समर्थन दिया है।
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उमर अब्दुल्ला ने ट्विटर पर कहा, “इस बात से निराश हूं कि प्रस्ताव में शांति की अपील शामिल नहीं की गई। जम्मू में हिंसा एवं कुछ राज्यों के यूनिवर्सिटी/ कॉलेज परिसरों में तनाव की खबरों को देखते हुए मैं निंदा एवं शोक जाहिर करने के साथ ही शांति की अपील की उम्मीद कर रहा था।”
जम्मू-कश्मीर की शीतकालीन राजधानी शुक्रवार को जम्मू वाणिज्य एवं उद्योग मंडल (जेसीसीआई) द्वारा बुलाई गई आम हड़ताल के दौरान बड़े पैमाने पर हुए पाकिस्तान विरोधी प्रदर्शनों से दहल गई थी।
लोगों ने आतंकवादी हमले के प्रति रोष जताने के लिए सड़कों पर प्रदर्शन किया और सीआरपीएफ के 40 शहीद जवानों को श्रद्धांजलि देने के लिए कैंडल मार्च भी निकाला।
पुलिसकर्मी समेत नौ लोग शुक्रवार को हुए पथराव में घायल हुए एवं कई वाहनों को नुकसान पहुंचाया गया और आग के हवाले कर दिया गया। जम्मू शहर में शनिवार को भी कर्फ्यू लगा रहा और सेना ने संवेदनशील स्थानों पर फ्लैग मार्च किया।
उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में पढ़ाई कर रहे कुछ कश्मीरी युवाओं ने आरोप लगाया है कि उनको परेशान किया जा रहा है एवं मकान मालिक अपने घरों पर हमला होने की आशंका में उनसे घर खाली करने को कह रहे हैं।


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