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जो ‘नया कश्मीर’ दिखाया जा रहा है, वह वास्तविकता नहीं है : महबूबा

पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) की अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने शनिवार को आरोप लगाया कि केंद्र ने जम्मू कश्मीर को ‘‘शांतिपूर्ण’’ दिखाया है जबकि असलियत यह है कि सड़कों पर खून बहाया जा रहा है और अपने विचार रखने के लिए लोगों पर आतंकवाद रोधी कानून थोपे जा रहे हैं। ‘‘नया कश्मीर’’ के बारे में यहां 'आज तक शिखर सम्मेलन' में महबूबा ने कहा कि उनके दिवंगत पिता मुफ्ती मोहम्मद सईद ने 2014 में भारतीय जनता पार्टी से इसलिए गठबंधन किया था क्योंकि वह राज्य में शांति का नया शासन लाना चाहते थे।

नया कश्मीर.......

उन्होंने कहा, ‘‘मेरे पिता ने पहले अटल बिहारी वाजपेयी जैसे नेता को देखा था और उन्हें उम्मीद थी कि भाजपा की नयी सरकार इसी विचारधारा पर काम करेगी।’’ जम्मू कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री ने ‘‘नया कश्मीर’’ शब्द के इस्तेमाल पर सवाल उठाया और कहा, ‘‘जिस नए कश्मीर का प्रचार किया जा रहा है वह सच्चाई नहीं है। आज 18 महीने की लड़की सुरक्षा बलों के हाथों मारे गए अपने पिता का शव पाने के लिए प्रदर्शन कर रही है।’’ उन्होंने पूछा, ‘‘आज, एक कश्मीरी पंडित की दिनदहाड़े हत्या कर दी गयी। सड़क पर एक बिहारी व्यक्ति का खून बहाया गया और हम इसे नया कश्मीर बुलाते हैं?

नया हिंदुस्तान

महबूबा ने केंद्र सरकार पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा, ‘‘नया कश्मीर’ भूल जाइए और ‘नया हिंदुस्तान’ के बारे में बात करिए...नए हिंदुस्तान में , संविधान के बारे में बात करने वाले हर व्यक्ति को ‘टुकड़े टुकड़े गिरोह’ का तमगा दिया जाता है, अल्पसंख्यकों, चाहे वे सड़क किनारे का विक्रेता हो या कोई फिल्म स्टार, उसे सामाजिक और आर्थिक रूप से बहिष्कृत कर दिया जाता है, कृषि कानूनों को निरस्त करने की मांग कर रहे किसानों को खालिस्तानी कहा जाता है और उन पर यूएपीए के तहत मुकदमा दर्ज किया जाता है।

अनुच्छेद 370 को रद्द करने का क्या असर पड़ा ?

महबूबा ने कहा, ‘‘यह नया हिंदुस्तान हो सकता है लेकिन यह मेरे गांधी का नहीं है। यह नाथूराम गोडसे का भारत लगता है और वे गोडसे का कश्मीर बना रहे है जहां लोगों को बोलने की आजादी नहीं है और यहां तक कि मुझे भी एक हफ्ते में कम से कम दो दिनों तक घर में नजरबंद किया जाता है।’’ यह पूछने पर कि अनुच्छेद 370 को रद्द करने का क्या असर पड़ा, इस पर उन्होंने कहा, ‘‘हमें सबसे पहले धोखा दिया गया। अगर यह गारंटी थी तो इसे रद्द क्यों किया गया। कई राज्य हैं जो बाहरी लोगों को जमीन खरीदने की अनुमति नहीं देते या अपने लोगों के लिए रोजगार सुनिश्चित करते हैं। अगर उनके साथ कोई दिक्कत नहीं है तो कश्मीर पर सवाल क्यों उठाना।

बल्कि सुरक्षाबलों की कड़ी मेहनत

उन्होंने आगाह किया कि कश्मीर में जो हो रहा है उसे बाकी देश में दोहराया जाएगा। पीडीपी नेता ने कहा कि केंद्र को जम्मू कश्मीर में जल्द से जल्द राजनीतिक प्रक्रिया शुरू करनी चाहिए और संवाद शुरू करना चाहिए। उन्होंने कहा कि वह सुरक्षा बलों के खिलाफ नहीं हैं। उन्होंने कहा, ‘‘बल्कि सुरक्षाबलों की कड़ी मेहनत से हमने इस तरह की शांति हासिल की जहां हम चुनाव करा सकते हैं। हालांकि नेताओं को निर्दोष लोगों को निशाना बनाने के लिए सुरक्षा बलों के कंधे पर रखकर बंदूक नहीं चलानी चाहिए।