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जम्मू-कश्मीर

कश्मीर में पर्यटन उद्योग से जुड़े कारोबारियों को भविष्य की सता रही है चिंता

श्रीनगर : कश्मीर में सख्त पाबंदियां लगी होने के बावजूद श्रीनगर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर टैक्सी स्टैंड का कारोबार बेहतर चल रहा है। दरअसल, देश के अन्य हिस्सों और विदेश में रहने वाले कश्मीरी लोगों ने ईद-उल-अज़हा के मौके पर घर लौटना शुरू कर दिया है। 

टैक्सी परिचालकों और पर्यटन उद्योग के अन्य पक्षों के अनुसार उनका कारोबार तब तक प्रभावित रहेगा जब तक कश्मीर में सामान्य हालात बहाल नहीं हो जाते और सैलानी फिर से घाटी नहीं आने लगते। केंद्र की ओर से जम्मू कश्मीर से विशेष राज्य का दर्जा वापस लेने तथा राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों में बांटने के मद्देनजर कश्मीर घाटी में पाबंदियां लगाई गई हैं। 

पर्यटन कश्मीर की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है और यह तीन दशक से चल रहे आतंकवाद से काफी प्रभावित है। पुलवामा में सीआरपीएफ के काफिले पर आतंकी हमले, बालाकोट हवाई हमले के बाद भारत-पाकिस्तान के बीच बढ़ती शत्रुता, सुरक्षा बलों के काफिलों की आवाहजाही के लिए जम्मू-श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग पर पाबंदियों और संसदीय चुनाव की वजह से इस साल पर्यटन का दौर देर से शुरू हुआ। 

गौरतलब है कि इस साल 14 फरवरी को जैश-ए-मोहम्मद के आतंकवादी ने सीआरपीएफ के काफिले पर हमला कर दिया था। इस हमले में बल के 40 जवान शहीद हो गए थे। हवाई अड्डे पर टैक्सी परिचालक यूनियन के अध्यक्ष मोहम्मद अशरफ लोन ने कहा कि पर्यटन का दौर अब खत्म हो गया है और सभी पक्ष धूमिल भविष्य देख रहे हैं। 

उन्होंने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 370 के हटने के बाद घाटी के माहौल को देखते हुए अगले साल मार्च तक हमें पर्यटन के बढ़ने की कोई उम्मीद नजर नहीं आ रही है। 

उन्होंने कहा कि सरकार के कदम से पहले हमें उम्मीद थी कि अच्छी संख्या में सैलानी घाटी का रूख करेंगे। लोन ने कहा कि हमारा टैक्सी स्टैंड सैलानियों के आने पर ही निर्भर करता है, क्योंकि स्थानीय लोग अपने घर जाने के लिए निजी गाड़ी लाने को अपने परिवारों को कह देते हैं। 

सरकार ने फोन और इंटरनेंट को बंद कर दिया है, लिहाजा हम यह सुनिश्चित करने के लिए अपनी सेवा मुहैया करा रहे हैं ताकि वे अपने घर सुरक्षित तरीके से पहुंच जाएं। 

लोन ने कम से कम लैंडलाइन फोन की सेवाओं को जल्द से जल्द बहाल करने और टैक्सी परिचालकों को कर्फ्यू पास जारी करने का अनुरोध किया ताकि वे सुचारू रूप से काम कर सकें। 

उन्होंने कहा कि हम जानते हैं कि सोमवार को ईद के बाद स्थानीय लोगों का आना लगभग बंद हो जाएगा और फिर हमारे पास कोई काम नहीं होगा। 

परिवार के साथ बकरीद मनाने के लिए शनिवार को कई छात्र श्रीनगर हवाई अड्डे पहुंचे। वे ज़ाहिर तौर पर फिक्रमंद दिख रहे थे और घर तक पहुंचने के लिए टैक्सवाले को अतिरिक्त भुगतान करने को भी राज़ी थे। 

मॉरिशिस से लौटे एक कश्मीरी ने कहा, ‘‘ मैंने कुछ महीने पहले परिवार के साथ ईद मनाने की योजना बनाई थी। संचार माध्यमों पर लगी रोक को फौरन हटाना चाहिए, क्योंकि यह लोगों को मायूसी की ओर धकेल रहा है...उन्हें कम से कम लैंडलाइन सेवा बहाल करनी चाहिए ताकि लोग अपने परिवार से बात कर सकें।’’ 

स्थानीय प्रशासन ने श्रीनगर के कुछ हिस्सों में पांबदियों में रियायत दी है और विशेष बसें चलाने की भी योजना बना रहा है। 

लोगों को कम से कम असुविधा हो, इसके लिए प्रशासन ने विभिन्न इलाकों में 300 टेलीफोन बूथ बनाए हैं। 

सिर्फ टैक्सी परिचालकों को नुकसान का अंदेशा नहीं है, होटल कारोबारियों, हाउस बोट मालिकों और टूर तथा ट्रेवल एजेंटों को भी व्यवसाय में नुकसान का डर है। 

हाउस-बोट के मालिक बशीर अहमद ने कहा कि डल झील के तट शांति और सामान्य स्थिति लौटने की दुआ कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि हाउस बोट मालिकों ने बैंकों से लोन लिया है और मौजूदा हालत में उनके लिए महीने की किस्त देना बहुत मुश्किल होगा।