नेशनल कांफ्रेंस के नेता एवं जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने सवाल किया है कि यदि केंद्र सरकार तालिबान की मौजूदगी में रूस में अफगानिस्तान पर होने वाली वार्ता में हिस्सा ले सकती है तो उसने जम्मू कश्मीर में सभी हितधारकों से वार्ता शुरू क्यों नहीं की।

उमर ने बृहस्पतिवार की रात एक ट्वीट में कहा, ‘‘मोदी सरकार को यदि तालिबान की मौजूदगी में होने वाली वार्ता में ‘गैर-आधिकारिक’ भागीदारी स्वीकार्य है तो जम्मू-कश्मीर में गैर-मुख्यधारा के हितधारकों से ‘‘गैर-आधिकारिक’ वार्ता क्यों नहीं? जम्मू-कश्मीर की कम हो रही स्वायत्तता और इसकी बहाली के इर्द-गिर्द केंद्रित ‘‘गैर-आधिकारिक’’ वार्ता क्यों नहीं?’’

अफगान नेता, तालिबान के प्रतिनिधि शांति वार्ता में हुए शामिल, भारत ने ‘गैर-आधिकारिक’ स्तर पर की शिरकत

भारत ने बृहस्पतिवार को कहा था कि वह रूस की मेजबानी में राजधानी मॉस्को में आयोजित की जा रही वार्ता में ‘‘गैर-आधिकारिक स्तर’’ पर भागीदारी करेगा जिसमें तालिबान के प्रतिनिधि मौजूद रहेंगे।

रूस के विदेश मंत्रालय ने पिछले हफ्ते बताया था कि अफगानिस्तान पर शुक्रवार को होने वाली इस वार्ता में अफगान तालिबान कट्टरपंथी आंदोलन के प्रतिनिधि हिस्सा लेंगे।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने कहा, ‘‘हमें पता है कि रूसी फेडरेशन नौ नवंबर को मॉस्को में अफगानिस्तान पर एक बैठक की मेजबानी कर रहा है। इस बैठक में हमारी भागीदारी गैर-आधिकारिक स्तर पर होगी।’’

उन्होंने कहा कि अफगानिस्तान में शांति और सुलह के सभी प्रयासों का भारत समर्थन करता है जिनसे एकता और बहुलवाद संरक्षित रहेगा तथा देश में सुरक्षा, स्थिरता एवं समृद्धि आएगी।