नेशनल कांफ्रेंस ने शनिवार को जम्मू-कश्मीर से निषेधाज्ञा हटाने और ‘‘लगातार हिरासत’’ में चल रहे अपनी पार्टी के अध्यक्ष फारुक अब्दुल्ला एवं उपाध्यक्ष उमर अब्दुल्ला समेत तमाम नेताओं को रिहा करने की मांग की।
केंद्र ने जम्मू कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाले अनुच्छेद 370 के अधिकतर प्रावधानों को पांच अगस्त को हटा दिया था।
यहां शेर-ए-कश्मीर भवन में नेशनल कांफ्रेंस के वरिष्ठ नेताओं की बैठक में एक प्रस्ताव स्वीकृत किया गया जिसके अनुसार, ‘‘धर्मनिरपेक्ष एवं लोकतांत्रिक भारत का विचार देश के इस हिस्से (जम्मू कश्मीर) में संकट में है जो अपने इतिहास में सबसे भीषण दौर से गुजर रहा है।’’
उन्होंने कहा कि मौजूदा हालात 1975 के आपातकाल से भी बदतर हैं। अंतर बस ये है कि जम्मू कश्मीर अपनी पहचान और दर्जा खो बैठा है।
वरिष्ठ नेताओं पर प्रतिबंधों के चलते इस बैठक की अध्यक्षता रतन लाल गुप्ता ने की और 20 से ज्यादा नेताओं ने इसमें शिरकत की।


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